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लचरागढ़ में शिक्षा और संस्कार का उत्सव, विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में मेधावी छात्रों का सम्मान

#लचरागढ़ #वार्षिक_परीक्षाफल : अभिभावक संगोष्ठी संग विद्यार्थियों की उपलब्धियों का भव्य सम्मान हुआ।

सिमडेगा जिले के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में वार्षिक परीक्षाफल वितरण और अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सराहा गया और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। मुख्य अतिथि जितेन्द्र सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहयोग का संदेश दिया।

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  • विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में भव्य कार्यक्रम आयोजित।
  • जितेन्द्र सिंह, लालमोहन सिंह, राजेंद्र साहू सहित अतिथियों की उपस्थिति।
  • छात्रों की उपलब्धियों और प्रगति का प्रस्तुतीकरण
  • कक्षा 5 से 7 तक के मेधावी छात्रों का सम्मान
  • अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सफल

लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में सोमवार का दिन शिक्षा, संस्कार और उपलब्धियों के उत्सव के रूप में यादगार बन गया। विद्यालय परिसर में आयोजित वार्षिक परीक्षाफल वितरण एवं अभिभावक संगोष्ठी कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच एक मजबूत संबंध को दर्शाया।

कार्यक्रम की शुरुआत माँ भारती, ॐ और माँ सरस्वती के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बन गया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

इस अवसर पर मुख्य अतिथि जितेन्द्र सिंह (प्रभारी, लचरागढ़ ओपी), कार्यक्रम अध्यक्ष लालमोहन सिंह, विद्यालय समिति के उपाध्यक्ष देवनारायण सिंह तथा प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू उपस्थित रहे।

दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई और पूरे परिसर में ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

विद्यालय की प्रगति का प्रस्तुतिकरण

कार्यक्रम के दौरान आचार्य अर्जुन महतो ने सत्र 2025–2026 का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसमें विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुशासन और विकास कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया।

शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर

प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने अपने संबोधन में कहा:

राजेंद्र साहू ने कहा: “हमारा उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को संस्कार और आधुनिक तकनीक से भी सशक्त बनाना है।”

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उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी सत्र से कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

मुख्य अतिथि का प्रेरणादायक संदेश

मुख्य अतिथि जितेन्द्र सिंह ने कहा कि बच्चों के जीवन में संस्कार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और अभिभावकों को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विद्यालय के संरक्षक नंदकिशोर अग्रवाल ने भी कहा कि वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा अब समाज परिवर्तन का माध्यम बन रही है।

मेधावी छात्रों का सम्मान

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न कक्षाओं के मेधावी छात्रों का सम्मान रहा। प्रमुख टॉपर्स इस प्रकार हैं—

कक्षा पंचम ‘अ’

प्रथम – लवली कुमारी, द्वितीय – मेघा कुमारी, तृतीय – आरती कुमारी

कक्षा पंचम ‘ब’

प्रथम – प्रीति कुमारी, द्वितीय – शिवानी कुमारी, तृतीय – जगरनाथ नायक, कृष्णा बागड़ी, ममता कुमारी

कक्षा षष्ठ ‘अ’

प्रथम – पूजा कुमारी, द्वितीय – नीतीश सिंह, विश्वकर्मा नायक, तृतीय – आयुष साहू

कक्षा षष्ठ ‘ब’

प्रथम – सोनू सिंह, द्वितीय – अंकित भुइंया, तृतीय – रविन्द्र सिंह

कक्षा सप्तम ‘अ’

प्रथम – वर्षा कुमारी, द्वितीय – अनामिका कुमारी, तृतीय – सौम्या कुमारी

कक्षा सप्तम ‘ब’

प्रथम – शशिभूषण नाग, द्वितीय – ऊषा रानी सिंह, तृतीय – चंद्रपाल सिंह

इन छात्रों की उपलब्धियों पर अभिभावकों और शिक्षकों ने गर्व व्यक्त किया।

अभिभावकों की भागीदारी बनी विशेष

कार्यक्रम में सैकड़ों अभिभावकों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा केवल विद्यालय का कार्य नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

एक अभिभावक ने कहा: “हम अपने बच्चों की सफलता में भागीदार बनकर गर्व महसूस कर रहे हैं।”

अनुशासन और संस्कृति की झलक

पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद पाणिग्रही ने किया।

अंत में प्रधानाचार्य ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।

शिक्षा का उजियारा बढ़ा

यह आयोजन केवल परिणाम वितरण नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और भविष्य निर्माण का एक मजबूत संदेश बनकर उभरा। वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा की यह पहल नई पीढ़ी के सपनों को साकार करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा और संस्कार का संतुलन ही असली ताकत

लचरागढ़ का यह आयोजन दिखाता है कि जब शिक्षा के साथ संस्कार जुड़ते हैं, तभी समाज का वास्तविक विकास संभव होता है। यहां बच्चों की उपलब्धियों के साथ मातृ-पितृ भागीदारी भी देखने को मिली, जो एक सकारात्मक संकेत है। अब यह देखना होगा कि ऐसी पहलें अन्य क्षेत्रों में कितनी तेजी से फैलती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों के भविष्य में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश

हर बच्चे की सफलता उसके परिवार और समाज की जीत होती है।
जरूरी है कि हम शिक्षा के साथ संस्कारों को भी समान महत्व दें।
अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
आइए, हम भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना योगदान दें।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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