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चैनपुर में नव संवत्सर 2083 का भव्य स्वागत, प्रभात फेरी में गूंजे राजा विक्रमादित्य के जयकारे

#चैनपुर #नवसंवत्सर : प्रभात फेरी के जरिए भारतीय नववर्ष परंपरा का दिया गया संदेश

चैनपुर में विक्रम संवत 2083 के स्वागत में मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर के तत्वावधान में भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। इस दौरान बच्चों और शिक्षकों ने जयघोष और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय नववर्ष का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

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  • मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर के तत्वावधान में प्रभात फेरी
  • बच्चों ने लगाए “राजा विक्रमादित्य अमर रहे” के जयकारे
  • पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने आकर्षित किया ध्यान
  • भारतीय संस्कृति और नववर्ष के महत्व पर दिया गया संदेश
  • विद्यालय परिवार और स्थानीय नागरिकों की रही भागीदारी

चैनपुर में भारतीय संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के प्रतीक नव वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ किया गया।

इस अवसर पर मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर के तत्वावधान में आयोजित भव्य प्रभात फेरी ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।

जयघोष से गूंजा पूरा क्षेत्र

प्रभात फेरी के दौरान विद्यालय के भैया-बहनों ने “नव वर्ष मंगलमय हो” और “राजा विक्रमादित्य अमर रहे” जैसे गगनभेदी जयकारों से वातावरण को ऊर्जावान बना दिया।

बच्चे हाथों में रंग-बिरंगी तख्तियां, स्लोगन और केसरिया ध्वज लिए हुए थे, जिससे कार्यक्रम और भी आकर्षक बन गया।

पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक

विभिन्न पारंपरिक वेशभूषा में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भारतीय संस्कृति की झलक पेश कर लोगों का मन मोह लिया।

प्रभात फेरी के दौरान नगर भ्रमण किया गया, जिससे आम लोगों के बीच भारतीय नववर्ष के प्रति जागरूकता का संदेश भी पहुंचा।

प्रधानाचार्य ने बताया नववर्ष का महत्व

नगर भ्रमण के पश्चात जनसमूह को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य बबुलाल आइंद ने कहा:

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बबुलाल आइंद ने कहा: “विक्रम संवत केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि हमारी पहचान और वैज्ञानिक काल गणना का प्रतीक है। हमारा उद्देश्य नई पीढ़ी में अपनी संस्कृति के प्रति स्वाभिमान जगाना है।”

उन्होंने बच्चों को अपनी संस्कृति और महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेने की बात कही।

आयोजन में विद्यालय परिवार की भूमिका

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार का सराहनीय योगदान रहा।

मौके पर प्रधानाचार्य बबुलाल आइंद, दीदीजी रेखा तिर्की, संगीता कुमारी, रिजरेन टोप्पो, पझरेंन बेक सहित विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने विद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

न्यूज़ देखो : परंपरा से जुड़कर मजबूत बनती पहचान

भारतीय नववर्ष केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और गौरवशाली इतिहास को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

संस्कृति को अपनाएं, पहचान को मजबूत बनाएं

अपने त्योहारों और परंपराओं को जानें
बच्चों को संस्कृति से जोड़ें
और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और भारतीय संस्कृति के इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं।

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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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