
#कोलेबिरा #धार्मिक_उत्सव : नवरात्रि और रामनवमी पर क्षेत्र में भक्ति और उत्साह चरम पर रहा।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा क्षेत्र में चैती दुर्गा पूजा, वसंत नवरात्रि और रामनवमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, वहीं रामनवमी पर भव्य झंडा जुलूस और अखाड़ा कार्यक्रम आयोजित हुए। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। यह आयोजन धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया।
- कोलेबिरा क्षेत्र में चैती दुर्गा पूजा और रामनवमी का भव्य आयोजन।
- नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना।
- महाबीर मंदिर रनबहादुर सिंह चौक से निकला भव्य झंडा जुलूस।
- विभिन्न गांवों से हजारों रामभक्तों की भागीदारी।
- अखाड़ा में अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन और लाठी-डंडा प्रतियोगिता।
- समिति द्वारा प्रतिभागियों और अतिथियों का किया गया सम्मान।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा क्षेत्र में चैती दुर्गा पूजा, वसंत नवरात्रि और रामनवमी का पर्व पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ भक्तों ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। अंतिम दिन विशेष पूजन और हवन के साथ मां को विदाई दी गई। वहीं रामनवमी के अवसर पर निकले भव्य जुलूस और अखाड़ा कार्यक्रमों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
नौ दिनों तक चला मां दुर्गा का विशेष पूजन
कोलेबिरा के बरवाडीह मोड़ स्थित स्थापित आदि शक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष पूरे नौ दिनों तक श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा की गई और श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर अपनी आस्था प्रकट की।
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की विशेष पूजा संपन्न हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने घरों से बनाए गए खीर, पूड़ी और हलुआ का भोग अर्पित किया। कई भक्तों ने अपने घरों में कलश स्थापना कर दुर्गा पाठ किया और नौ कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
हवन और पुष्पांजलि के साथ मां को दी विदाई
नवरात्रि के समापन पर हवन का आयोजन किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने माता को विदाई देते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।
इस धार्मिक अनुष्ठान ने क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण किया, जिससे लोगों के बीच आपसी एकता और सहयोग की भावना मजबूत हुई।
रामनवमी पर निकला भव्य महावीरी झंडा जुलूस
रामनवमी के अवसर पर कोलेबिरा और आसपास के गांवों बोंगराम, नवाटोली, बरवाडीह, बोकवा, केउन्डपानी, धोबी मोहल्ला और विकासनगर से भव्य महावीरी झंडा जुलूस निकाला गया।
यह जुलूस गाजे-बाजे और डीजे के साथ निकाला गया, जिसमें हजारों रामभक्त शामिल हुए। “जय श्री राम” और “जय हनुमान” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
महाबीर मंदिर रनबहादुर सिंह चौक से भगवान राम, माता सीता और हनुमान की आकर्षक झांकी के साथ जुलूस आगे बढ़ा और रामनवमी पहाड़ स्थित अखाड़ा में पहुंचा, जहां रामभक्त नाचते-गाते हुए शामिल हुए।
एक आयोजक ने कहा: “रामनवमी का यह आयोजन हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक है, जिसमें पूरे क्षेत्र के लोग एकजुट होकर भाग लेते हैं।”
अखाड़ा में हुआ अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन और प्रतियोगिता
रामनवमी पहाड़ स्थित अखाड़ा में अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन और लाठी-डंडा खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को दुर्गा पूजा सह रामनवमी पूजा समिति द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने युवाओं को अपनी परंपरा और कौशल से जोड़ने का कार्य किया।
अतिथियों का सम्मान और समिति की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान मंच पर उपस्थित अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सबसे ऊंचा और बड़ा झंडा लेकर महाबीर चौक से रामनवमी समिति के पदाधिकारी कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समिति के संरक्षक पुरषोत्तम प्रसाद, उपेंद्र प्रसाद, प्रदीप डे, रंजित कुमार, दिलेश्वर सिंह, जनेश्वर बिल्हौर, केदारनाथ सोनी, विनोद कुमार डब्ल्यू, सुबोध कुमार, अध्यक्ष चंदन कुमार, उपाध्यक्ष अभिषेक प्रसाद, धनंजय जा, प्रिंस कुमार सोनी, राहुल गुप्ता, सचिव अशोक इंदवार, सह सचिव सुमंत कुमार, कोषाध्यक्ष अशोक गुप्ता सहित समिति के राजेश सोनी, राहुल कुमार, डोला, अशोक गुप्ता, सुनिल साह, आश्रित इंदवार, सुजित प्रसाद, रंजित कुमार, सहदेव प्रसाद, रमेश सिंह, राजेश साहू, सोनू कुमार, प्रवीण कुमार, कृष्णा दास, योगेश सोनी, विक्रांत गोस्वामी, पारसनाथ सिंह समेत सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हजारों की संख्या में पहुंचे रामभक्तों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण बना कोलेबिरा
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