
#बानोलचरागढ़ #चैतीछठ : श्रद्धालुओं ने पूरे विधि विधान से सूर्य उपासना कर पर्व को बनाया भव्य और भक्तिमय।
सिमडेगा जिले के बानो, लचरागढ़ और कोलेबिरा क्षेत्र में चैती छठ पूजा चार दिवसीय अनुष्ठान के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुई। तीसरे दिन संध्याकालीन अर्घ्य के दौरान बड़ी संख्या में व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। विभिन्न घाटों पर उमड़ी भीड़ ने धार्मिक माहौल को और जीवंत बना दिया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।
- बानो, लचरागढ़ और कोलेबिरा क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया चैती छठ पर्व।
- देव नदी घाट, जलडेगा मोड़ तालाब सहित कई स्थानों पर उमड़ी भारी भीड़।
- संध्याकालीन अर्घ्य में व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्पित किया जल।
- विद्युत सज्जा और साफ-सफाई से घाटों का माहौल बना भव्य और आकर्षक।
- आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं का रखा गया विशेष ध्यान।
बानो, लचरागढ़ और कोलेबिरा क्षेत्र में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूजा पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व में क्षेत्र के विभिन्न घाटों और जलाशयों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना रहा और लोगों ने उत्साहपूर्वक इस पर्व में भाग लिया।
संध्याकालीन अर्घ्य के साथ दिखी आस्था की झलक
चैती छठ पूजा के तीसरे दिन संध्याकालीन अर्घ्य के अवसर पर व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान व्रती महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान के साथ भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की। पूरे वातावरण में भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
प्रमुख घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
लचरागढ़ स्थित देव नदी घाट, जलडेगा मोड़ के तालाब सहित अन्य जलाशयों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही लोग घाटों की ओर बढ़ने लगे थे और संध्या तक यह भीड़ और अधिक बढ़ गई। व्रतियों के साथ उनके परिवारजन और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में पूजा में शामिल हुए।
आकर्षक विद्युत सज्जा से जगमगाया पूरा क्षेत्र
पूरे आयोजन को लेकर लचरागढ़ मुख्य सड़क से लेकर देव नदी घाट तक भव्य विद्युत सज्जा की गई थी। रंग-बिरंगी लाइटों से सजे मार्ग और घाटों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस सजावट ने न केवल धार्मिक माहौल को और जीवंत बनाया, बल्कि पूरे क्षेत्र को उत्सव जैसा रूप दे दिया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए की गई विशेष व्यवस्थाएं
आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा छठ व्रतियों की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। घाटों की साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित किया गया, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
धार्मिक माहौल से गूंजा पूरा क्षेत्र
पूरे क्षेत्र में छठ पर्व को लेकर गहरा उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से पूजा-अर्चना में भाग लिया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सामाजिक समरसता और एकजुटता का भी सुंदर उदाहरण देखने को मिला, जहां सभी समुदाय के लोग मिलकर इस पर्व को सफल बनाने में जुटे रहे।
न्यूज़ देखो: आस्था और व्यवस्था का संतुलन बना प्रेरणादायक उदाहरण
चैती छठ पूजा का यह आयोजन यह दर्शाता है कि जब आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था का सही तालमेल होता है, तो बड़े से बड़ा धार्मिक आयोजन भी शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकता है। स्थानीय स्तर पर की गई तैयारी और समिति की सक्रियता सराहनीय रही। सवाल यह भी उठता है कि क्या इसी तरह की व्यवस्था हर बड़े आयोजन में कायम रखी जा सकती है? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के पर्व से मिलती है एकता और जिम्मेदारी की सीख
चैती छठ जैसे पर्व हमें न केवल धार्मिक आस्था से जोड़ते हैं, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजनों में हमारी भागीदारी और जिम्मेदारी दोनों महत्वपूर्ण होती हैं।
आइए, हम भी अपने आसपास होने वाले आयोजनों में सहयोग करें, स्वच्छता बनाए रखें और समाज को बेहतर बनाने में योगदान दें।
अपनी राय जरूर साझा करें, इस खबर को अपने दोस्तों और परिवार तक पहुंचाएं और सकारात्मक सोच के साथ समाज में जागरूकता फैलाएं।






