चैत्र नवरात्र से नवचक्र का आरंभ, वसंत ऋतु में विभिन्न नववर्षों का स्वागत

चैत्र नवरात्र से नवचक्र का आरंभ, वसंत ऋतु में विभिन्न नववर्षों का स्वागत

author Jitendra Giri
301 Views Download E-Paper (9)
#चैत्रनवरात्र : वसंत ऋतु में विक्रम संवत, शक संवत और पारसी नवरोज सहित कई नववर्षों की शुरुआत।

वसंत ऋतु को भारतीय परंपरा में नवजीवन और नवसृजन का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि के साथ ही कई पारंपरिक नववर्षों का आरंभ होने जा रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत 2083, कलियुग 5127 और शालिवाहन शक 1948 की शुरुआत होगी, जबकि इसी अवधि में पारसी समुदाय का नवरोज भी मनाया जाएगा।

Join WhatsApp
  • 19 मार्च 2026 से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आरंभ।
  • इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत, घरों व मंदिरों में कलश स्थापना
  • कलियुग का 5127वां वर्ष तथा शालिवाहन शक 1948 का भी प्रारंभ माना जाएगा।
  • भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में गुड़ी पड़वा, उगादी, नवरेह के रूप में नववर्ष का उत्सव।
  • 20 मार्च को सिंधी समाज का चेटीचंड, जबकि पारसी समुदाय का नवरोज भी इसी अवधि में।
  • 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ हिंदू सौर नववर्ष और विभिन्न राज्यों के पारंपरिक पर्व।

वसंत ऋतु को भारतीय संस्कृति में नवजीवन, नवसृजन और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है। इस समय प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन का संचार होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पावन काल में ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि के नवआरंभ का काल माना जाता है।

चैत्र नवरात्र से होगा नव संवत्सर का आरंभ

वर्ष 2026 में 19 मार्च गुरुवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आरंभ होगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू होगी, जिसकी शुरुआत कलश स्थापना (घटस्थापना) से होती है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से माता दुर्गा का आह्वान करते हैं।

पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह लगभग 6 बजकर 40 मिनट से प्रारंभ होगी। इसी दिन से कलियुग का 5127वां वर्ष तथा शालिवाहन शक 1948 की गणना भी प्रारंभ मानी जाएगी।

देशभर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है नववर्ष

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस दिन नववर्ष को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा कहा जाता है, जहाँ घरों के बाहर विजय और मंगल का प्रतीक ‘गुड़ी’ स्थापित की जाती है। वहीं कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व उगादी के रूप में मनाया जाता है।

इसके अलावा कश्मीर में कश्मीरी पंडित समुदाय इस दिन को नवरेह के रूप में मनाकर नए वर्ष का स्वागत करता है।

सिंधी नववर्ष और पारसी नवरोज भी इसी अवधि में

चैत्र नवरात्रि के दौरान ही 20 मार्च को सिंधी समाज का प्रमुख पर्व चेटीचंड मनाया जाएगा। यह पर्व सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

इसी अवधि में पारसी समुदाय का नववर्ष नवरोज भी मनाया जाता है, जो सामान्यतः 20 या 21 मार्च को पड़ता है। यह पर्व वसंत विषुव के अवसर पर मनाया जाता है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। इसे प्रकृति के पुनर्जन्म और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है।

14 अप्रैल को मेष संक्रांति से सौर नववर्ष

भारतीय ज्योतिष के अनुसार 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ मेष संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसे हिंदू सौर नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है।

देश के विभिन्न राज्यों में यह दिन अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
पंजाब में बैसाखी, असम में बोहाग बिहू, पश्चिम बंगाल में पोइला बैसाख, ओडिशा में पाना संक्रांति, केरल में विशु और तमिलनाडु में पुथांडु के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

इन सभी उत्सवों में प्रकृति के प्रति आभार, नई फसल की खुशी और जीवन में नए आरंभ का संदेश निहित होता है।

नवजीवन और नई ऊर्जा का प्रतीक है वसंत ऋतु

भारतीय परंपरा में वसंत ऋतु को जीवन के नवजागरण का समय माना जाता है। इस दौरान प्रकृति के साथ-साथ मनुष्य भी नए संकल्प, नई ऊर्जा और नई चेतना के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत करता है।

न्यूज़ देखो: विविधता में एकता की सांस्कृतिक झलक

भारत की सांस्कृतिक परंपरा की खासियत यह है कि अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में समय गणना की विभिन्न प्रणालियां होने के बावजूद सभी का मूल संदेश एक ही है—नवसृजन, समृद्धि और सकारात्मक शुरुआत। यही विविधता भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नववर्ष का संदेश: नए संकल्प और नई ऊर्जा

हर नववर्ष मनुष्य को यह प्रेरणा देता है कि वह बीते समय से सीख लेकर नए संकल्पों के साथ आगे बढ़े। प्रकृति की तरह जीवन में भी नई शुरुआत का साहस ही सफलता की राह खोलता है।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 5 / 5. कुल वोट: 1

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

खलारी, रांची

🔔

Notification Preferences

error: