
#रांची #चैत्र_नवरात्रि : नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा, इसी अवधि में चैती छठ और रामनवमी पर्व।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को रामनवमी के साथ संपन्न होगा। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसी अवधि में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ भी 22 से 25 मार्च तक मनाया जाएगा। धार्मिक पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि के पहले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जिन्हें पूजा के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है।
- 19 मार्च 2026 से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि, नौ दिनों तक चलेगा पर्व।
- 27 मार्च को रामनवमी के साथ होगा नवरात्रि का समापन।
- 26 मार्च को रखा जाएगा महाअष्टमी व्रत, विशेष पूजा-अर्चना।
- 22 से 25 मार्च तक मनाया जाएगा लोक आस्था का महापर्व चैती छठ।
- नवरात्रि के पहले दिन बन रहा शुक्ल योग, कलात्मक योग और छत्र योग का शुभ संयोग।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र सहित पूरे झारखंड में चैत्र नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। धार्मिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को रामनवमी के साथ संपन्न होगी। इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी और श्रद्धालु उपवास रखकर माता की आराधना करेंगे।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इसे नववर्ष और नए संवत्सर की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दौरान घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर मां दुर्गा की आराधना की जाती है।
नवरात्रि के पहले दिन बन रहा दुर्लभ शुभ संयोग
पंडितों और पंचांग के अनुसार इस वर्ष नवरात्रि के पहले दिन कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। ऋषिकेश पंचांग के मुताबिक 19 मार्च को शुक्ल योग, कलात्मक योग और छत्र योग का निर्माण हो रहा है।
धार्मिक मान्यता है कि इन योगों में की गई पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होती है। इन शुभ संयोगों में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी की जा रही है।
19 मार्च को होगी कलश स्थापना
उदयातिथि के अनुसार इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है। इस कारण गुरुवार 19 मार्च को अमावस्या तिथि में ही कलश स्थापना की जाएगी।
पंचांग के अनुसार 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 40 मिनट के बाद से नवरात्रि का प्रथम दिन माना जाएगा। इसी समय के बाद विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाएगी।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु उपवास रखकर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की पूजा करेंगे।
26 मार्च को महाअष्टमी और 27 को रामनवमी
नवरात्रि के दौरान कई महत्वपूर्ण तिथियां भी पड़ती हैं। पंचांग के अनुसार 25 मार्च को महानिशा पूजन किया जाएगा। इसके बाद 26 मार्च को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा, जिसे विशेष रूप से मां दुर्गा की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
वहीं 27 मार्च को महानवमी के अवसर पर कन्या पूजन, हवन और आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसी दिन भगवान राम के जन्मोत्सव रामनवमी का पर्व भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
इसके अगले दिन 28 मार्च को चैत्र शुक्ल दशमी के अवसर पर यमराज (धर्मराज) की पूजा का विशेष व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत स्वास्थ्य, दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए किया जाता है।
नवरात्रि के बीच मनाया जाएगा चैती छठ
नवरात्रि के दौरान ही लोक आस्था का महापर्व चैती छठ भी मनाया जाता है। यह चार दिवसीय पर्व 22 मार्च से 25 मार्च तक चलेगा।
पर्व की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ होगी। इसके बाद 23 मार्च को खरना का अनुष्ठान किया जाएगा। 24 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होगा।
चैती छठ को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। इस दौरान नदी, तालाब और घाटों पर पूजा-अर्चना के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है।
न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा का संगम
चैत्र नवरात्रि, रामनवमी और चैती छठ जैसे पर्व भारतीय संस्कृति और आस्था की गहरी परंपरा को दर्शाते हैं। इन पर्वों के माध्यम से समाज में भक्ति, अनुशासन और सामूहिक श्रद्धा का वातावरण बनता है। साथ ही यह पर्व हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर भी देते हैं। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि इन पर्वों के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के पर्वों में जिम्मेदारी भी जरूरी
धार्मिक पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का अवसर भी होते हैं। नवरात्रि और छठ जैसे पर्व हमें संयम, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देते हैं।
इन अवसरों पर हमें स्वच्छता, अनुशासन और सामूहिक सहयोग का भी ध्यान रखना चाहिए ताकि सभी लोग सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें।
यदि समाज और प्रशासन मिलकर जिम्मेदारी निभाएं तो हर पर्व और भी भव्य और सकारात्मक संदेश देने वाला बन सकता है।
आइए आस्था के इन पावन पर्वों को श्रद्धा, अनुशासन और सहयोग के साथ मनाएं। अपनी राय कमेंट में लिखें, खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और सकारात्मक संदेश फैलाने में भागीदार बनें।






