Ranchi

स्वतंत्रता दिवस परंपरा में बदलाव: मोरहाबादी में इस बार मुख्यमंत्री नहीं फहराएंगे तिरंगा, कार्यक्रमों में बदलाव

#रांची #स्वतंत्रतादिवस : परिस्थितियों ने बदली सालों पुरानी परंपरा — पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के सम्मान में कार्यक्रम रद्द
  • इस वर्ष मोरहाबादी मैदान में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे झंडोत्तोलन।
  • मुख्यमंत्री अपने पिता के श्राद्ध कर्म में व्यस्त रहने के कारण उपस्थित नहीं होंगे।
  • राज्य सरकार के प्रस्ताव को राजभवन ने दी स्वीकृति।
  • वर्षों पुरानी मुख्यमंत्री-राज्यपाल की झंडोत्तोलन परंपरा टूटी।
  • At Home कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के सम्मान में रद्द।

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में झारखंड की सालों पुरानी परंपरा बदलने जा रही है। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राजभवन ने स्वीकृति देते हुए घोषणा की कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार तिरंगा फहराएंगे। सामान्यतः यह जिम्मेदारी मुख्यमंत्री निभाते हैं, जबकि राज्यपाल दुमका में झंडोत्तोलन करते हैं।

वर्षों पुरानी परंपरा में बदलाव

अब तक का रिवाज यह रहा है कि मुख्यमंत्री राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में झंडोत्तोलन करते हैं और राज्यपाल दुमका में। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री अपने पिता के श्राद्ध कर्म में व्यस्त रहेंगे, जिसके कारण यह जिम्मेदारी सीधे राज्यपाल को सौंपी गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि विशेष परिस्थितियों में परंपराओं में भी लचीलापन अपनाया जा सकता है।

संवेदनशील निर्णय

राजभवन ने घोषणा की कि इस वर्ष होने वाला पारंपरिक At Home कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। यह कदम झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के सम्मान में उठाया गया है, जिनका हाल ही में निधन हुआ था। इससे राज्य की राजनीतिक विरासत और वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान की झलक मिलती है।

न्यूज़ देखो: परंपरा में बदलाव का ऐतिहासिक क्षण

झारखंड की स्वतंत्रता दिवस परंपरा में यह बदलाव ऐतिहासिक और परिस्थितिजन्य दोनों है। राज्यपाल द्वारा मोरहाबादी में तिरंगा फहराना और At Home कार्यक्रम का रद्द होना इस बात का प्रतीक है कि संवेदनशील परिस्थितियों में निर्णय लेने के लिए परंपराएं भी बदली जा सकती हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

परंपरा और सम्मान के संग मनाएं आज़ादी का पर्व

इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए, हम सभी परंपरा के महत्व और बदलाव की गरिमा को समझते हुए तिरंगे के सम्मान में शामिल हों। इस खबर को साझा करें और लोगों को बताएं कि आज़ादी के पर्व पर एकता और सम्मान ही सबसे बड़ी ताकत है।

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