बघरेड़ा फल खाने से छतरपुर गांव में हड़कंप, महिला समेत नौ बच्चे बीमार

बघरेड़ा फल खाने से छतरपुर गांव में हड़कंप, महिला समेत नौ बच्चे बीमार

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #स्वास्थ्य_अलर्ट : सरस्वती पूजा के दौरान स्कूल के पास मिला फल बना बीमारी की वजह — सभी सदर अस्पताल में भर्ती
  • गढ़वा थाना क्षेत्र के छतरपुर गांव में बघरेड़ा फल खाने से एक महिला और नौ बच्चे बीमार
  • घटना शुक्रवार शाम करीब छह बजे की, सरस्वती पूजा के दौरान हुई
  • बच्चों ने बादाम समझकर विद्यालय परिसर के पास पड़ा बघरेड़ा खाया
  • गांव की 50 वर्षीय महिला मलूकन देवी ने भी बच्चों से मांगकर फल खाया
  • सभी मरीजों का सदर अस्पताल गढ़वा में इलाज जारी, स्थिति स्थिर
  • घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल

सरस्वती पूजा की खुशी बदली चिंता में

गढ़वा थाना क्षेत्र अंतर्गत छतरपुर गांव में सरस्वती पूजा के दिन एक गंभीर स्वास्थ्य घटना सामने आई, जब बघरेड़ा का फल खाने से एक महिला एवं नौ बच्चे अचानक बीमार हो गए। यह घटना शुक्रवार की शाम करीब छह बजे की बताई जा रही है। पूजा के उल्लास और बच्चों की खुशी के बीच अचानक तबीयत बिगड़ने की खबर से गांव में हड़कंप मच गया।

विद्यालय परिसर के पास पड़ा फल बना खतरा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छतरपुर गांव के बच्चे सरस्वती पूजा के अवसर पर गांव के प्राथमिक विद्यालय गए हुए थे। विद्यालय परिसर के समीप जमीन पर बघरेड़ा का फल गिरा हुआ था, जिसे बच्चों ने बादाम समझकर खा लिया। बच्चों को इस फल के जहरीले या हानिकारक होने की जानकारी नहीं थी। कुछ बच्चों ने आपस में फल बांटकर खाया और इसके बाद सभी अपने-अपने घर लौट गए।

घर पहुंचते ही बिगड़ी तबीयत

फल खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कई बच्चों को उल्टी, बेचैनी और कमजोरी महसूस होने लगी। जब बच्चों की हालत और खराब होने लगी तो परिजन घबरा गए और उनसे पूछताछ की। पूछने पर बच्चों ने बताया कि उन्होंने स्कूल के पास से मिले फल को खाया था। इसके बाद परिजनों को बघरेड़ा फल खाने की बात समझ में आई।

बच्चों से मांगकर महिला ने भी खाया फल

इसी दौरान गांव की ही 50 वर्षीय मलूकन देवी, पति बसंत बिंद, भी इस घटना की चपेट में आ गईं। बताया गया कि जब बच्चे विद्यालय के पास बघरेड़ा खा रहे थे, तब मलूकन देवी ने उनसे पूछा कि वे क्या खा रहे हैं। बच्चों ने जवाब दिया कि वे बादाम खा रहे हैं। इस पर मलूकन देवी ने भी बच्चों से मांगकर बघरेड़ा खा लिया। कुछ देर बाद उनकी तबीयत भी बिगड़ने लगी और उन्हें भी उल्टी व कमजोरी की शिकायत होने लगी।

बीमार बच्चों की पहचान

इस घटना में बीमार पड़े बच्चों में छतरपुर गांव निवासी सात वर्षीय रूबी कुमारी (पिता राजू कुमार चौधरी), सात वर्षीय अंश कुमार (पिता मंटू कुमार बिंद), आठ वर्षीय गौरव कुमार (पिता ज्ञानचंद बिंद), पांच वर्षीय अंशिका कुमारी (पिता शिवराम बिंद), सात वर्षीय मनीष कुमार (पिता मनोज चौधरी), आठ वर्षीय सुजीत कुमार, 12 वर्षीय आदित्य कुमार (पिता राजेंद्र चौधरी) शामिल हैं। इसके अलावा पलामू जिले के रेहला थाना क्षेत्र अंतर्गत घघुआ गांव की सात वर्षीय सीमा कुमारी (पिता जितेंद्र चौधरी) भी बीमार हुई हैं।

सदर अस्पताल में चल रहा इलाज

परिजनों द्वारा सभी बीमार बच्चों और महिला को तत्काल सदर अस्पताल गढ़वा लाया गया, जहां सभी को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। चिकित्सकों के अनुसार सभी मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और घबराने जैसी स्थिति नहीं है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की निगरानी कर रही है और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं।

गांव और अस्पताल में अफरा-तफरी

घटना के बाद छतरपुर गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में सदर अस्पताल पहुंचे और बीमार बच्चों की हालत की जानकारी ली। अस्पताल परिसर में भी परिजनों की भीड़ देखी गई। लोग इस बात को लेकर चिंतित नजर आए कि एक साधारण दिखने वाला फल इस तरह बच्चों के लिए खतरा बन सकता है।

प्रशासन और अभिभावकों के लिए चेतावनी

यह घटना अभिभावकों और प्रशासन दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बच्चे अनजान फल या बीज को खाने की गलती कर बैठते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को ऐसे फलों के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।

न्यूज़ देखो: जागरूकता की कमी से बढ़ता खतरा

छतरपुर गांव की यह घटना बताती है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता की अभी भी भारी कमी है। न्यूज़ देखो ऐसे मामलों को उजागर कर समाज और प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल और गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सतर्कता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी

बच्चों की जिज्ञासा स्वाभाविक है, लेकिन उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। अभिभावक बच्चों को अनजान फल या चीजें खाने से रोकें और स्कूल प्रबंधन भी परिसर के आसपास साफ-सफाई और निगरानी सुनिश्चित करें। इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें, इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और अपने गांव व परिवार के लोगों को सतर्क करें।
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गढ़वा

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