गिरिडीह में मुख्य सचिव अलका तिवारी और पूर्व मुख्य सचिव डीके तिवारी ने पारसनाथ पर्वत का किया दौरा

गिरिडीह में मुख्य सचिव अलका तिवारी और पूर्व मुख्य सचिव डीके तिवारी ने पारसनाथ पर्वत का किया दौरा

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #पारसनाथ_दौरा : जैन तीर्थ स्थल पारसनाथ में हुआ पारंपरिक स्वागत — खंडोली डैम और वॉटरफॉल का भी करेंगे निरीक्षण
  • झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी और पूर्व मुख्य सचिव डॉ. डीके तिवारी पहुंचे गिरिडीह
  • जैन समाज ने भोमिया जी मंदिर में किया पारंपरिक स्वागत
  • पारसनाथ पर्वत की यात्रा में डीसी रामनिवास यादव और एसपी बिमल कुमार भी रहे मौजूद
  • दौरे के क्रम में खंडोली डैम और वॉटरफॉल का भी करेंगे अवलोकन
  • प्रशासनिक दृष्टिकोण से पर्यटन स्थलों की समीक्षा और सुधार की संभावना

पारसनाथ पर्वत पर जताया श्रद्धा और लिया क्षेत्रीय विकास का जायजा

झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी और पूर्व मुख्य सचिव डॉ. डीके तिवारी रविवार को गिरिडीह पहुंचे।
यह दौरा विशेष रूप से धार्मिक और प्रशासनिक महत्व रखता है। उन्होंने जैन धर्म के पवित्र स्थल पारसनाथ पर्वत का दौरा किया, जहां भोमिया जी मंदिर में जैन समाज ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया।
पारसनाथ पर्वत, जिसे श्री सम्मेद शिखर भी कहा जाता है, जैन तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।

प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही अहम

इस दौरे में गिरिडीह उपायुक्त रामनिवास यादव और पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।
प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति से स्पष्ट है कि यह दौरा न केवल धार्मिक, बल्कि प्रशासनिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अहम रहा।

डीसी रामनिवास यादव ने कहा: “गिरिडीह जिला पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाएं रखता है। पारसनाथ जैसे स्थलों को संरक्षित और विकसित करना हमारी प्राथमिकता है।”

खंडोली डैम और वॉटरफॉल का भी लेंगे जायजा

दौरे के अगले चरण में खंडोली डैम और स्थानीय वॉटरफॉल का निरीक्षण किया जाएगा।
खंडोली एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जिसे और बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।
मुख्य सचिव का यह दौरा स्थानीय प्रशासन को जरूरी दिशा निर्देश देने और योजनाओं की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

न्यूज़ देखो: पर्यटन और प्रशासन के समन्वय की मिसाल

झारखंड में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पर्यटन स्थलों का मुआयना करना विकास के प्रति प्रतिबद्धता का परिचायक है।
पारसनाथ जैसे तीर्थ और खंडोली जैसे प्राकृतिक स्थलों की सुरक्षा और समृद्धि सरकार की प्राथमिकता बन रही है।
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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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