
#रायडीह #गुमला #धार्मिक_स्थल : संत इग्नासियुस कैथोलिक चर्च में प्रभु यीशु की प्रतिमा तोड़े जाने से क्षेत्र में आक्रोश का माहौल।
गुमला जिले के रायडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत मांझाटोली स्थित संत इग्नासियुस कैथोलिक चर्च में मंगलवार देर रात एक विक्षिप्त व्यक्ति द्वारा प्रभु यीशु मसीह की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलने पर चर्च प्रबंधन ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की पहचान कर पूछताछ की, जिसमें उसने कृत्य स्वीकार किया। घटना से स्थानीय ईसाई समुदाय में रोष और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्याप्त है।
- मांझाटोली, रायडीह स्थित संत इग्नासियुस कैथोलिक चर्च में घटना।
- प्रभु यीशु मसीह की प्रतिमा ईंट से मारकर क्षतिग्रस्त।
- पल्ली पुरोहित फादर सामुवेल कुजूर ने दी पुलिस को सूचना।
- आरोपी की पहचान दिनेश तिर्की के रूप में, मानसिक रूप से विक्षिप्त।
- पुलिस ने रिनपास भेजने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में स्थित मांझाटोली गांव का संत इग्नासियुस कैथोलिक चर्च बुधवार सुबह उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब चर्च परिसर में प्रभु यीशु मसीह की प्रतिमा क्षतिग्रस्त अवस्था में पाई गई। यह घटना मंगलवार की देर रात की बताई जा रही है, जिसने स्थानीय ईसाई समुदाय को आहत और चिंतित कर दिया है।
प्रतिदिन की तरह बुधवार तड़के पल्ली पुरोहित फादर सामुवेल कुजूर चर्च में घंटा बजाने और प्रार्थना की तैयारी के लिए उठे। जैसे ही उन्होंने चर्च का मुख्य द्वार खोला, उनकी नजर परिसर में बिखरे ईंट-पत्थरों पर पड़ी। इस असामान्य दृश्य को देखकर उन्हें किसी अनहोनी की आशंका हुई।
सुबह सामने आई घटना, परिसर में फैली अव्यवस्था
फादर सामुवेल कुजूर ने जब परिसर में चारों ओर नजर दौड़ाई, तो उन्होंने देखा कि चर्च में स्थापित प्रभु यीशु मसीह की प्रतिमा को ईंट से मारकर तोड़ा गया है। प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही चर्च से जुड़े लोग मौके पर जुटने लगे। देखते ही देखते यह खबर आसपास के गांवों में फैल गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए फादर सामुवेल कुजूर ने तत्काल रायडीह थाना प्रभारी को इसकी सूचना दी और लिखित रूप से सनहा दर्ज कराया। चर्च परिसर में धार्मिक आस्था से जुड़ी प्रतिमा को नुकसान पहुंचने से ईसाई समाज में रोष का माहौल देखा गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, विक्षिप्त से पूछताछ
सूचना मिलते ही रायडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। आसपास के लोगों से पूछताछ और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने प्रतिमा को पत्थर मारकर क्षतिग्रस्त करने की बात स्वीकार कर ली।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान दिनेश तिर्की, पिता देवतु तिर्की, निवासी ग्राम मांझाटोली, थाना रायडीह के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे भ्रम था कि प्रतिमा उसके नाम की है, इसी कारण उसने यह हरकत की। प्रारंभिक जांच में आरोपी के मानसिक रूप से विक्षिप्त होने की पुष्टि हुई है।
मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए रिनपास भेजने की तैयारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उसके साथ मानवीय संवेदना के तहत व्यवहार किया जा रहा है। पुलिस ने उसे रिनपास (मानसिक स्वास्थ्य संस्थान) भेजने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है, ताकि उसका समुचित इलाज कराया जा सके।
पुलिस का कहना है कि घटना में किसी प्रकार की सांप्रदायिक मंशा नहीं पाई गई है, फिर भी धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई जाएगी और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ईसाई समुदाय में रोष, सुरक्षा की मांग
घटना के बाद स्थानीय ईसाई समुदाय के लोगों ने दुख और नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि चर्च केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि समुदाय की आस्था और पहचान का केंद्र है। प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया जाना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है, भले ही यह कृत्य किसी विक्षिप्त द्वारा किया गया हो।
समुदाय के लोगों ने प्रशासन से चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासन की अपील, शांति बनाए रखने का आग्रह
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव फैलाने वाली गतिविधि पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

न्यूज़ देखो: धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर फिर सवाल
रायडीह की यह घटना दिखाती है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी विषय है। मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की हरकत ने समुदाय को आहत किया है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण और त्वरित पुलिस कार्रवाई संतुलन का उदाहरण भी है। ऐसे मामलों में सुरक्षा और स्वास्थ्य, दोनों पहलुओं पर समान ध्यान जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था की रक्षा, शांति की जिम्मेदारी
धार्मिक स्थल समाज की सामूहिक आस्था के प्रतीक होते हैं।
इनकी सुरक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
घटनाओं पर संयम और समझदारी से प्रतिक्रिया ही समाज को मजबूत बनाती है।
अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और शांति व सौहार्द का संदेश फैलाएं।





