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जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पर दुमका में सिविल सोसायटी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

#दुमका #कर्पूरीठाकुरजयंती : संयुक्त आयोजन में सादा जीवन, उच्च विचार और जनसेवा की राजनीति को किया गया स्मरण।

दुमका में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पर सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सोसायटी, पटेल सेवा संघ और शहीद सरदार भागवत राउत विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के सादा जीवन, ईमानदार राजनीति और वंचित वर्गों के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके विचारों और मूल्यों से प्रेरित करना रहा।

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  • 24 जनवरी 2026 को दुमका में मनाई गई कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती
  • सिविल सोसायटी, पटेल सेवा संघ और विचार मंच का संयुक्त आयोजन।
  • कार्यक्रम का नेतृत्व विविध सचिव संदीप कुमार जय बमबम ने किया।
  • वक्ताओं ने सादा जीवन और जनसेवा की राजनीति पर डाला प्रकाश।
  • कई सामाजिक और बौद्धिक हस्तियां रहीं उपस्थित।
  • आज के दौर में जननायक जैसे नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर।

भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पर दुमका में सामाजिक चेतना और विचार विमर्श से जुड़ा एक प्रेरक आयोजन देखने को मिला। इस अवसर पर सिविल सोसायटी, पटेल सेवा संघ और शहीद सरदार भागवत राउत विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व, संघर्ष और सिद्धांतों को वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में प्रासंगिक बताया।

सादा जीवन और उच्च विचारों की मिसाल

वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर भारतीय राजनीति में सादगी और ईमानदारी की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में व्यक्तिगत लाभ को कभी प्राथमिकता नहीं दी। मुख्यमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर रहने के बावजूद उनके पास न तो निजी मकान था और न ही निजी वाहन। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सत्ता सेवा का माध्यम हो सकती है, अगर नीयत साफ हो।

गरीबों और वंचितों की आवाज

कार्यक्रम में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि कर्पूरी ठाकुर गरीबों, पिछड़ों और वंचित वर्गों की आवाज थे। उन्होंने सामाजिक न्याय को केवल नारा नहीं, बल्कि नीति और व्यवहार का हिस्सा बनाया। वक्ताओं ने कहा कि उनके निर्णयों ने समाज के उस वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा, जिसे लंबे समय तक हाशिये पर रखा गया था।

राजनीति को बनाया सेवा का माध्यम

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने राजनीति को सेवा का माध्यम माना, न कि व्यापार का जरिया। आज के दौर में जब राजनीति को लेकर जनता में निराशा बढ़ रही है, ऐसे में कर्पूरी ठाकुर का जीवन और विचार मार्गदर्शन का काम कर सकते हैं। वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान समय में ऐसे निस्वार्थ नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है।

कार्यक्रम का नेतृत्व और आयोजन

इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व विविध सचिव संदीप कुमार जय बमबम के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक नेता नहीं, बल्कि विचारधारा थे, जिनसे आज भी समाज बहुत कुछ सीख सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।

गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में अजय झा, राधेश्याम वर्मा, अशोक कुमार राउत, राजेश कुमार राउत सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पुष्प अर्पित कर कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

आज के दौर में कर्पूरी ठाकुर की प्रासंगिकता

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज देश को फिर से ऐसे ही जननायक की आवश्यकता है, जो सत्ता से नहीं, सेवा से पहचाना जाए। सामाजिक समानता, ईमानदारी और सादगी जैसे मूल्य आज भी उतने ही जरूरी हैं, जितने कर्पूरी ठाकुर के समय में थे।

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नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कार्यक्रम का एक अहम उद्देश्य नई पीढ़ी को जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन से परिचित कराना रहा। वक्ताओं ने कहा कि यदि युवा वर्ग उनके आदर्शों को समझे और अपनाए, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

न्यूज़ देखो: मूल्यों की राजनीति की याद

यह आयोजन बताता है कि जननायक कर्पूरी ठाकुर आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। उनके विचार वर्तमान राजनीति के लिए आईना हैं, जहां सादगी और ईमानदारी की सबसे अधिक जरूरत है। ऐसे कार्यक्रम समाज को आत्ममंथन का अवसर देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विचारों से बनता है भविष्य

महापुरुषों की जयंती केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर होती है। कर्पूरी ठाकुर का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची राजनीति सेवा और समर्पण से जन्म लेती है।
आप भी उनके विचारों को जानें, साझा करें और अपने आसपास सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करें। इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे आगे बढ़ाएं और जनसेवा के मूल्यों को मजबूत करने में सहभागी बनें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर
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