
#डुमरी #राज्यकीय_मेला : जनहित में 23 जनवरी की शुक्रवार बाजार 21 जनवरी को लगाने का निर्णय।
डुमरी प्रखंड में 23 जनवरी को ककड़ोलता में आयोजित होने वाले राज्यकीय मेला और उसी दिन पड़ने वाले साप्ताहिक शुक्रवार बाजार को लेकर उत्पन्न भ्रम को दूर करने के लिए सरना समाज के अगुवा गणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य प्रखंडवासियों को किसी असुविधा से बचाना और बाजार व मेला दोनों में सहभागिता का मार्ग प्रशस्त करना था। विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से बाजार की तिथि में बदलाव का निर्णय लिया गया, जिससे आमजन को राहत मिलने की उम्मीद है।
- 23 जनवरी को ककड़ोलता में लगेगा राज्यकीय मेला।
- उसी दिन पड़ने वाले साप्ताहिक शुक्रवार बाजार को लेकर भ्रम की स्थिति।
- सरना समाज के अगुवाओं ने बैठक कर निकाला समाधान।
- 21 जनवरी को ही साप्ताहिक बाजार लगाने का सर्वसम्मत निर्णय।
- निर्णय को जनहित और सामाजिक समरसता के लिए बताया गया।
डुमरी। प्रखंड क्षेत्र में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 23 जनवरी को आदिवासी धार्मिक स्थल ककड़ोलता में राज्यकीय मेला आयोजित होना है। लेकिन इस बार मेले की तिथि साप्ताहिक शुक्रवार बाजार के साथ पड़ने के कारण ग्रामीणों के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसी को लेकर सरना समाज के अगुवा गणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समस्या पर गंभीरता से चर्चा की गई।
साप्ताहिक बाजार का ग्रामीण जीवन में महत्व
बैठक में उपस्थित सामाजिक अगुवाओं ने कहा कि शुक्रवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार प्रखंडवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसी दिन अपनी साप्ताहिक खरीद-बिक्री, कृषि उत्पादों की बिक्री और घरेलू जरूरतों की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में बाजार पहुंचते हैं। यदि बाजार और मेला एक ही दिन पड़ता, तो लोगों को किसी एक को चुनना पड़ता, जिससे आमजन को परेशानी हो सकती थी।
सर्वसम्मति से निकला समाधान
इस समस्या को देखते हुए सरना समाज के सभी अगुवा गणों ने आपसी सहमति से समाधान निकालने का निर्णय लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 23 जनवरी को लगने वाला साप्ताहिक शुक्रवार बाजार अब दो दिन पूर्व, यानी 21 जनवरी को ही आयोजित किया जाएगा।
इस निर्णय से प्रखंडवासियों को साप्ताहिक बाजार से जुड़ी सभी जरूरतें पूरी करने का अवसर मिलेगा और वे बिना किसी चिंता के राज्यकीय मेला में शामिल हो सकेंगे।
सामाजिक समरसता बनाए रखने पर जोर
अगुवा गणों ने कहा कि यह फैसला जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि किसी को भी निराशा या पछतावे की स्थिति का सामना न करना पड़े।
सभी ने माना कि इस निर्णय से प्रखंड क्षेत्र में सामाजिक समरसता बनी रहेगी और बाजार व मेला दोनों का उद्देश्य सफल होगा।
बैठक में प्रशासन और ग्रामीणों से सहयोग की भी अपील की गई, ताकि निर्णय को सुचारु रूप से लागू किया जा सके।
ग्रामीणों ने किया निर्णय का समर्थन
ग्रामीणों ने भी प्रखंडवासियों की सुविधा को प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय का खुलकर समर्थन किया। लोगों का कहना है कि इससे वे साप्ताहिक बाजार और राज्यकीय मेला—दोनों का लाभ बिना किसी असुविधा के उठा सकेंगे।
बैठक में उपस्थित प्रमुख लोग
बैठक में अकलू भगत, जगरनाथ भगत, बीरेंद्र भगत, रविशंकर भगत, मनोज उरांव, जगजीवन भगत, विजय भगत, सुरेश भगत, वासुदेव भगत, लीलावती देवी, सरिता उरांव, सेने कुमारी, तूसनी उरांव, मुखनी उरांव, सीता उरांव, ललिता उरांव, किरण उरांव, जगतरानी उरांव सहित सरना समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
न्यूज़ देखो: जनहित में लिया गया संतुलित निर्णय
यह बैठक दिखाती है कि जब समाज के अगुवा आपसी संवाद और समझदारी से निर्णय लेते हैं, तो बड़ी समस्याओं का समाधान सहज रूप से निकल आता है। बाजार की तिथि में बदलाव का फैसला प्रखंडवासियों की जरूरतों और धार्मिक आस्था—दोनों के बीच संतुलन बनाता है। ऐसे फैसले सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक सहयोग की मजबूत मिसाल पेश करते हैं।
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जब संवाद से निकलता है समाधान
सामूहिक सोच और आपसी सहमति से लिया गया निर्णय ही समाज को आगे बढ़ाता है।
ककड़ोलता का राज्यकीय मेला और साप्ताहिक बाजार—दोनों हमारी परंपरा और जरूरतों से जुड़े हैं।
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