
#लातेहार #मनरेगा_विरोध : गांधी के नाम से छेड़छाड़ के खिलाफ कांग्रेस और मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन।
लातेहार जिला कांग्रेस कमिटी के तत्वावधान में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदले जाने के विरोध में एकदिवसीय उपवास धरना–प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम विवेकानंद पार्क स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और मनरेगा मजदूर इसमें शामिल हुए। नेताओं ने इसे गरीबों के अधिकार और गांधी के विचारों पर हमला बताया।
- लातेहार जिला कांग्रेस कमिटी के नेतृत्व में एकदिवसीय उपवास धरना आयोजित।
- विवेकानंद पार्क में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन।
- मनरेगा का नाम बदले जाने के फैसले का कड़ा विरोध।
- जिलाध्यक्ष कामेश्वर प्रसाद यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं का संबोधन।
- आंदोलन को प्रखंड और पंचायत स्तर तक ले जाने की घोषणा।
लातेहार जिले में मनरेगा का नाम बदले जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया। जिला कांग्रेस कमिटी के आह्वान पर विवेकानंद पार्क स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष एकदिवसीय उपवास धरना–प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल देखने को मिली।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस अध्यक्ष कामेश्वर प्रसाद यादव ने की। धरना स्थल पर कांग्रेस के झंडे, तख्तियां और नारेबाजी के बीच केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ गहरा आक्रोश देखने को मिला। वक्ताओं ने इसे केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि गरीबों और मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।
जिलाध्यक्ष का आरोप: गरीबों का हक छीनने की साजिश
धरना को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष कामेश्वर प्रसाद यादव ने कहा:
“भाजपा सरकार का उद्देश्य गरीब और मजदूर वर्ग के हक–अधिकार को छीनना है। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए सम्मानजनक रोजगार की गारंटी है। गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना के साथ छेड़छाड़ करना उनके विचारों और बलिदान का अपमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा।
युवाओं ने संभाली आंदोलन की कमान
युवा जिला अध्यक्ष अमित यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि धीरे–धीरे मनरेगा को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इसे किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी और सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।
अमित यादव ने कहा कि मनरेगा से जुड़े मजदूरों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कांग्रेस युवाओं और मजदूरों के साथ मिलकर इस साजिश का पर्दाफाश करेगी।
गांधी के नाम और विचारों पर हमला
जिला उपाध्यक्ष सह विधायक प्रतिनिधि हरिशंकर यादव ने कहा कि महात्मा गांधी के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी दुनिया के कई देशों में गांधी जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं और उनके विचारों को सम्मान दिया जाता है।
हरिशंकर यादव ने कहा कि भाजपा सरकार की यह मानसिकता दर्शाती है कि वह देश को किस दिशा में ले जाना चाहती है, जहां इतिहास और विचारधारा को मिटाने का प्रयास हो रहा है।
महिला नेतृत्व ने उठाई मजदूरों की आवाज
महिला जिला अध्यक्ष अनिता देवी ने भाजपा सरकार को गरीब, मजदूर और महिला विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार चंद पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और आम जनता की समस्याओं से उसका कोई सरोकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है और इस योजना को कमजोर करना सीधे तौर पर महिलाओं के रोजगार पर चोट है।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
सेवा दल अध्यक्ष बृंद बिहारी यादव ने कहा कि जब तक मनरेगा का बदला गया नाम वापस नहीं लिया जाता, तब तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रदेश प्रतिनिधि रविंद्र राम ने घोषणा की कि जिला स्तर के उपवास कार्यक्रम के बाद अगले दिन से प्रत्येक प्रखंड और पंचायत में आंदोलन चलाया जाएगा, जिसमें मनरेगा मजदूरों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
बड़ी संख्या में नेताओं की मौजूदगी
इस विरोध कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष मोती उर रहमान, विश्वनाथ पासवान, सुरेंद्र भारती, गुंजर उरांव, प्रिंस गुप्ता, दरोगी यादव, आमिर हयात, मोती उरांव, अख्तर अंसारी, सुनील प्रसाद, साजिद अंसारी, फूलचंद यादव, रंजीत साहू, इमरान अंसारी, सकलदीप उरांव, चंदन गुप्ता, हसमद अंसारी, मनोज पासवान, मंजू देवी सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और मजदूर उपस्थित रहे।
मजदूरों में दिखा आक्रोश
धरना स्थल पर मौजूद मनरेगा मजदूरों ने कहा कि यह योजना उनके लिए जीवनरेखा है। मजदूरों का कहना था कि नाम बदलने से उनकी पहचान और अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के आंदोलन को अपना समर्थन देने की बात कही।
न्यूज़ देखो: मनरेगा पर राजनीति या अधिकारों की लड़ाई
लातेहार में हुआ यह प्रदर्शन दिखाता है कि मनरेगा का मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष बन चुका है। सवाल यह है कि केंद्र सरकार मजदूरों और विपक्ष की आवाज को कितनी गंभीरता से सुनेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
मनरेगा से जुड़े फैसले करोड़ों ग्रामीण परिवारों को प्रभावित करते हैं। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और चर्चा में हिस्सा लें कि क्या ऐसे निर्णय जनता से संवाद के बिना होने चाहिए। आपकी आवाज ही बदलाव की ताकत है।





