#मेदिनीनगर #हत्या_कांड : भगवती अस्पताल के पीछे मिली महिला की लाश मामले में बड़ा खुलासा।
पलामू जिले के मेदिनीनगर में भगवती अस्पताल के पीछे मिली अज्ञात महिला की लाश के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में पति-पत्नी की संलिप्तता सामने आई, जिसमें पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि पति फरार है। यह मामला अवैध गतिविधियों और हत्या की साजिश से जुड़ा बताया जा रहा है।
- 25 अप्रैल 2026 को भगवती अस्पताल के पीछे मिला अज्ञात महिला का शव।
- शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिलने से सनसनी फैली।
- SIT जांच में चंदा देवी गिरफ्तार, पति उपेन्द्र गौतम फरार।
- हत्या के बाद शव को कमरे में छुपाकर बाद में ठिकाने लगाने की साजिश।
- आरोपी दंपत्ति पर महिला तस्करी व अनैतिक कार्य में लिप्त होने का आरोप।
मेदिनीनगर में अज्ञात महिला का शव मिलने के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। 25 अप्रैल 2026 को भगवती अस्पताल के पीछे एक महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की गई। इस संबंध में शहर थाना कांड संख्या 142/26 के तहत मामला दर्ज किया गया।
SIT गठन और जांच की शुरुआत
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, पलामू के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजीव रंजन के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर एफएसएल टीम को भी जांच में शामिल किया गया।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर दो संदिग्धों की पहचान हुई—
चंदा देवी (30 वर्ष) और उसका पति उपेन्द्र कुमार गौतम उर्फ रोहित कुमार (35 वर्ष)।
दोनों मूल रूप से ग्राम बालेखांड, थाना डंडई, जिला गढ़वा के निवासी हैं और वर्तमान में रेडमा क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहे थे।
आरोपी महिला ने कबूला जुर्म
पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई चंदा देवी ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
चंदा देवी ने बताया: “हम दोनों पति-पत्नी महिलाओं के व्यापार और अनैतिक कार्य में शामिल थे। 22 अप्रैल को मृतका से मोबाइल और पैसे को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी।”
उसने आगे बताया कि हत्या के बाद शव को कमरे में छुपाकर ताला लगा दिया गया और दोनों फरार हो गए। फिर 24 अप्रैल की रात को वापस आकर शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई।
शव की पहचान अब भी नहीं
पुलिस ने मृतका की पहचान के लिए सीआईजी प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल महिला की पहचान नहीं हो सकी है, जिससे जांच में और गहराई से पड़ताल की जा रही है।
फरार आरोपी का आपराधिक इतिहास
मुख्य आरोपी उपेन्द्र कुमार गौतम का आपराधिक रिकॉर्ड काफी गंभीर रहा है। उस पर कई मामलों में केस दर्ज हैं—
- आर्म्स एक्ट (2015) – अवैध हथियार रखने का मामला।
- अपहरण केस (2021) – रामगढ़ थाना में दर्ज।
- बाल तस्करी और पोक्सो एक्ट (2025) – गंभीर आरोपों के साथ चार्जशीट दाखिल।
- लूट का प्रयास (2011) – रंका थाना में मामला दर्ज।
यह आपराधिक इतिहास इस बात की ओर इशारा करता है कि आरोपी लंबे समय से संगठित अपराध में लिप्त रहा है।
छापेमारी टीम की भूमिका
इस पूरे मामले के खुलासे में पुलिस टीम की अहम भूमिका रही। छापेमारी दल में शामिल थे—
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजीव रंजन, थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार, संगीता कुमारी झा, चंद्रशेखर यादव, सुबोध कुमार, स्वाती गुप्ता सहित सशस्त्र बल।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है, ताकि इस तरह के अवैध गतिविधियों में शामिल अन्य लोगों की पहचान हो सके।
न्यूज़ देखो: अपराध का जाल और सुरक्षा की चुनौती
यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि संगठित अपराध और महिला तस्करी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। सवाल यह है कि ऐसे अपराधी इतने लंबे समय तक सक्रिय कैसे रहे? क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी में कमी रही? पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अब पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपराध के खिलाफ आवाज उठाना ही असली जिम्मेदारी
समाज में बढ़ते अपराध केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की सतर्कता भी जरूरी है।
अगर आपके आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें। आपकी एक सूचना किसी बड़ी घटना को रोक सकती है।
सुरक्षित समाज के लिए जागरूक बनें, दूसरों को भी जागरूक करें और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

