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कोलेबिरा में बालू की किल्लत से ठप पड़े निर्माण कार्य: जनप्रतिनिधियों ने थाना प्रभारी को सौंपा संयुक्त आवेदन

#कोलेबिरा #बालूसमस्या : आवास योजना और सरकारी काम प्रभावित, समाधान की मांग तेज
  • बालू की कमी से सरकारी और निजी निर्माण कार्य प्रभावित।
  • लगातार छापामारी से ट्रैक्टर मालिकों में डर और आपूर्ति बाधित।
  • अधूरे पड़े प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों पर संकट।
  • जनप्रतिनिधियों का संयुक्त आवेदन थाना प्रभारी को सौंपा गया।
  • थाना प्रभारी का आश्वासन – कानूनसम्मत समाधान के लिए पहल होगी।

सिमडेगा (कोलेबिरा)। बालू की समस्या ने कोलेबिरा प्रखंड में विकास की गति पर ब्रेक लगा दिया है। जिला प्रशासन के निर्देश पर अवैध बालू ढुलाई के खिलाफ लगातार छापामारी हो रही है, लेकिन इसका सीधा असर आवास योजना समेत तमाम सरकारी और निजी निर्माण कार्यों पर पड़ा है। नतीजतन आम लोग और जनप्रतिनिधि दोनों ही कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

जनता और ट्रैक्टर मालिकों की मुश्किलें

जानकारी के अनुसार, बालू की ढुलाई पर कड़ी निगरानी से ट्रैक्टर मालिकों में भय का माहौल है। इस कारण वे आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए भी बालू उपलब्ध कराने से कतरा रहे हैं। नतीजा यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे गरीबों के मकान अधूरे पड़े हैं, जबकि अन्य विकास कार्य भी बाधित हो रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों का कदम

जनता की परेशानी देखकर कोलेबिरा प्रखंड के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, बुद्धिजीवी, व्यापारी और गणमान्य लोग मंगलवार को थाना प्रभारी हर्ष कुमार शाह से मिले। उन्होंने संयुक्त हस्ताक्षर युक्त आवेदन सौंपकर आग्रह किया कि प्रशासन आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में पहल करे।

थाना प्रभारी का आश्वासन

थाना प्रभारी हर्ष कुमार शाह ने जनप्रतिनिधियों की भावनाओं को समझते हुए कहा कि उनकी ओर से जो भी संभव पहल होगी, वह कानूनसम्मत और उच्च अधिकारियों के परामर्श से की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनहित के जरूरी कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

जनप्रतिनिधियों ने यह भी अनुरोध किया कि क्षेत्र में प्रशासन द्वारा किए जाने वाले किसी भी अभियान या कार्यक्रम की सूचना उन्हें भी दी जाए, ताकि वे जनता को पहले से जागरूक कर सकें और अनावश्यक भ्रम से बचा जा सके।

न्यूज़ देखो: बालू संकट से विकास कार्यों पर संकट, प्रशासन और जनता में तालमेल की जरूरत

यह स्थिति बताती है कि अवैध खनन पर रोक जरूरी है, लेकिन आम लोगों की बुनियादी ज़रूरतें भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर ऐसा संतुलन बनाना होगा जिससे कानून भी लागू रहे और विकास कार्य भी जारी रहें

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब जनता और प्रशासन दोनों उठाएँ जिम्मेदारी

जनप्रतिनिधियों ने आवाज़ बुलंद की है, अब ज़रूरत है कि जनता भी नियमों का पालन करते हुए प्रशासन को सहयोग दे। मिलकर ही इस समस्या का समाधान संभव है। अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें ताकि ज़रूरी कदम उठाए जा सकें।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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