News dekho specials
Palamau

एनपीयू कुलपति के एक वर्ष पूरे होने पर विवाद, एनएसयूआई नेता अमरनाथ तिवारी ने उठाए शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल

#मेदिनीनगर #एनपीयू_विवाद : कुलपति के एक वर्ष के कार्यकाल पर एनएसयूआई ने प्रशासनिक और शैक्षणिक अव्यवस्था का आरोप लगाया।

मेदिनीनगर स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह के एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर विवाद गहराता नजर आ रहा है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमरनाथ तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में अव्यवस्था और देरी के कारण हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। मामले को लेकर सरकार से हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष अमरनाथ तिवारी ने एनपीयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
  • कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह के एक वर्ष के कार्यकाल पर उठे सवाल।
  • परीक्षा परिणाम, नामांकन और रजिस्ट्रेशन को लेकर विवाद की चर्चा।
  • NEP स्नातक सत्र 2022–26 और 2023–27 की परीक्षाओं में देरी का आरोप।
  • हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

मेदिनीनगर (पलामू) स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. डॉ. दिनेश कुमार सिंह के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने के साथ ही विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमरनाथ तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में शायद ही किसी कुलपति का कार्यकाल इतने विवादों और आरोपों के बीच रहा हो। तिवारी के अनुसार, वर्तमान समय में विश्वविद्यालय की स्थिति छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर उठे सवाल

अमरनाथ तिवारी ने आरोप लगाया कि पूर्व के कुलपतियों ने जहां छात्रहित और शैक्षणिक विकास को प्राथमिकता दी, वहीं वर्तमान कार्यकाल में ठेकेदारी, खरीदारी और कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग भी इन विवादों से अछूता नहीं रहा है। डिग्री और वोकेशनल कोर्सों के परीक्षा परिणाम को लेकर कई बार आरोप सामने आए हैं और इन मामलों की चर्चा कुलपति कार्यालय तक पहुंची है।

अमरनाथ तिवारी ने कहा: “विश्वविद्यालय में लगातार उठ रहे विवाद और प्रशासनिक निर्णयों की वजह से छात्रों और शिक्षकों में असंतोष की स्थिति बनती जा रही है।”

नामांकन और रजिस्ट्रेशन में अनियमितता का आरोप

एनएसयूआई नेता ने कहा कि नामांकन, रजिस्ट्रेशन और विभिन्न वोकेशनल कोर्सों में पैसों के लेन-देन की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय को कम समय में कई जांचों का सामना करना पड़ा है, जो सामान्य परिस्थितियों में किसी पदाधिकारी के पद छोड़ने के बाद देखने को मिलता है।

उनके अनुसार, विश्वविद्यालय के भीतर कार्यप्रणाली को लेकर प्रोफेसरों और कर्मचारियों के बीच भी असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। कई कार्यालयों और फाइलों के अत्यधिक केंद्रीकरण की बात सामने आई है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

News dekho specials

ओएसडी नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर भी सवाल

अमरनाथ तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय में OSD की नियुक्ति और उनके प्रयोग को लेकर भी शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे हैं। उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का माहौल काफी कठोर और तनावपूर्ण हो गया है, जिससे छात्र-छात्राएं परिसर में खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

विश्वविद्यालय विभागों की स्थिति पर चिंता

तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय के कई यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट फिलहाल जीएलए कॉलेज मेदिनीनगर के हॉबी सेंटर में संचालित किए जा रहे हैं। यहां पर्याप्त कमरों की कमी है और छात्रों के बैठने के लिए भी समुचित बेंच और डेस्क उपलब्ध नहीं हैं।

इस कारण छात्रों और शिक्षकों दोनों को पढ़ाई और शिक्षण कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

परीक्षाओं में देरी से छात्रों का भविष्य प्रभावित

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि NEP स्नातक सत्र 2022–26 के छात्रों के चार वर्ष बीत जाने के बाद भी आठ सेमेस्टर में से केवल तीन सेमेस्टर की ही परीक्षा आयोजित हो सकी है।

वहीं NEP स्नातक सत्र 2023–27 में भी अब तक केवल दो सेमेस्टर की परीक्षा ही हो पाई है। इस स्थिति के कारण आगामी पीजी सत्र 2026–28 के नामांकन को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनती जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि सत्र 2021–24 तथा CBCS प्रणाली के छात्रों का बैकलॉग भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा विश्वविद्यालय का पीजी सत्र 2024–26 भी लेप्स हो चुका है, जिसे उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

अमरनाथ तिवारी ने अंत में राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए।

अमरनाथ तिवारी ने कहा: “छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

न्यूज़ देखो: उच्च शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में उठ रहे ये आरोप उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं। यदि परीक्षा, नामांकन और शैक्षणिक सत्र समय पर नहीं चलेंगे तो इसका सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ेगा। ऐसे मामलों में प्रशासन की पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय बेहद जरूरी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो सुरक्षित होगा छात्रों का भविष्य

विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की नींव होता है। इसलिए वहां की व्यवस्था मजबूत और पारदर्शी होना बेहद आवश्यक है।

जरूरी है कि छात्र, शिक्षक और प्रशासन मिलकर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें। छात्रों के भविष्य से जुड़ा हर मुद्दा गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

आप इस खबर पर अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़े।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: