News dekho specials
Palamau

पत्रकार मोहम्मद सफी को न्यायालय नोटिस जारी होने पर उठा विवाद, बोले छवि खराब करने और डराने की साजिश

#मेदिनीनगर #न्यायालय_नोटिस : चुनाव से पहले पत्रकार को नोटिस मिलने पर विवाद बढ़ा।

मेदिनीनगर में नगर निकाय चुनाव 2026 से पहले एक स्वतंत्र पत्रकार को न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने का मामला सामने आया है। पत्रकार मोहम्मद सफी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 126 के तहत शांति भंग की आशंका के आधार पर न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। सफी ने नोटिस की प्रक्रिया और आधार पर सवाल उठाते हुए इसे उनकी छवि खराब करने और मानसिक दबाव बनाने का प्रयास बताया है। मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • मेदिनीनगर न्यायालय के कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा पत्रकार को नोटिस जारी।
  • मोहम्मद सफी, स्वतंत्र पत्रकार और झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य।
  • नोटिस में दंड प्रक्रिया संहिता धारा 126 के तहत शांति भंग की आशंका का उल्लेख।
  • पत्रकार ने नोटिस को तीन दिन बाद एक व्यक्ति के माध्यम से मिलने पर उठाए सवाल।
  • सफी का घर नगर परिषद क्षेत्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर होने का दावा।
  • स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा तेज

मेदिनीनगर में नगर निकाय चुनाव 2026 के पूर्व एक स्वतंत्र पत्रकार को जारी न्यायालय नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। न्यायालय कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा जारी इस नोटिस में पत्रकार मोहम्मद सफी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 126 के तहत शांति भंग की आशंका के आधार पर न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई पर खुद पत्रकार ने गंभीर आपत्ति जताते हुए नोटिस की प्रक्रिया और इसके आधार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे उनकी पत्रकारिता और छवि को प्रभावित करने की कोशिश बताया है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

न्यायालय द्वारा जारी नोटिस पर उठे सवाल

मेदिनीनगर स्थित न्यायालय के कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा जारी नोटिस में यह उल्लेख किया गया है कि नगर निकाय चुनाव 2026 के दौरान शांति भंग की आशंका के मद्देनजर मोहम्मद सफी को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 126 के अंतर्गत जारी किया गया है, जो संभावित शांति भंग की स्थिति में एहतियाती कार्रवाई का प्रावधान करती है।

हालांकि, इस नोटिस को लेकर पत्रकार मोहम्मद सफी ने कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि नोटिस उन्हें सीधे तौर पर नहीं दिया गया, बल्कि यह उन्हें जारी होने के लगभग तीन दिन बाद एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से प्राप्त हुआ।

नोटिस की तामिला प्रक्रिया पर जताई आपत्ति

मोहम्मद सफी ने नोटिस की तामिला प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि नियमानुसार नोटिस की विधिवत तामिला की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मोहम्मद सफी ने कहा:

“मुझे यह नोटिस तीन दिन बाद एक व्यक्ति के माध्यम से मिला, जबकि नियमों के अनुसार इसकी विधिवत तामिला होनी चाहिए थी। यह प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।”

उन्होंने यह भी पूछा कि यदि प्रशासन को उनसे संबंधित कोई आशंका थी, तो उन्हें सीधे तौर पर सूचना क्यों नहीं दी गई।

News dekho specials

नगर परिषद क्षेत्र से बाहर रहने का दावा

मोहम्मद सफी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नगर परिषद क्षेत्र के निवासी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनका निवास नगर परिषद क्षेत्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में चुनाव के दौरान उनके द्वारा शांति भंग किए जाने की आशंका जताना पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि बिना ठोस आधार के इस प्रकार की कार्रवाई करना कई सवाल खड़े करता है और इससे उनकी पेशेवर छवि पर भी असर पड़ सकता है।

पत्रकार ने कार्रवाई को बताया छवि खराब करने का प्रयास

मोहम्मद सफी एक स्वतंत्र पत्रकार हैं और झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य भी हैं। वे लंबे समय से जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं और विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक विषयों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

मोहम्मद सफी ने कहा:

“मैंने हमेशा निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता की है। यदि सच दिखाना किसी को असुविधाजनक लगता है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। यह कार्रवाई मुझे डराने, मानसिक दबाव बनाने और मेरी छवि खराब करने की साजिश प्रतीत होती है।”

उन्होंने यह भी कहा कि वे कानून और न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं और निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की भूमिका पर चर्चा तेज

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्राप्त है। पत्रकारिता इसी अधिकार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए समाज और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित होता है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या इस प्रकार की कार्रवाई पत्रकारों पर अनावश्यक दबाव बनाने का माध्यम बन सकती है, या यह केवल एक एहतियाती प्रशासनिक प्रक्रिया है।

आगामी न्यायालयीय सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में आगामी न्यायालयीय सुनवाई को लेकर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस सुनवाई के दौरान मोहम्मद सफी अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे और न्यायालय तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

यह सुनवाई न केवल इस मामले की दिशा तय करेगी, बल्कि इससे पत्रकारिता, प्रशासनिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े व्यापक सवालों पर भी स्पष्टता आने की उम्मीद है।

न्यूज़ देखो: पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन का सवाल

मेदिनीनगर में पत्रकार मोहम्मद सफी को जारी नोटिस का मामला प्रशासनिक कार्रवाई और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है। यह प्रकरण दर्शाता है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में प्रशासन सतर्क रहता है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि प्रक्रियाएं पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हों। पत्रकारों की भूमिका लोकतंत्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है और उनकी स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना आवश्यक है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालता है और क्या इससे भविष्य के लिए कोई स्पष्ट दिशा तय होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान बनाता है

लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों, पत्रकारों और संस्थाओं की पारदर्शिता पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में सच्चाई सामने आना और निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन होना समाज के विश्वास को मजबूत करता है। जागरूक नागरिक और स्वतंत्र पत्रकार मिलकर ही एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण करते हैं।

यदि आप भी मानते हैं कि पारदर्शिता और निष्पक्षता हर व्यवस्था की आधारशिला है, तो इस खबर पर अपनी राय जरूर साझा करें। अपनी आवाज को मजबूत बनाएं, इस खबर को अपने साथियों तक पहुंचाएं और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

News dekho specials


IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009
News dekho specials

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: