
#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : बिना नोटिस मजदूरों को हटाने के खिलाफ असंगठित मजदूर मोर्चा का सांकेतिक प्रदर्शन।
गिरिडीह जिले की बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में मजदूरों को बिना नोटिस हटाने के आरोपों को लेकर भाकपा माले की मजदूर इकाई असंगठित मजदूर मोर्चा ने विरोध दर्ज कराया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मजदूर झंडा-बैनर के साथ फैक्ट्री गेट पहुंचे और प्रबंधन से वार्ता की मांग की। मामले की सूचना पहले ही जिला प्रशासन और श्रम अधीक्षक को दी गई थी, जहां हस्तक्षेप के बाद प्रबंधन और मजदूरों के बीच संवाद शुरू हुआ। एक सप्ताह बाद विस्तृत वार्ता कराने पर सहमति बनी, जिससे मजदूरों को आंशिक राहत मिली।
- बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में मजदूरों को बिना नोटिस हटाने का आरोप।
- विरोध का नेतृत्व भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने किया।
- असंगठित मजदूर मोर्चा के बैनर तले फैक्ट्री गेट पर सांकेतिक प्रदर्शन।
- जिला प्रशासन और श्रम अधीक्षक की मौजूदगी में प्रबंधन से वार्ता शुरू।
- हटाए गए मजदूरों के मुद्दे पर एक सप्ताह बाद पुनः बातचीत तय।
गिरिडीह जिले में औद्योगिक क्षेत्र से एक बार फिर मजदूर शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में ठेकेदार और प्रबंधन पर मजदूरों को बिना किसी कारण, बिना नोटिस और बिना नियम-कानून की जानकारी दिए काम से हटाने का आरोप लगा है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की मजदूर विंग असंगठित मजदूर मोर्चा ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
फैक्ट्री गेट पर झंडा-बैनर के साथ पहुंचे मजदूर
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत असंगठित मजदूर मोर्चा के बैनर तले मजदूर और पार्टी कार्यकर्ता फैक्ट्री गेट के समीप पहुंचे। इस आंदोलन की पूर्व सूचना गिरिडीह उपायुक्त और श्रम अधीक्षक को दी गई थी। आंदोलनकारियों का उद्देश्य फैक्ट्री के जीएम से सीधे वार्ता कर मजदूरों की बहाली और अधिकारों पर चर्चा करना था।
हालांकि, इस दौरान फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा जिला प्रशासन को यह जानकारी देने का प्रयास किया गया कि किसी भी मजदूर को नहीं हटाया गया है। भाकपा माले नेताओं ने इस दावे को गलत बताते हुए प्रशासन के समक्ष ठेकेदारों और मजदूरों से सीधी बातचीत करवाई, जिसके बाद प्रबंधन के दावे का पर्दाफाश हुआ।
मजदूरों को बिना नोटिस हटाने पर कड़ा विरोध
भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन और ठेकेदारों द्वारा मजदूरों को बार-बार बिना नोटिस हटाने की परंपरा चिंताजनक रूप से बढ़ रही है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “फैक्ट्री में मजदूरों के साथ ज्यादती करना बंद करें प्रबंधन। अगर नियम-कानून ताक पर रखकर मजदूरों को हटाया गया तो हम जिला प्रशासन, श्रम अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों से बात कर लोकतांत्रिक आंदोलन तेज करेंगे।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हाल के दिनों में फैक्ट्री से जुड़े मामलों में दो मजदूरों की मौत हुई थी, जिनके लिए भाकपा माले के आंदोलन के बाद मुआवजा दिलाया जा सका।
एक सप्ताह बाद वार्ता पर बनी सहमति
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद फैक्ट्री प्रबंधन और मजदूरों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हुई। हटाए गए मजदूरों के सवाल पर एक सप्ताह बाद विस्तृत वार्ता कराने पर सहमति बनी। इस निर्णय को मजदूरों ने प्रारंभिक सफलता माना, हालांकि उन्होंने स्थायी समाधान की मांग दोहराई।
प्रबंधन पर गलतियों को दोहराने का आरोप
माले नेता कन्हाई पांडेय ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बालमुकुंद फैक्ट्री द्वारा बार-बार वही गलतियां दोहराई जाती हैं और अब सुधार की सख्त जरूरत है।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “सभी फैक्ट्रियों में मजदूरों से 12 घंटे काम करवाया जाता है, लेकिन सरकारी सुविधाएं नहीं दी जातीं। प्रदूषण चरम पर है और मुआवजा देने में भी घंटों लगा दिए जाते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिक और जीएम हर साल बड़े आर्थिक लेन-देन करते हैं, लेकिन गिरिडीह की जनता और मजदूरों के साथ खड़े नहीं होते।
हटाए गए मजदूरों के नाम आए सामने
बिना नोटिस हटाए गए मजदूरों में वीरेंद्र चौधरी (नावाडीह, उदनाबाद), मनोज चौधरी (नावाडीह), मेहताब अंसारी (बरवाडीह) और मिन्हाज अंसारी (बरवाडीह) शामिल हैं। नेताओं ने सवाल उठाया कि बिना पूर्व सूचना हटाए गए मजदूर और उनके परिवारों पर क्या बीतती है, इसका अंदाजा फैक्ट्री प्रबंधन को भी नहीं है।
आंदोलन को व्यापक रूप देने की चेतावनी
गिरिडीह और गांडेय विधानसभा प्रभारी पूरन महतो ने कहा कि मजदूरों के मुद्दे पर गिरिडीह की जनता को एकजुट किया जाएगा और जल्द ही बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा।
इस सांकेतिक प्रदर्शन का नेतृत्व प्रखंड सचिव मसूदन कोल, किशोर राय, भीम कोल, पवन यादव, लखन कोल, धनेश्वर कोल, धूमा टुड्डू, चंदन टुडू, सोमी देवी, सुनील ठाकुर, दिलचंद कोल, मोहन कोल, हीरालाल पंडित, हरि पंडित, बुधन तुरी, गणेश तुरी, संजय तुरी, नारायण तुरी, राजू तुरी, प्रीतम तुरी, भीम दास सहित बड़ी संख्या में मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने किया। महिलाओं में मांगरी देवी, जितनी देवी सहित कई महिलाएं भी मौजूद रहीं।
न्यूज़ देखो: मजदूर अधिकार बनाम औद्योगिक मनमानी
बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि औद्योगिक विकास की आड़ में मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी क्यों की जा रही है। प्रशासनिक हस्तक्षेप से वार्ता शुरू होना सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्थायी समाधान के बिना ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे। क्या श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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