बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ 17 फरवरी को चतरो मैदान में आमसभा, फर्जी मुकदमा और प्रदूषण पर भाकपा माले का आंदोलन

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ 17 फरवरी को चतरो मैदान में आमसभा, फर्जी मुकदमा और प्रदूषण पर भाकपा माले का आंदोलन

author Saroj Verma
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#गिरिडीह #औद्योगिकक्षेत्र #मजदूरआंदोलन : 17 फरवरी को चतरो मैदान में आमसभा की घोषणा।

औद्योगिक क्षेत्र चतरो मैदान में 17 फरवरी को भाकपा माले असंगठित मजदूर मोर्चा द्वारा आमसभा आयोजित की जाएगी। यह सभा बालमुकुंद फैक्ट्री पर फर्जी मुकदमा, प्रदूषण, मजदूर छंटनी और स्थानीय किसानों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को लेकर बुलाई गई है। मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मजदूर नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने क्षेत्र की जनता और मजदूरों से बड़ी संख्या में एकजुट होकर शामिल होने की अपील की है।

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  • 17 फरवरी को औद्योगिक क्षेत्र चतरो मैदान में आमसभा।
  • भाकपा माले असंगठित मजदूर मोर्चा की ओर से आंदोलन की घोषणा।
  • बालमुकुंद फैक्ट्री पर फर्जी मुकदमा, प्रदूषण और छंटनी के आरोप।
  • उसरी नदी के प्रवाह रोकने और सीआरएस फंड उपयोग पर सवाल।
  • नेताओं ने मजदूरों से डर छोड़कर एकजुट होने की अपील की।

औद्योगिक क्षेत्र में स्थित चतरो मैदान 17 फरवरी को एक बड़े आंदोलन का साक्षी बनने जा रहा है। भाकपा माले असंगठित मजदूर मोर्चा ने बालमुकुंद फैक्ट्री सहित अन्य फैक्ट्रियों की व्यवस्था के खिलाफ आमसभा आयोजित करने की घोषणा की है। संगठन का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मजदूरों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है और आवाज उठाने वालों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।

फर्जी मुकदमा और प्रदूषण का आरोप

असंगठित मजदूर मोर्चा के केंद्रीय सचिव कन्हाई पांडेय और माले नेता राजेश सिन्हा ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए कहा कि बालमुकुंद फैक्ट्री द्वारा मजदूर मोर्चा के नेता पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदूषण, मजदूर छंटनी, मजदूरों पर अत्याचार, किसानों की जमीन और जलस्रोत की बर्बादी जैसे गंभीर मुद्दों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उसरी नदी के पानी को फैक्ट्री के ब्रांच बाला जी द्वारा रात में मोटर लगाकर रोका जाता है, जिससे नदी का प्रवाह प्रभावित होता है। साथ ही सीआरएस फंड का औद्योगिक क्षेत्र में समुचित उपयोग नहीं होने का भी मुद्दा उठाया गया है।

कन्हाई पांडेय ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री द्वारा फर्जी मुकदमा और प्रदूषण के खिलाफ जनता गोलबंद है। मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी।”

थाना प्रभारी को दिया गया आवेदन

माले नेता राजेश सिन्हा ने बताया कि फर्जी मुकदमे के विरोध में मुफ्फसिल थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। उनका कहना है कि लगाए गए आरोप निराधार हैं और सीसीटीवी फुटेज से सच्चाई सामने आ जाएगी।

राजेश सिन्हा ने कहा: “सारे आरोप गलत लगाए गए हैं। सीसीटीवी से सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। बालमुकुंद के जीएम पर फर्जी जानकारी देने के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का फर्जी केस दर्ज न कर सके।”

मजदूरों और किसानों के मुद्दे

माले के प्रखंड सचिव मसूदन कोल, असंगठित मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष किशोर राय, भीम कोल, लखन कोल, दीपक गोस्वामी, पवन यादव सहित अन्य नेताओं ने कहा कि उद्योग से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, लेकिन स्थानीय मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार मजदूरों की मजदूरी में कटौती करते हैं और कुछ प्रबंधक मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

नेताओं का कहना है कि जब वे मजदूरों के पक्ष में आवाज उठाते हैं, तो उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी पूंजीपतियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

17 फरवरी को बड़ा आंदोलन

संगठन ने स्पष्ट किया है कि 17 फरवरी को चतरो मैदान में होने वाली आमसभा के माध्यम से सभी मुद्दों को जनता के सामने रखा जाएगा। नेताओं ने मजदूरों से अपील की कि वे फैक्ट्री प्रबंधन के डर से पीछे न हटें और आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें।

राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने कहा: “यदि मजदूर डरकर आंदोलन में नहीं आएंगे तो हम उनकी मदद कैसे कर पाएंगे। डर तोड़कर आगे आने का प्रयास करें।”

न्यूज़ देखो: आरोपों के बीच जवाबदेही की जरूरत

औद्योगिक क्षेत्र में उठे ये आरोप श्रमिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर सवाल खड़े करते हैं। एक ओर संगठन फर्जी मुकदमे और प्रदूषण का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर निष्पक्ष जांच की आवश्यकता भी सामने आती है। प्रशासन और संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि आरोपों की पारदर्शी जांच हो और सच्चाई सामने आए। मजदूरों के अधिकार और उद्योग की जवाबदेही दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हक और जिम्मेदारी दोनों जरूरी

उद्योग विकास का माध्यम है, लेकिन विकास तभी सार्थक है जब उसमें श्रमिकों का सम्मान और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हो। मजदूरों की आवाज सुनी जाए और विवादों का समाधान संवाद और कानून के दायरे में हो, यही समाज के लिए बेहतर रास्ता है।

यदि आप भी इस मुद्दे से जुड़े हैं या अपने क्षेत्र की समस्याओं पर आवाज उठाना चाहते हैं, तो सजग और जिम्मेदार नागरिक बनें। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और सकारात्मक व न्यायपूर्ण व्यवस्था के समर्थन में अपनी भागीदारी निभाएं।

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Written by

दुमका/देवघर

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