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पीरटांड़ के मधुबन में वन विभाग की कार्रवाई पर माले का विरोध तेज, गरीबों के घर तोड़ने के प्रयास पर आंदोलन की चेतावनी

#पीरटांड़गिरिडीह #वनविभाग_विवाद : कोरिया बस्ती में घर तोड़ने के प्रयास पर नेताओं ने जताया रोष।

पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन क्षेत्र स्थित कोरिया बस्ती में वन विभाग द्वारा कथित रूप से गरीबों के घर तोड़ने के प्रयास को लेकर विवाद गहरा गया है। माले नेताओं पूरन महतो, राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने विभागीय कार्रवाई का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। नेताओं का आरोप है कि पूर्व में डीएफओ से आश्वासन मिलने के बावजूद कार्रवाई जारी है। मामले को लेकर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

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  • कोरिया बस्ती, मधुबन में घर तोड़ने के प्रयास का आरोप।
  • पूरन महतो ने कहा – गरीबों पर कहर बर्दाश्त नहीं।
  • राजेश सिन्हा ने वन विभाग पर हमला बंद करने की मांग।
  • कन्हाई पांडेय ने अफसरों व जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए।
  • डीएफओ मनीष कुमार से पूर्व में हुई थी वार्ता।

पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन इलाके में स्थित कोरिया बस्ती में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद तेज हो गया है। माले नेताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के कर्मियों ने गरीब परिवारों के घर तोड़ने का प्रयास किया। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

नेताओं का कहना है कि इससे पहले जिला कमिटी के सदस्यों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत की थी। इसके बावजूद कार्रवाई जारी रहने का आरोप लगाया गया है।

नेताओं ने लगाया गंभीर आरोप

किसान नेता पूरन महतो ने वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि गरीबों पर इस तरह का कहर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पूरन महतो ने कहा: “वन विभाग मधुबन में लगातार गरीबों पर कहर ढा रहा है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।”

माले नेता राजेश सिन्हा ने भी वन विभाग पर गरीबों को परेशान करने का आरोप लगाया।

राजेश सिन्हा ने कहा: “गरीबों पर वन विभाग का हमला तुरंत बंद होना चाहिए, अन्यथा हम चुप नहीं बैठेंगे।”

वहीं कन्हाई पांडेय ने कहा कि पीरटांड़ प्रखंड में अफसरों और जनप्रतिनिधियों का कहर जारी है और इसे जल्द रोकना होगा।

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कन्हाई पांडेय ने कहा: “जिला प्रशासन राज्य सरकार के आदेश का पालन करे, वरना प्रदर्शन के जरिए हम अपनी मांग मनवाने में सक्षम हैं।”

डीएफओ से हुई थी बातचीत

नेताओं के अनुसार, पूर्व में डीएफओ मनीष कुमार से इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी। उनका कहना है कि डीएफओ ने आश्वासन दिया था कि भूमिहीनों को वन पट्टा देने का प्रावधान राज्य सरकार के स्तर पर है और इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

इससे पहले मधुबन के नेताओं की अगुवाई में अंचल कार्यालय में प्रदर्शन भी किया गया था। उस समय अंचल अधिकारी ने भी आश्वासन दिया था कि मामले पर सकारात्मक पहल की जाएगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी उठे सवाल

माले नेताओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों को भी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और बेघर परिवारों को लगातार परेशान किया जा रहा है। नेताओं का कहना है कि यदि इस तरह की कार्रवाई नहीं रुकी तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

12 फरवरी को माले नेता पूरन महतो, राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने स्थल का निरीक्षण किया। वहां कथित रूप से एक टूटा हुआ घर पाए जाने का दावा किया गया। इसके बाद नेताओं ने वन विभाग को घेरने और अंचल कार्यालय में पुनः प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

नेताओं ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर उन्हें असंगठित मजदूर मोर्चा के तमाम नेताओं का समर्थन प्राप्त है।

प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से वहां रह रहे हैं और उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के बिना हटाना उचित नहीं है। दूसरी ओर, वन विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

क्षेत्र में स्थिति को लेकर तनाव बना हुआ है और आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट हो सकती है।

न्यूज़ देखो: विकास और अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत

मधुबन के कोरिया बस्ती का मामला एक बार फिर भूमि अधिकार, वन कानून और गरीब परिवारों के पुनर्वास जैसे संवेदनशील सवालों को सामने लाता है। यदि भूमिहीनों को वन पट्टा देने का प्रावधान है, तो उसे पारदर्शी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। साथ ही प्रशासन की कार्रवाई मानवीय और कानूनसम्मत होनी चाहिए। क्या जिला प्रशासन इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल पाएगा? इस पर सबकी नजर रहेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों के लिए जागरूक रहें कानून और न्याय की मांग करें

गरीब और भूमिहीन परिवारों के अधिकारों की रक्षा समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। किसी भी कार्रवाई से पहले मानवीय दृष्टिकोण और वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है। जागरूक नागरिक बनें, तथ्य जानें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएं।

यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी कोई समस्या है तो उसे सामने लाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और जिम्मेदार संवाद को आगे बढ़ाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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