अमेरिकी टैरिफ नीति के खिलाफ गिरिडीह में भाकपा माले का विरोध प्रदर्शन

अमेरिकी टैरिफ नीति के खिलाफ गिरिडीह में भाकपा माले का विरोध प्रदर्शन

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #विरोध : पीएम मोदी और ट्रंप का पुतला फूंका, केंद्र सरकार पर लगाया नरमी का आरोप
  • भाकपा माले ने अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के खिलाफ प्रदर्शन किया।
  • कार्यक्रम अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले आयोजित हुआ।
  • प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंका।
  • वरिष्ठ नेता राजकुमार यादव ने अमेरिका के सामानों पर 50% टैरिफ लगाने की मांग की।
  • प्रदर्शन में कोयला चोरी और अफसरशाही के मुद्दे भी उठे।

गिरिडीह में अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के खिलाफ भाकपा माले ने जोरदार प्रतिवाद किया। अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

नेताओं के आरोप – केंद्र सरकार पर नरमी का रवैया

कार्यक्रम के दौरान भाकपा माले के वरिष्ठ नेता राजकुमार यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को अमेरिका के सामानों पर 50% टैरिफ लगाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप लगातार भारत का अपमान कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी चुप्पी साधे हुए हैं

राजकुमार यादव ने कहा: “जब अमेरिका भारत के खिलाफ आर्थिक आघात कर रहा है, तब हमारी सरकार का कर्तव्य है कि वह सख्ती दिखाए और जवाबी कार्रवाई करे।”

किसान नेताओं की भागीदारी और अन्य मुद्दे

इस प्रदर्शन में किसान नेताओं ने भी भाग लिया और केंद्र सरकार पर वोट की चोरी कर सत्ता में आने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अब जनता को न धर्म के नाम पर, न झूठे वादों के सहारे गुमराह किया जा सकता है।

साथ ही, कार्यक्रम में कोयला चोरी के मामले को भी प्रमुखता से उठाया गया। माले नेताओं ने आरोप लगाया कि अफसरशाही के कारण आम जनता परेशान है और प्रशासन इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।

न्यूज़ देखो: जनाक्रोश का उभार और सरकार की परीक्षा

गिरिडीह में हुआ यह प्रदर्शन दिखाता है कि आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों पर जनता का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। टैरिफ नीति से लेकर कोयला चोरी तक, हर मुद्दे पर जवाबदेही की मांग तेज हो रही है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

लोकतंत्र में जनआवाज की ताकत

जब जनता और किसान संगठन मिलकर अपनी बात रखते हैं, तो यह लोकतंत्र की सेहत के लिए सकारात्मक संकेत है। अपने विचार व्यक्त करने और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए इस खबर को साझा करें और अपनी राय कमेंट में लिखें।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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