#गिरिडीह #शिक्षा_विवाद : निजी और सरकारी स्कूलों की समस्याओं पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग।
गिरिडीह में भाकपा माले नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इसमें निजी स्कूलों की फीस मनमानी, री-एडमिशन और सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट जैसे मुद्दे उठाए गए। नेताओं ने अभिभावकों और छात्रों की समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा। इस पहल को शिक्षा सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
- गिरिडीह उपायुक्त को माले नेताओं ने सौंपा ज्ञापन।
- राजेश सिन्हा ने अभिभावकों और छात्रों की समस्याएं उठाईं।
- निजी स्कूलों में री-एडमिशन और फीस मनमानी पर सवाल।
- ड्रॉपआउट छात्रों की संख्या पर चिंता जताई गई।
- शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन से कार्रवाई की मांग।
गिरिडीह में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भाकपा माले नेताओं ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी चिंता जताई है। माले नेता राजेश सिन्हा के नेतृत्व में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए निजी और सरकारी स्कूलों में चल रही समस्याओं को विस्तार से रखा गया। नेताओं ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
अभिभावकों की समस्याओं को उठाया गया
माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि अभिभावक कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाएं।
राजेश सिन्हा ने कहा: “जब अभिभावक अपनी बात खुलकर नहीं रख पाते, तब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम उनकी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखें।”
उन्होंने शिक्षा को हर छात्र का मौलिक अधिकार बताते हुए इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
री-एडमिशन फीस पर उठे सवाल
ज्ञापन में निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही री-एडमिशन फीस को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। राजेश सिन्हा ने कहा कि यह अब कुछ स्कूलों का स्टेटस सिंबल बन गया है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “जिन स्कूलों में री-एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है, उन्हें चिन्हित कर अभिभावकों को राहत दी जानी चाहिए।”
उन्होंने सुझाव दिया कि या तो यह राशि वापस की जाए या अगली फीस में समायोजित किया जाए।
ड्रॉपआउट छात्रों पर चिंता
ज्ञापन में सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट छात्रों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया। गिरिडीह प्रखंड के पचंबा थाना क्षेत्र के मुसफडीह में एक वर्ष में लगभग 100 छात्रों के ड्रॉपआउट होने की बात कही गई।
इस मामले में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई और सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
सरकार की पहल और कमियों पर चर्चा
माले नेताओं ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन द्वारा हाल के दिनों में ड्रॉपआउट छात्रों को वापस स्कूल से जोड़ने की दिशा में कुछ सकारात्मक पहल की गई है, जिससे उम्मीद है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी।
हालांकि, इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था में कई कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया।
आईसा और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
आईसा के गिरिडीह शहर प्रभारी रेहान ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा शिक्षा को प्राथमिकता देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति संतोषजनक नहीं है।
रेहान ने कहा: “सरकार के दावों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है और विभागीय मार्गदर्शन की कमी दिख रही है।”
वहीं माले के ब्रांच कमिटी सदस्य नौशाद आलम ने कहा कि अधिकांश स्कूलों में सुधार की जरूरत है, जबकि कुछ स्कूलों में मनमानी और दबंग रवैया देखने को मिल रहा है।
नौशाद आलम ने कहा: “शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए प्रशासन और सरकार को गंभीरता से काम करना होगा।”
शिक्षा व्यवस्था सुधार की मांग
माले नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि निजी और सरकारी दोनों तरह के स्कूलों में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फीस नियंत्रण, शिक्षण गुणवत्ता और ड्रॉपआउट की समस्या को प्राथमिकता के साथ हल करने की जरूरत बताई गई।
उन्होंने कहा कि यदि इन मुद्दों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
न्यूज़ देखो: शिक्षा पर सवाल, जवाबदेही तय करना जरूरी
गिरिडीह में उठे ये मुद्दे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को सामने लाते हैं। निजी स्कूलों की फीस मनमानी और सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकाल सके और शिक्षा को वास्तव में सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बना सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक जब व्यवस्था हो मजबूत
हर बच्चे को बेहतर शिक्षा मिलना उसका अधिकार है, लेकिन इसके लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा।
आप भी अपने क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति पर नजर रखें और गलत के खिलाफ आवाज उठाएं। जागरूकता ही बदलाव की पहली सीढ़ी है।
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