
#गिरिडीह #सीसीएल_विस्थापित : माले नेताओं ने सीसीएल क्षेत्र में विस्थापितों, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर आंदोलन का ऐलान किया।
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के सीसीएल इलाके में विस्थापितों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर भाकपा माले ने बड़े आंदोलन की घोषणा की है। माले नेताओं ने कहा कि कोयला उत्पादन में अग्रणी होने के बावजूद यह क्षेत्र बेरोजगारी और बदहाली का शिकार है। विस्थापितों को नौकरी, सुविधा और सुरक्षा देने के वादे दशकों से अधूरे हैं। इन मुद्दों पर माले जन जागरण और लगातार आंदोलन करेगा।
- सीसीएल गिरिडीह क्षेत्र में विस्थापितों के लिए आंदोलन की घोषणा।
- राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने माले की अगुवाई का ऐलान किया।
- जमीन देने के बदले नौकरी-रोजगार का वादा आज तक पूरा नहीं।
- बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था बदहाल होने का आरोप।
- चंदाखोरी, कोयला व लोहा चोरी में सत्ता संरक्षण का आरोप।
- सभी मांगों को लेकर सीसीएल कार्यालय से जनता सवाल करेगी।
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सीसीएल इलाके में व्याप्त समस्याओं को लेकर भाकपा माले ने आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कोयला उत्पादन के मामले में गिरिडीह सीसीएल देश के बेहतर क्षेत्रों में गिना जाता है, लेकिन बेरोजगारी और विस्थापन की समस्या भी यहां सबसे गंभीर है। माले का आरोप है कि वर्षों से स्थानीय जनता की अनदेखी की जा रही है और अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विस्थापितों से किए गए वादे आज भी अधूरे
भाकपा माले नेताओं राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने कहा कि सीसीएल क्षेत्र की जमीन मूल रूप से स्थानीय जमीन मालिकों की थी। शुरुआती दौर में जब जमीन अधिग्रहण हुआ, तब यह वादा किया गया था कि जमीन मालिकों के परिवारों को नौकरी और रोजगार दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लगभग सौ साल बीत जाने के बावजूद यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। पहले यह क्षेत्र प्राइवेट कंपनियों, फिर एनसीडीसी और उसके बाद सीसीएल के अधीन आया, लेकिन किसी भी संस्था ने स्थानीय लोगों के भविष्य के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा।
उत्पादन में टॉप, बेरोजगारी में भी आगे
माले नेताओं ने आरोप लगाया कि सीसीएल क्षेत्र आज उत्पादन के मामले में लगातार टॉप पर है। हाल ही में कबरी माइंस का संचालन भी राज्य सरकार की मदद और जनप्रतिनिधियों के आंदोलन के बाद शुरू हुआ, जिसमें स्थानीय विधायक ने भी संज्ञान लिया।
लेकिन राजेश सिन्हा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और सरकार ने केवल उत्पादन पर ध्यान दिया, जबकि बेरोजगारी और विस्थापितों की स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि जनता डर के माहौल में जी रही है और माले उन्हें आवाज देगा।
बिजली-पानी मुफ्त देने का प्रावधान, लेकिन हकीकत अलग
माले ने आरोप लगाया कि सीसीएल क्षेत्र में बिजली और पानी निशुल्क देने का प्रावधान है, लेकिन हकीकत में दोनों की भारी कमी है। नियमित बिजली आपूर्ति नहीं होती और पानी की व्यवस्था भी चरमराई हुई है।
उन्होंने कहा कि इलाके में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है, मजदूर परेशान हैं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। खेल मैदान मौजूद हैं, लेकिन वहां किसी तरह की सुविधा नहीं है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
चंदाखोरी और सरकारी संपत्ति की लूट का आरोप
माले नेताओं ने सीसीएल क्षेत्र में चंदाखोरी और सरकारी संपत्ति की खुलेआम लूट का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि कोयला और लोहा चोरी के मामलों में केवल दिखावे की कार्रवाई होती है।
राजेश सिन्हा ने कहा:
राजेश सिन्हा ने कहा: “लूट के एजेंटों को सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है, इसलिए चोरी और भ्रष्टाचार पर कोई रोक नहीं लग रही है।”
स्थानीय मजदूर और ट्रक मालिक निशाने पर
माले ने आरोप लगाया कि विस्थापितों के घरों को बर्बाद किया जा रहा है और लोकल मजदूरों के साथ ज्यादती की जा रही है। विरोध करने पर लोगों को टारगेट किया जाता है।
उन्होंने कहा कि कई ट्रक मालिकों को मजबूरी में अपने ट्रक बेचने पड़े हैं, जिससे उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। हाल के दिनों में कुछ सुधार जरूर हुए हैं, लेकिन कमीशनखोरी अब भी तेजी से जारी है।
सीसीएल अधिकारियों पर जनता से दूरी का आरोप
माले नेताओं ने सीसीएल के बड़े अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अधिकारी आम जनता से दूरी बनाए रखते हैं और केवल शाम 5 बजे अपने चैंबर में मिलने की औपचारिक व्यवस्था रखते हैं।
कन्हाई पांडेय ने कहा कि केवल वही लोग मिल पाते हैं जो सीसीएल की तारीफ करते हैं। जनता की समस्याएं और जनप्रतिनिधियों की बातों को इगनोर किया जाता है। माले ने ऐलान किया कि इस मुद्दे को झारखंड के वरिष्ठ अधिकारियों और खनन मंत्री तक पहुंचाया जाएगा।
स्वास्थ्य, पानी और शिक्षा की बदहाल स्थिति
माले का आरोप है कि सीसीएल क्षेत्र में अस्पताल तो है, लेकिन वह केवल एक-दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। सुविधाएं नाममात्र की हैं।
इसके अलावा कोलिमारंग समेत दर्जनों जलस्रोत, जिनसे कभी लोगों को पानी मिलता था, अब बंद पड़े हैं। क्षेत्र में न तो पानी की गारंटी है और न ही समय पर बिजली मिलती है। सीसीएल क्षेत्र के अंदर रहने वाले छात्रों को आवासीय प्रमाण पत्र तक नहीं मिल पा रहा है।
सीसीएल कार्यालय से जनता करेगी सवाल
भाकपा माले ने स्पष्ट किया कि इन सभी मांगों और समस्याओं को लेकर सीसीएल कार्यालय से जनता सीधे सवाल करेगी और माले इस आंदोलन की अगुवाई करेगा। पार्टी ने कहा कि यह संघर्ष विस्थापितों, मजदूरों और स्थानीय जनता के हक के लिए है और इसे पीछे नहीं हटाया जाएगा।
न्यूज़ देखो: सीसीएल क्षेत्र में असंतोष का विस्फोट
सीसीएल गिरिडीह क्षेत्र में माले द्वारा आंदोलन का ऐलान यह दर्शाता है कि स्थानीय जनता का असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है। विस्थापन, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी लंबे समय से चली आ रही समस्या है। यदि इन मुद्दों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं।
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विस्थापितों की लड़ाई अब और तेज
जमीन देने वाले आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विकास का लाभ तभी सार्थक है, जब उसका हिस्सा स्थानीय जनता को भी मिले। विस्थापितों, मजदूरों और युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
जरूरी है कि लोग डर से बाहर निकलें और अपने हक के लिए एकजुट हों।
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