गारू सरहुल महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, विधायक रामचंद्र सिंह का पारंपरिक सम्मान और सांस्कृतिक रंग

गारू सरहुल महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, विधायक रामचंद्र सिंह का पारंपरिक सम्मान और सांस्कृतिक रंग

author Ramprawesh Gupta
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#गारू #सरहुल_महोत्सव : पारंपरिक नृत्य, पूजा और सम्मान के बीच उत्सव में दिखा जनसैलाब।

लातेहार जिले के गारू प्रखंड में सरना सरहुल महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्लस टू उच्च विद्यालय मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विधायक रामचंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन समिति ने पारंपरिक तरीके से उनका सम्मान किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पूजा-अर्चना में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

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  • गारू प्रखंड के प्लस टू उच्च विद्यालय मैदान में सरहुल महोत्सव आयोजित।
  • विधायक रामचंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल।
  • मंगल उरांव ने पगड़ी और अंग वस्त्र पहनाकर किया सम्मान।
  • मांदर की थाप पर झूमे लोग, दिखी पारंपरिक संस्कृति।
  • कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में रहे मौजूद।
  • पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीणों की भागीदारी।

लातेहार जिले के गारू प्रखंड में सरना सरहुल महोत्सव पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। प्लस टू उच्च विद्यालय मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक रामचंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। महोत्सव के दौरान आदिवासी संस्कृति की समृद्ध झलक देखने को मिली, जहां लोग मांदर की थाप पर झूमते नजर आए।

पारंपरिक तरीके से विधायक का भव्य स्वागत

महोत्सव के दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष मंगल उरांव ने विधायक रामचंद्र सिंह का पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत स्वागत किया। उन्हें पगड़ी और अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान आदिवासी संस्कृति की परंपराओं और अतिथि सत्कार की भावना को दर्शाता है।

सरहुल पर्व के महत्व पर दिया संदेश

कार्यक्रम के दौरान विधायक रामचंद्र सिंह ने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति और मानव के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है।

रामचंद्र सिंह ने कहा: “हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखने की जरूरत है, यही हमारी पहचान है।”

उन्होंने लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की अपील की।

पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

महोत्सव के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

ढोल-नगाड़ों और मांदर की धुन पर प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस अवसर पर कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

उमेश कुमार दुबे (वन क्षेत्र रेंजर), जीरा देवी (जिला परिषद सदस्य), सीता देवी (प्रमुख), मनोज यादव (विधायक प्रतिनिधि), दिनेश कुमार मिश्रा (अंचलाधिकारी), जयप्रकाश शर्मा (थाना प्रभारी)

इसके अलावा कार्यक्रम में सुनेश्वर सिंह (मुखिया), सकलदीप उरांव (कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष), शिव शंकर सिंह (पूर्व मुखिया), सूर्यदेव प्रसाद, ओमप्रकाश कुमार, अखिलेश यादव, योगेंद्र उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे।

सामूहिक सहभागिता से सफल हुआ आयोजन

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इसे भव्य बना दिया। आयोजन समिति के सदस्यों और ग्रामीणों के सहयोग से महोत्सव सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करने वाला साबित हुआ।

न्यूज़ देखो: परंपरा और एकता का जीवंत उदाहरण

गारू का सरहुल महोत्सव यह दर्शाता है कि पारंपरिक संस्कृति आज भी समाज में जीवंत है। जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की भागीदारी इस आयोजन को और मजबूत बनाती है। ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का माध्यम बनते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी जड़ों से जुड़कर ही बनती है मजबूत पहचान

सरहुल जैसे पर्व हमें अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं। आज के दौर में इन मूल्यों को बचाए रखना बेहद जरूरी है। आइए हम भी अपनी संस्कृति को समझें, अपनाएं और आगे बढ़ाएं। अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और अपनी विरासत को जीवित रखने में योगदान दें।

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Written by

महुवाडांड, लातेहार

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