
#पलामू #धार्मिक_संवाद : नववर्ष पर आयोजित पिकनिक एवं संवाद कार्यक्रम में धाम के प्रचार और विकास पर सहमति।
पलामू जिले के तरहसी प्रखंड अंतर्गत पिछुलिया स्थित स्वयंभू बाबा धाम परिसर में नववर्ष के अवसर पर पिकनिक एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पांच पंचायतों के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भाग लेकर धाम के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। महाशिवरात्रि महोत्सव की तैयारियों और धाम के समुचित विकास को लेकर सामूहिक विमर्श हुआ। सभी वक्ताओं ने इसे क्षेत्रीय आस्था और धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
- स्वयंभू बाबा धाम पिछुलिया में नववर्ष पिकनिक एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित।
- पांच पंचायतों के ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु हुए शामिल।
- महाशिवरात्रि महोत्सव की तैयारियों को लेकर हुई चर्चा।
- सप्तधारा अमृत कुंड और स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन का सामूहिक आयोजन।
- धाम को पर्यटन स्थल घोषित कराने की मांग उठी।
- मंदिर समिति ने विकास के लिए जनसहयोग का आह्वान किया।
पलामू जिले के तरहसी प्रखंड अंतर्गत उदयपुरा–2 पंचायत में स्थित स्वयंभू बाबा धाम, पिछुलिया के पावन परिसर में नववर्ष के अवसर पर आयोजित पिकनिक एवं संवाद कार्यक्रम श्रद्धा, आस्था और सामाजिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बना। पिछुलिया मंदिर समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में आसपास की पांच पंचायतों के ग्रामीणों के साथ-साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नववर्ष का स्वागत करना नहीं था, बल्कि स्वयंभू बाबा धाम के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को व्यापक स्तर पर सामने लाना और आगामी महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर सामूहिक रणनीति तैयार करना भी रहा।
अंगवस्त्र सम्मान के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों के स्वागत से हुई। शिवभक्त एवं समाजसेवी प्रेमचन्द जी द्वारा अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात संवाद सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें वक्ताओं ने धाम के इतिहास, मान्यताओं और विकास की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
स्वयंभू बाबा धाम के महत्व पर जनप्रतिनिधियों की राय
मुख्य अतिथि उदयपुरा–2 पंचायत के मुखिया सह विधायक प्रतिनिधि सुजीत कुमार ने कहा कि स्वयंभू बाबा धाम अति प्राचीन स्थल है, जिसकी उत्पत्ति का काल अनुमान से परे है। उन्होंने कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
मुखिया सह विधायक प्रतिनिधि सुजीत कुमार ने कहा:
“अब समय आ गया है कि सभी ग्रामीण एकजुट होकर विधायक और सांसद के माध्यम से इस धाम के समुचित विकास और इसे पर्यटन स्थल घोषित कराने की मांग करें।”
उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में सामूहिक प्रयास हो, तो स्वयंभू बाबा धाम पूरे क्षेत्र की पहचान बन सकता है।
सप्तधारा कुंड को बताया दैवीय और दुर्लभ
नवगढ़ पंचायत के मुखिया पायनियर पांडे ने कहा कि पिछुलिया धाम पहले से एक तीर्थ स्थल है, लेकिन इसकी महिमा और विशेषताएं अब तक आम लोगों तक नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने सप्तधारा कुंड को दैवीय और प्राकृतिक आश्चर्य बताते हुए कहा कि यहां से निरंतर स्वयंभू शिवलिंग का जलाभिषेक होना अपने आप में अद्भुत है।
प्रतिनिधित्व को बताया सुनहरा अवसर
गोइंदी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि लालमुनि राम ने कहा कि वर्तमान में इस क्षेत्र से जुड़े मुखिया विधायक प्रतिनिधि भी हैं और सांसद प्रतिनिधि भी। यह स्वयंभू बाबा धाम के विकास के लिए सुनहरा अवसर है, जिसे सभी को मिलकर सार्थक बनाना चाहिए।
बुजुर्गों की स्मृतियों में भी जीवंत है धाम
पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी नरेश सिंह ने कहा कि पिछुलिया धाम की शुरुआत स्वयं शिव ही जानते हैं। उन्होंने बताया कि वे 82 वर्ष के हैं और बचपन से यहां लगने वाले मेले को देखते आ रहे हैं, इसके बावजूद धाम का समुचित विकास न होना आश्चर्यजनक है।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में जिला परिषद प्रतिनिधि बहादुर साव, उप प्रमुख अजय सिंह, दूब पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि यशवंत कुमार, नंदू राम, बचनदेव सिंह, प्रदीप पाठक, रीना देवी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभी ने एकमत से कहा कि स्वयंभू बाबा धाम क्षेत्र का प्राचीन आस्था केंद्र है और धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है।
सप्तधारा अमृत कुंड और स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन
संबोधन के उपरांत उपस्थित जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सप्तधारा अमृत कुंड का दर्शन किया। बताया गया कि यह कुंड कभी सूखता नहीं और इसका जल अत्यंत निर्मल व स्वादिष्ट है। कुंड को अस्थायी रूप से खाली कर श्रद्धालुओं को सप्तधारा के प्रत्यक्ष दर्शन कराए गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कुंड से सात धाराओं में जल प्रवाहित होता है, जिन्हें गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, सिंधु और कावेरी का प्रतीक माना जाता है।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने जल में अवस्थित स्वयंभू शिवलिंग का दर्शन किया। मान्यता है कि यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट है और सदैव जलाभिषेक में स्थित रहता है।
पिकनिक और प्रसाद के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में पिछुलिया मंदिर समिति ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसहयोग से बाबा धाम के विकास को नई दिशा दी जाएगी। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर बाबा का प्रसाद ग्रहण किया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
इस अवसर पर विकर्मा सिंह, अशोक सिंह, नवीन सिंह, उमेश सिंह, प्रेमचंद विश्वकर्मा, रामनंदन प्रजापति, बबलू दुबे, भोला भुइया, मंगल भुइयां, अर्जुन सिंह, नकुल सिंह, पंचम सिंह, अरविंद सिंह, संतोष सिंह, उदय सिंह, भोला पाठक, योगेंद्र पाठक, तेतर साव, सूर्यानंद विश्वकर्मा, भास्कर पाठक, शंभू राम, जगदीश भुइया सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
न्यूज़ देखो: आस्था और विकास का संगम
स्वयंभू बाबा धाम पिछुलिया में हुआ यह आयोजन दर्शाता है कि आस्था के केंद्र केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और क्षेत्रीय विकास का माध्यम भी बन सकते हैं। यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर पहल करें, तो यह धाम धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। अब देखना होगा कि विकास की मांग पर आगे क्या ठोस कदम उठते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जब आस्था बने विकास की राह
धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास सामूहिक जिम्मेदारी है। स्वयंभू बाबा धाम जैसे प्राचीन स्थलों को पहचान और सम्मान दिलाना हम सभी का दायित्व है। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में रखें और क्षेत्रीय धरोहरों के संरक्षण की आवाज को मजबूत बनाएं। आपकी सहभागिता ही बदलाव की असली ताकत है।





