
#पलामू #पाटन #रविदास_जयंती : कुंदरी गांव में संत रविदास जयंती पर सांस्कृतिक आयोजन और विचार गोष्ठी हुई।
पाटन प्रखंड के पाल्हे पंचायत अंतर्गत ग्राम कुंदरी में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं एवं माता रमाबाई जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परिषद सदस्य जयशंकर कुमार सिंह उर्फ संग्राम सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने गुरु रविदास के विचारों को 21वीं सदी में भी मार्गदर्शक बताया। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
- ग्राम कुंदरी में गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- उद्घाटन जिला परिषद सदस्य जयशंकर कुमार सिंह उर्फ संग्राम सिंह ने किया।
- संग्राम सिंह ने कहा गुरु रविदास के विचार आज भी प्रासंगिक।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता देवनाथ राम, संचालन प्रकाश कुमार रवि ने किया।
- आयोजन में सैकड़ों ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद।
- पाटन प्रखंड के अन्य गांवों में भी जयंती कार्यक्रमों में शामिल हुए संग्राम सिंह।
पाटन प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती को लेकर उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इसी कड़ी में 7 फरवरी 2026 की शाम पाल्हे पंचायत के ग्राम कुंदरी में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।
समारोह का भव्य आयोजन
ग्राम कुंदरी में आयोजित इस कार्यक्रम में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के साथ-साथ माता रमाबाई जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य जयशंकर कुमार सिंह (संग्राम सिंह) ने किया। आयोजन स्थल पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु रविदास के जीवन और उनके संदेशों को जनमानस तक पहुंचाया गया।
संग्राम सिंह का प्रेरक संबोधन
मुख्य अतिथि संग्राम सिंह ने अपने संबोधन में कहा:
संग्राम सिंह ने कहा: “संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के विचार केवल पढ़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। उनके विचार 21वीं सदी के लिए भी उतने ही प्रासंगिक और प्रबोधनकारी हैं।”
उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने समाज को समानता, भाईचारे और कर्म की महत्ता का संदेश दिया, जो आज के समय में और भी जरूरी हो गया है। संग्राम सिंह ने युवाओं से विशेष रूप से गुरु रविदास के आदर्शों को अपनाने की अपील की।
सामाजिक समरसता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास ने जाति-भेद और ऊंच-नीच के खिलाफ आवाज उठाई और एक समतामूलक समाज की कल्पना की। उनके विचार आज भी समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता देवनाथ राम ने की, जबकि प्रकाश कुमार रवि ने सचिव के रूप में आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। सुरेंद्र राम ने कोषाध्यक्ष के रूप में कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। आयोजन समिति के सदस्यों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मिलकर कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाया।
ये रहे कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग
कार्यक्रम में राजेंद्र राम, कुंदन कुमार, गुड्डू कुमार, रविंद्र कुमार रवि, सुरेश राम, जगरनाथ राम, बाबूलाल राम, मुरारी राम, श्रीकांत पांडेय, आशुतोष पांडेय, गौतम पांडेय सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने गुरु रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
अन्य गांवों में भी जयंती कार्यक्रमों में सहभागिता
ज्ञात हो कि कुंदरी के अलावा बीते दिनों में पाटन प्रखंड के अन्य इलाकों में भी गुरु रविदास जी की जयंती को लेकर भव्य आयोजन किए गए। सतौवा पंचायत के ग्राम सतहे और केल्हार पंचायत के जोड़ाकला में आयोजित कार्यक्रमों में भी संग्राम सिंह ने भाग लिया और लोगों को संत रविदास के विचारों से अवगत कराया।
ग्रामीणों में उत्साह और श्रद्धा
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, भजन और विचार गोष्ठी के माध्यम से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया गया। ग्रामीणों ने ऐसे आयोजनों को सामाजिक एकता के लिए आवश्यक बताया।
न्यूज़ देखो: विचारों से बनता है मजबूत समाज
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम बताता है कि सामाजिक चेतना आज भी उनके विचारों से प्रेरणा ले रही है। जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से ऐसे आयोजनों को नई ऊर्जा मिलती है। सवाल यह है कि क्या हम इन विचारों को केवल मंच तक सीमित रखेंगे या जीवन में भी अपनाएंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विचार अपनाएं, तभी जयंती सार्थक होगी
संत रविदास ने जिस समरस और समान समाज का सपना देखा था, उसे साकार करना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है। केवल आयोजन नहीं, बल्कि विचारों का व्यवहार में उतरना जरूरी है।
आपके क्षेत्र में ऐसे आयोजनों का क्या असर पड़ता है, अपनी राय साझा करें। इस खबर को आगे बढ़ाएं, चर्चा का हिस्सा बनें और सामाजिक एकता के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।



