ददई दुबे का निधन झारखंड, बिहार के लिए अपूरणीय क्षति: मिथिलेश ठाकुर

ददई दुबे का निधन झारखंड, बिहार के लिए अपूरणीय क्षति: मिथिलेश ठाकुर

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #ददईदुबेनिधन : पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने दिवंगत चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई बाबा को बताया गरीबों का मसीहा — विचारों और सिद्धांतों से प्रेरित जीवन को दी श्रद्धांजलि
  • झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने ददई दुबे के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की
  • उन्हें बताया गया गरीबों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला अजातशत्रु नेता
  • ददई दुबे को जनमानस का प्रेरणास्रोत और सिद्धांतवादी बताया गया
  • शोक संदेश में उनके विचारों को अपनाने की अपील की गई
  • झामुमो की ओर से दी गई श्रद्धांजलि और अंतिम विदाई का सम्मान

पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने जताया गहरा शोक

गढ़वा: पलामू प्रमंडल के वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे के निधन पर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि “स्वर्गीय ददई दुबे मेरे अभिभावक समान थे, उनका यूं अचानक चले जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।”

मिथिलेश ठाकुर ने कहा: “ददई दुबे झारखंड और बिहार की राजनीति के एक ऐसे स्तंभ थे, जिनकी भरपाई संभव नहीं है। वे न केवल एक नेता थे, बल्कि जनमानस के प्रेरणा स्रोत भी थे।”

गरीबों के लिए हमेशा रहे समर्पित

मिथिलेश ठाकुर ने उन्हें गरीबों का मसीहा और सिद्धांतवादी नेता बताते हुए कहा कि ददई दुबे किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से कभी नहीं कतराते थे। वे हमेशा गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के हक-अधिकार की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ते थे। चाहे ग्रामसभा हो या विधानसभा या फिर संसद, उन्होंने जनता के मुद्दों पर सरकार से सीधा टकराव किया।

जनमानस में रचा-बसा नाम

श्री ठाकुर ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि ददई दुबे का व्यक्तित्व बेमिसाल था। वे किसी पद के लोभ में कभी नहीं झुके, और जनहित को सर्वोपरि मानने वाले कर्मठ नेता थे। उनके अनुसार, “आज भी पलामू प्रमंडल की जनता उन्हें अजातशत्रु मानती है, जिनके जैसे राजनेता अब शायद ही देखने को मिलें।”

झामुमो की ओर से अर्पित की श्रद्धांजलि

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से भी पूर्व मंत्री ने ददई दुबे को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पार्टी हमेशा उनके विचारों और मूल्यों पर चलने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि “ददई दुबे के सिद्धांतों और संघर्षों को आत्मसात करें और समाज सेवा के पथ पर आगे बढ़ें।”

न्यूज़ देखो: संघर्षशील राजनीति का एक उजला अध्याय समाप्त

ददई दुबे जैसे नेता केवल राजनीति नहीं करते, वे समाज को दिशा देते हैं। उनका जीवन संघर्ष, सादगी और जनकल्याण का प्रतीक रहा। ‘न्यूज़ देखो’ मानता है कि ऐसे नेताओं की स्मृति में जनहित के संकल्पों को न भूलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

श्रद्धा, संघर्ष और सिद्धांत की प्रेरणा

ददई दुबे की जीवन यात्रा हमें सिखाती है कि सच्चा नेतृत्व वहीं होता है, जो पद नहीं, प्रजा के दर्द को समझे। आइए हम सभी उनके विचारों को साझा करें, इस श्रद्धांजलि को आगे बढ़ाएं और अपने बच्चों को ऐसे नेता के बारे में जरूर बताएं।

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गढ़वा

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