डंडई: रारो गांव में आम बगवानी उखाड़कर खेत पर जबरन कब्जा, पीड़ित ने एसडीओ से लगाई न्याय की गुहार

डंडई: रारो गांव में आम बगवानी उखाड़कर खेत पर जबरन कब्जा, पीड़ित ने एसडीओ से लगाई न्याय की गुहार

author Shashi Bhushan Mehta
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#गढ़वा #जमीन_विवाद : रारो गांव के किसान उमेश यादव ने अनुमंडल पदाधिकारी से की शिकायत, कई ग्रामीणों पर लगाया जबरन कब्जे का आरोप
  • रारो गांव के किसान उमेश यादव ने खेत कब्जा और बगवानी नुकसान की शिकायत की।
  • आरोपियों में धर्मेंद्र यादव, वीरेंद्र यादव, प्रकाश यादव, बलराम यादव शामिल।
  • 0.25 डिसमिल जमीन पर की गई आम बगवानी को उखाड़ फेंका गया।
  • विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप।
  • पीड़ित ने गढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की।

गढ़वा अनुमंडल क्षेत्र के रारो गांव में एक किसान ने अपने खेत में जबरन कब्जा और आम बगवानी को नुकसान पहुँचाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित किसान उमेश यादव (पिता रामखेलावन यादव) ने अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

उमेश यादव ने बताया कि उनके पिता के हिस्से में 0.25 डिसमिल जमीन है, जिस पर उन्होंने मेहनत से आम के पौधे लगाए थे। लेकिन गांव के ही धर्मेंद्र यादव, वीरेंद्र यादव (पिता रामचंद्र यादव), प्रकाश यादव और बलराम यादव समेत कई लोगों ने मिलकर खेत को तार से घेर लिया और बगवानी को उखाड़ फेंका।

आवेदक के अनुसार, आरोपियों ने उनके हिस्से की जमीन पर जबरन खेती करने का प्रयास किया और जब उन्होंने विरोध किया, तो मारपीट की धमकी दी गई। यह विवाद खाता संख्या 5, प्लॉट संख्या 2116 से संबंधित है, जिसमें उमेश यादव का 0.75 डिसमिल हिस्सा बताया गया है।

पीड़ित किसान का कहना है कि उनके परिवार को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस जमीन पर उनके परिवार का वैध स्वामित्व है, फिर भी दबंग किस्म के लोग बार-बार कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

उमेश यादव ने गढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी से अनुरोध किया है कि इस मामले की तात्कालिक जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में किसी अन्य किसान के साथ ऐसी घटना न हो।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण विवादों में प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी

यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में भूमि विवाद और जबरन कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर त्वरित जांच और सख्त कार्रवाई से ही ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सकती है। छोटे किसानों की मेहनत और जीविका को बचाना स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

न्याय की उम्मीद और सामाजिक जागरूकता

ग्रामीणों को अपने अधिकारों और कानूनी उपायों की जानकारी होनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति उनके परिश्रम का दुरुपयोग न कर सके। समाज को भी ऐसे मामलों में पीड़ित के साथ खड़ा होना चाहिए। आप भी अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस खबर को आगे बढ़ाकर न्याय की आवाज़ बनें।

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Written by

डंडई, गढ़वा

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