
#गिरिडीह #विकास_समीक्षा : तीनों नगर निकायों में योजनाओं की प्रगति पर डीसी ने अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश।
गिरिडीह जिले के तीनों नगर निकायों में चल रही विकास योजनाओं की जिला उपायुक्त रामनिवास यादव ने सोमवार को गहन समीक्षा की। बैठक में जलापूर्ति, पाइपलाइन विस्तार और अन्य आधारभूत कार्यों की प्रगति पर विशेष रूप से चर्चा हुई। उपायुक्त ने लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। समीक्षा का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में समयबद्ध, पारदर्शी और जनहितकारी विकास को गति देना है।
- जिला उपायुक्त रामनिवास यादव ने नगर निकायों की योजनाओं की समीक्षा की।
- नगर निगम गिरिडीह, नगर पंचायत बड़की सरैया और नगर पंचायत धनवार शामिल।
- जलापूर्ति व्यवस्था और पाइपलाइन विस्तार की प्रगति पर फोकस।
- लंबित योजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने का निर्देश।
- गुणवत्ता में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी।
गिरिडीह जिले में शहरी विकास योजनाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता तेज हो गई है। इसी क्रम में जिला उपायुक्त श्री रामनिवास यादव ने जिले के तीनों नगर निकायों—नगर निगम गिरिडीह, नगर पंचायत बड़की सरैया और नगर पंचायत धनवार—में संचालित विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि जमीन पर योजनाओं की वास्तविक प्रगति क्या है और किन कारणों से कुछ कार्य अब तक लंबित हैं। उपायुक्त ने स्पष्ट संकेत दिए कि विकास कार्यों में देरी अब स्वीकार्य नहीं होगी।
किन नगर निकायों की हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में जिले के तीनों प्रमुख शहरी निकायों को शामिल किया गया।
इनमें नगर निगम गिरिडीह, नगर पंचायत बड़की सरैया और नगर पंचायत धनवार शामिल हैं। उपायुक्त ने तीनों निकायों में अलग-अलग चल रही योजनाओं की स्थिति की जानकारी ली और यह भी देखा कि किस निकाय में किन योजनाओं पर अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है। बैठक का फोकस केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी हकीकत पर आधारित समीक्षा पर जोर दिया गया।
जलापूर्ति और पाइपलाइन कार्यों पर विशेष जोर
बैठक के दौरान जलापूर्ति व्यवस्था, पाइपलाइन विस्तार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। उपायुक्त ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी पूछा कि किन इलाकों में अभी भी जलापूर्ति से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
नियमित निरीक्षण और आपसी समन्वय के निर्देश
जिला उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विकास योजनाओं का नियमित स्थल निरीक्षण किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभागों के बीच बेहतर आपसी समन्वय के बिना योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकतीं। इसलिए संबंधित विभाग आपस में तालमेल बनाकर कार्य करें, ताकि किसी एक विभाग की ढिलाई के कारण पूरी योजना प्रभावित न हो।
लंबित योजनाओं पर सख्त रुख
समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि योजनाओं में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए अब हर योजना के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और उसी के अनुसार कार्य आगे बढ़ाया जाए।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
उपायुक्त रामनिवास यादव ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि निर्माण सामग्री से लेकर कार्य निष्पादन तक सभी मानकों का पालन हो।
पारदर्शिता और जनहित पर बल
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि शहरी क्षेत्रों में चल रही सभी विकास योजनाएं पारदर्शिता, समयबद्धता और जनहित को ध्यान में रखकर पूरी की जाएं। उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल आंकड़े पूरे करना नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाना है। इसी सोच के साथ काम करने की जरूरत है।
प्रशासन को है सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
प्रशासनिक स्तर पर यह भरोसा जताया गया कि इस समीक्षा बैठक के बाद विकास कार्यों में तेजी आएगी। नगर निकायों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने से योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होगा और शहरी जनता को बुनियादी सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा। अधिकारियों को यह भी कहा गया कि वे फील्ड स्तर की समस्याओं को समय पर उच्च स्तर तक पहुंचाएं, ताकि समाधान में देरी न हो।
न्यूज़ देखो: शहरी विकास पर प्रशासन की जवाबदेही
यह समीक्षा बैठक दर्शाती है कि जिला प्रशासन शहरी विकास को लेकर गंभीर है और योजनाओं की प्रगति पर सीधी नजर रखना चाहता है। लंबित कार्यों पर सख्त रुख यह संकेत देता है कि अब जवाबदेही तय होगी। सवाल यह है कि दिए गए निर्देश जमीन पर कितनी तेजी और ईमानदारी से लागू होते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजबूत शहर, जागरूक नागरिक
शहरों का विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की सजगता से भी जुड़ा होता है। जब योजनाएं समय पर और गुणवत्तापूर्ण पूरी हों, तभी उनका वास्तविक लाभ समाज तक पहुंचता है। ऐसे में प्रशासन की सख्ती और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं।
आप अपने क्षेत्र की विकास योजनाओं पर नजर रखें और समस्याओं को जिम्मेदार मंचों तक पहुंचाएं। इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें, लेख को आगे बढ़ाएं और शहरी विकास से जुड़ी जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।

