Dumka

इलाज के रास्ते में मौत, एंबुलेंस लापरवाही के आरोप से जामा क्षेत्र में आक्रोश

#दुमका #सड़क_हादसा : रेफर के दौरान एंबुलेंस में युवक की मौत—परिजनों ने चालक पर गंभीर आरोप लगाए।

दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद इलाज के लिए ले जाए जा रहे एक युवक की एंबुलेंस में ही मौत हो गई। मृतक की पहचान 25 वर्षीय राधेश्याम मांझी के रूप में हुई है, जो दुमका–भागलपुर स्टेट हाईवे पर हुए हादसे में घायल हुआ था। परिजनों ने एंबुलेंस चालक पर रास्ते में गाड़ी रोककर भोजन करने का आरोप लगाया है, जिससे इलाज में देरी हुई। घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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  • राधेश्याम मांझी (25) की रेफर के दौरान एंबुलेंस में मौत।
  • जामा थाना क्षेत्र, दुमका–भागलपुर स्टेट हाईवे पर हुआ था सड़क हादसा।
  • परिजनों का आरोप—एंबुलेंस चालक ने रास्ते में नाश्ता-भोजन के लिए गाड़ी रोकी
  • गांव में शोक और आक्रोश, दोषियों पर कार्रवाई व मुआवजे की मांग।
  • जामा क्षेत्र में ही दूसरे हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल।

दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल युवक की इलाज के रास्ते में ही मौत हो गई। दुमका–भागलपुर स्टेट हाईवे पर हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल राधेश्याम मांझी (25) को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया था। परंतु अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में उसकी सांसें थम गईं। इस घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ था युवक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जामा थाना क्षेत्र अंतर्गत दुमका–भागलपुर स्टेट हाईवे पर राधेश्याम मांझी सड़क हादसे का शिकार हो गया था। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसे प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर कर दिया।
परिजनों को उम्मीद थी कि समय रहते बेहतर इलाज मिलने से उसकी जान बचाई जा सकेगी, लेकिन रास्ते में ही दुखद घटना घट गई।

एंबुलेंस चालक पर गंभीर आरोप

मृतक के परिजनों ने एंबुलेंस चालक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एंबुलेंस चालक ने मरीज की नाजुक हालत के बावजूद रास्ते में गाड़ी रोककर होटल में नाश्ता और भोजन किया।
परिजनों का आरोप है कि इस वजह से इलाज में अनावश्यक देरी हुई और राधेश्याम की हालत और बिगड़ गई, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है और वे इसे सीधी लापरवाही मान रहे हैं।

गांव में शोक और आक्रोश का माहौल

युवक की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल है। साथ ही, एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गुस्सा भी साफ नजर आ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से दोषी एंबुलेंस चालक और संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी मांग उठ रही है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

परिजनों का कहना है कि यदि समय पर और जिम्मेदारी के साथ एंबुलेंस सेवा दी जाती, तो राधेश्याम की जान बच सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाहियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

जामा क्षेत्र में एक और सड़क हादसा

इसी बीच जामा थाना क्षेत्र में भुरभुरी के पास एक और सड़क हादसा सामने आया है। यहां एक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।
घायल महिला को तत्काल फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल, दुमका भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है। इस घटना ने क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं और आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही की शिकायतें यह दर्शाती हैं कि सिस्टम में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।
विशेष रूप से एंबुलेंस जैसी जीवन रक्षक सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

न्यूज़ देखो: लापरवाही बन रही जानलेवा

यह मामला बताता है कि सड़क हादसे के बाद सिर्फ अस्पताल पहुंचना ही नहीं, बल्कि रास्ते में मिलने वाली सेवा भी उतनी ही अहम होती है। एंबुलेंस सेवा में थोड़ी सी लापरवाही किसी की जान ले सकती है। प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। सवाल यह भी है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

समय पर इलाज, सुरक्षित जीवन—सिस्टम को जवाबदेह बनाना जरूरी

हर जीवन की कीमत अनमोल है और आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
ऐसी घटनाएं हमें सिस्टम की कमियों से रूबरू कराती हैं।
जरूरी है कि नागरिक और प्रशासन मिलकर जवाबदेही तय करें।
आपकी राय इस मामले में क्या है, कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जिम्मेदार व्यवस्था की मांग को मजबूती दें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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