#सिमडेगा #सामाजिकसरोकारीमुद्दा : बच्चों की सुरक्षित बरामदगी में भूमिका के बावजूद प्रेस कांफ्रेंस में नाम न आने पर विहिप ने नाराजगी जताई।
रांची से लापता हुए दो बच्चों की सुरक्षित बरामदगी के मामले में बजरंग दल कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज किए जाने का आरोप सामने आया है। रामगढ़ जिले के चितरपुर थाना क्षेत्र से बच्चों की रिकवरी के बाद आयोजित पुलिस प्रेस कांफ्रेंस में इस योगदान का उल्लेख नहीं किया गया। इसे लेकर विश्व हिंदू परिषद ने असंतोष जताते हुए इसे कार्यकर्ताओं के मनोबल को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया। विहिप ने सरकार से मांग की है कि बच्चों की खोज में अहम भूमिका निभाने वाले युवाओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए।
- रांची से अंश और अंशिका नामक दो बच्चे 12 दिन पूर्व हुए थे लापता।
- रामगढ़ जिले के चितरपुर थाना क्षेत्र से बच्चों की सकुशल बरामदगी।
- बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों का पता लगाकर पुलिस को दी गई सूचना।
- पुलिस प्रेस कांफ्रेंस में बजरंग दल की भूमिका का उल्लेख नहीं किए जाने पर विवाद।
- विहिप जिला मंत्री कृष्णा शर्मा ने जताई कड़ी नाराजगी।
- सरकार से कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने की मांग।
राजधानी रांची से लापता हुए दो मासूम बच्चों की सुरक्षित बरामदगी के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। जहां एक ओर बच्चों के सकुशल मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली, वहीं दूसरी ओर खोज अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को श्रेय न मिलने पर असंतोष पनप रहा है। विश्व हिंदू परिषद ने इसे केवल एक अनदेखी नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता को हतोत्साहित करने वाला कदम बताया है।
12 दिनों तक चली बच्चों की तलाश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची से अंश और अंशिका नामक दो बच्चे लगभग 12 दिन पूर्व लापता हो गए थे। बच्चों के लापता होने की सूचना मिलते ही झारखंड पुलिस के साथ-साथ अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियां भी उनकी तलाश में जुट गई थीं। यह मामला संवेदनशील होने के कारण राज्य स्तर पर भी लगातार निगरानी में रखा जा रहा था। लंबे प्रयासों के बाद अंततः बच्चों को रामगढ़ जिले के चितरपुर थाना क्षेत्र से सकुशल बरामद किया गया।
बजरंग दल कार्यकर्ताओं की भूमिका का दावा
बच्चों की बरामदगी के बाद आयोजित पुलिस प्रेस कांफ्रेंस में पूरी कार्रवाई का श्रेय पुलिस को दिया गया। इसी को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने आपत्ति जताई है। विहिप के जिला मंत्री कृष्णा शर्मा ने बताया कि इस मामले में बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि चितरपुर निवासी बजरंग दल के कार्यकर्ता सचिन प्रजापति, बबलू साहू और सचिन कुमार ने सबसे पहले बच्चों का पता लगाया और तत्पश्चात पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस द्वारा कार्रवाई करते हुए बच्चों की रिकवरी संभव हो सकी। बावजूद इसके, राज्य स्तर पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इन कार्यकर्ताओं के योगदान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
मनोबल तोड़ने वाला रवैया बताया
विहिप जिला मंत्री कृष्णा शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह रवैया सामाजिक कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने वाला है।
कृष्णा शर्मा ने कहा: “बजरंग दल के कार्यकर्ता किसी इनाम या पुरस्कार की अपेक्षा से काम नहीं करते, बल्कि सामाजिक दायित्व निभाने के लिए सक्रिय रहते हैं। इसके बावजूद उनके योगदान को नजरअंदाज करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड पुलिस और सरकार को ऐसे मामलों में युवाओं और सामाजिक संगठनों का हौसला बढ़ाना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत पूरा श्रेय स्वयं लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने इसे सरकार की मानसिकता को दर्शाने वाला कदम बताया।
सामाजिक सहभागिता को मान्यता देने की मांग
विहिप का कहना है कि आज के समय में जब समाज और प्रशासन के बीच समन्वय की बात होती है, ऐसे मामलों में नागरिक सहयोग को सम्मान देना बेहद जरूरी है। संगठन का मानना है कि यदि समाज के युवाओं को उनके सकारात्मक प्रयासों के लिए मान्यता नहीं मिलेगी, तो आगे चलकर सामाजिक सहभागिता कमजोर हो सकती है।
सरकार से सम्मान की मांग
विश्व हिंदू परिषद ने राज्य सरकार से स्पष्ट मांग की है कि इस घटना में अहम भूमिका निभाने वाले बजरंग दल के युवाओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और अन्य युवाओं को भी सामाजिक कार्यों में आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।
कृष्णा शर्मा ने कहा: “सरकार को चाहिए कि ऐसे युवाओं को सम्मानित कर यह संदेश दे कि समाजहित में किए गए प्रयासों की कद्र की जाती है।”
न्यूज़ देखो: श्रेय की राजनीति बनाम सामाजिक जिम्मेदारी
यह मामला केवल श्रेय देने या न देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और समाज के बीच भरोसे का भी सवाल खड़ा करता है। बच्चों की सुरक्षित बरामदगी में यदि सामाजिक संगठनों की भूमिका रही है, तो उसका उल्लेख करना पारदर्शिता और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। वहीं, अनदेखी से समाज में नकारात्मक संदेश जाता है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।
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सम्मान से बढ़ता है भरोसा, सहयोग से बनता है सुरक्षित समाज
जब समाज और प्रशासन साथ मिलकर काम करते हैं, तभी संकट का समाधान संभव होता है। ऐसे में हर सकारात्मक प्रयास को पहचान और सम्मान मिलना जरूरी है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, बल्कि समाज में सहभागिता की भावना भी मजबूत होती है।





