
#गिरिडीह #डिप्टीमेयरचुनाव : नए नियम और विलंबित प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता तथा निष्पक्षता पर उठे सवाल।
नगर निगम चुनाव के बाद अब डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर गिरिडीह में राजनीतिक और जनचर्चा तेज हो गई है। इस बार डिप्टी मेयर का चुनाव वार्ड पार्षदों के वोट से होना है, जिससे प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। भाकपा माले के राजेश सिन्हा ने चुनाव में देरी और नए प्रावधान को हॉर्स ट्रेडिंग की संभावना बढ़ाने वाला बताया है। उन्होंने प्रशासन, जनता और नवनिर्वाचित वार्ड पार्षदों से पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की है।
- नगर निगम चुनाव के बाद अब डिप्टी मेयर चुनाव प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज।
- इस बार वार्ड पार्षदों के वोट से डिप्टी मेयर का चुनाव, पहले जनता सीधे चुनती थी।
- भाकपा माले के राजेश सिन्हा ने देरी को बताया हॉर्स ट्रेडिंग की संभावना बढ़ाने वाला।
- गिरिडीह डीसी रामनिवास यादव ने ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
- 36 वार्ड पार्षदों में से 32 से पूछताछ की मांग, पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील।
नगर निगम चुनाव के बाद अब गिरिडीह में डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नए नियम के तहत इस बार डिप्टी मेयर का चुनाव जनता द्वारा सीधे नहीं बल्कि वार्ड पार्षदों के वोट के आधार पर होना है। इसी बीच चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी और संभावित राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने इस व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हॉर्स ट्रेडिंग जैसी स्थितियों की संभावना बढ़ सकती है और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है।
नए नियम से बदली डिप्टी मेयर चुनाव की प्रक्रिया
नगर निगम चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब डिप्टी मेयर के चयन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस बार नियम में बदलाव के कारण डिप्टी मेयर का चुनाव वार्ड पार्षदों के मतदान से किया जाएगा, जबकि पिछले चुनाव में जनता सीधे डिप्टी मेयर का चुनाव करती थी।
इसी बदलाव के कारण राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि कई वार्ड पार्षद एक-दूसरे से मुलाकात कर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। शहर में यह चर्चा भी है कि कुछ संभावित प्रत्याशी लगातार पार्षदों से संपर्क कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि इस तरह की चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नगर निगम क्षेत्र में इसको लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।
भाकपा माले के राजेश सिन्हा ने उठाए सवाल
भाकपा माले के नेता राजेश सिन्हा ने इस पूरे मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डिप्टी मेयर का चुनाव पहले की तरह सीधे जनता के माध्यम से ही होना चाहिए था। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था में देरी होने से अनावश्यक राजनीतिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
राजेश सिन्हा ने कहा: “जैसे पहले जनता सीधे डिप्टी मेयर का चुनाव करती थी, उसी प्रकार से यह अधिकार जनता के पास रहना चाहिए था। चुनाव प्रक्रिया में देरी से हॉर्स ट्रेडिंग जैसी संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।”
उन्होंने कहा कि यदि 36 वार्ड पार्षदों में से अधिकांश से पारदर्शी तरीके से पूछताछ या बातचीत की जाए तो कई बातें सामने आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह विषय जांच का है और किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
प्रशासन की सतर्कता और कार्रवाई की चेतावनी
इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन भी सतर्क बताया जा रहा है। गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव ने मीडिया में बयान देते हुए कहा था कि यदि किसी प्रकार की अनुचित गतिविधि या अवैध दबाव की जानकारी सामने आती है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराई जाएगी। इसके लिए आवश्यक निगरानी भी की जा रही है।
संभावित दबाव और बैठकों को लेकर भी चर्चा
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कई जगह समूहों में बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों को लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं।
राजेश सिन्हा ने कहा कि यदि इस तरह की बैठकों की खबरें सामने आती हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक भी की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़े तो ऐसी बैठकों में शामिल लोगों के स्थान और गतिविधियों की भी जांच की जा सकती है।
सिन्हा ने चुनाव आयोग से भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जब तक डिप्टी मेयर चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक क्या राजनीतिक दलों द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम, सम्मान समारोह या बैठकों का आयोजन किया जा सकता है या नहीं, इस पर स्पष्टता होनी चाहिए।
अंतिम मुकाबले में दो प्रत्याशियों के बीच होने की संभावना
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार फिलहाल चार संभावित उम्मीदवारों की चर्चा हो रही है, लेकिन अंतिम समय में मुकाबला दो प्रमुख वार्ड पार्षदों के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यदि कोई अन्य प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरता है तो वह अपने व्यक्तिगत आधार पर ही चुनाव लड़ेगा।
कुछ राजनीतिक हलकों का मानना है कि पार्टियां ऐसे किसी भी उम्मीदवार को समर्थन देने से बच सकती हैं, जिससे लेन-देन या दबाव की राजनीति का आरोप लगे।
वार्ड विकास पर ध्यान देने की अपील
राजेश सिन्हा ने नवनिर्वाचित 36 वार्ड पार्षदों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने-अपने वार्ड के विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि वार्ड के उन उम्मीदवारों से भी संवाद बनाए रखना चाहिए जो चुनाव हार गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सभी मिलकर मोहल्ला स्तर पर क्लब या समितियां बनाकर काम करें तो वार्ड के विकास कार्यों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है।
पारदर्शी चुनाव के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
सिन्हा ने कहा कि यदि जिला प्रशासन और जिम्मेदार वार्ड पार्षद मिलकर सही रणनीति के साथ काम करें तो हॉर्स ट्रेडिंग जैसी संभावनाओं को पूरी तरह रोका जा सकता है। इसके लिए जनता, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर गलत गतिविधियों का विरोध करना होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर भाकपा माले संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन भी देने की तैयारी कर रही है।
न्यूज़ देखो: पारदर्शिता ही लोकतंत्र की असली ताकत
डिप्टी मेयर का चुनाव नगर निगम की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं तो प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता पूरी तरह सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि जनप्रतिनिधि स्वतंत्र और निष्पक्ष वातावरण में निर्णय ले सकें। आने वाले दिनों में प्रशासन की निगरानी और राजनीतिक दलों की भूमिका इस प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए सजग रहना जरूरी
लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव के बाद भी पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण होता है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि जनता का विश्वास कायम रहे।
अगर कहीं भी गलत गतिविधियों की आशंका दिखे तो समाज के जिम्मेदार नागरिकों को सजग रहना चाहिए और सही मंचों पर अपनी आवाज उठानी चाहिए। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।
आप इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। खबर को अपने दोस्तों और परिचितों तक साझा करें ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जागरूकता का संदेश फैल सके।






