
#लातेहार #मनरेगा_मजदूरी : महीनों से भुगतान लंबित, होली से पहले राशि जारी करने की मजदूरों और सामाजिक संगठनों की मांग।
लातेहार जिले में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को कई महीनों से मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं मिल पाया है। होली नजदीक होने के बावजूद मजदूरों के घरों में आर्थिक तंगी बनी हुई है। केंद्रांश की राशि लंबित रहने से परिवारों को रोजमर्रा के खर्च चलाने में कठिनाई हो रही है। सामाजिक संगठनों ने जल्द भुगतान की मांग उठाई है।
- लातेहार जिले के विभिन्न प्रखंडों में मनरेगा मजदूरी लंबित।
- राज्यांश की आंशिक राशि मिली, पर केंद्रांश भुगतान बाकी।
- होली से पहले मजदूरों के घरों में आर्थिक संकट गहराया।
- भीम आर्मी एकता मिशन झारखण्ड ने जताई चिंता।
- जिला अध्यक्ष जगजीवन राम ने जल्द भुगतान की मांग की।
लातेहार जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित मनरेगा योजना के तहत कार्यरत मजदूरों को मजदूरी भुगतान में हो रही देरी के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रंगों का त्योहार होली नजदीक है, लेकिन मजदूरों के चेहरों पर उत्साह की जगह चिंता और मायूसी दिखाई दे रही है।
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने नियमित रूप से कार्य किया, लेकिन कई महीनों से उनकी पूरी मजदूरी उनके खातों में नहीं पहुंची है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली राशि का कुछ हिस्सा मिल चुका है, लेकिन केंद्रांश की राशि अब भी लंबित है।
रोजमर्रा के खर्च चलाना हुआ मुश्किल
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा मजदूरी ही कई परिवारों की आय का मुख्य स्रोत है। भुगतान में देरी के कारण मजदूरों के सामने घर चलाना भी कठिन हो गया है।
कई मजदूरों ने बताया कि होली जैसे बड़े त्योहार के समय बच्चों के लिए नए कपड़े, रंग और आवश्यक सामान खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है।
एक मजदूर ने कहा:
“हमने समय पर काम किया, लेकिन मजदूरी नहीं मिली। त्योहार सामने है, फिर भी जेब खाली है।”
इस स्थिति ने मजदूर परिवारों की आर्थिक और मानसिक परेशानी दोनों बढ़ा दी है।
सामाजिक संगठन ने उठाई आवाज
इस मामले को लेकर भीम आर्मी एकता मिशन झारखण्ड के जिला अध्यक्ष जगजीवन राम ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मजदूरी भुगतान में लगातार हो रही देरी से मजदूरों में असंतोष बढ़ रहा है।
जगजीवन राम ने कहा: “यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो मजदूरों में निराशा और आक्रोश बढ़ सकता है। सरकार को तुरंत लंबित राशि जारी करनी चाहिए।”
उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की कि त्योहार से पहले मजदूरों के खातों में बकाया राशि भेजी जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकें।
प्रशासन से उम्मीद
मजदूरों को अब भी उम्मीद है कि होली से पहले यदि मजदूरी का भुगतान हो जाता है तो उनके घरों में भी खुशियों के रंग लौट सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजना ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है। यदि समय पर भुगतान न हो तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि भुगतान प्रक्रिया में आ रही तकनीकी या वित्तीय बाधाओं को शीघ्र दूर किया जाए।
त्योहार पर मायूसी का साया
होली जैसे त्योहार में जहां आमतौर पर गांवों में उत्सव और उल्लास का माहौल रहता है, वहीं इस बार कई मजदूर परिवारों में चिंता का माहौल है।
आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार जरूरी सामान खरीदने में असमर्थ हैं। ऐसे में मजदूरों की नजर अब सरकार और प्रशासन की ओर टिकी है।
न्यूज़ देखो: समय पर भुगतान से ही योजनाओं का उद्देश्य पूरा
मनरेगा जैसी योजना ग्रामीण गरीबों की आर्थिक सुरक्षा का आधार है। यदि मजदूरी समय पर नहीं मिले तो इसका सीधा असर परिवारों की आजीविका पर पड़ता है। त्योहार के समय यह परेशानी और गहरी हो जाती है। सरकार और प्रशासन को भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और तत्परता सुनिश्चित करनी होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों के सम्मान की रक्षा जरूरी
मेहनत का पूरा और समय पर भुगतान हर मजदूर का अधिकार है।
त्योहार की खुशियां तभी सार्थक हैं जब हर घर में मुस्कान हो।
आइए समय पर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था मजबूत करने की मांग को समर्थन दें।
ग्रामीण श्रमिकों की आवाज को मजबूत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
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