रेंगारीह काथलिक चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग: उपायुक्त को सौंपा गया मांग पत्र

रेंगारीह काथलिक चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग: उपायुक्त को सौंपा गया मांग पत्र

author Satyam Kumar Keshri
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#सिमडेगा #रेंगारीह_चर्च : श्रद्धालुओं की सुविधा और पर्यटन विकास के लिए मूलभूत सुविधाओं की मांग।

सिमडेगा जिले के रेंगारीह काथलिक चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग को लेकर चर्च के प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने चर्च परिसर में पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मांग पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। उपायुक्त ने मांगों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया।

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  • सिमडेगा के रेंगारीह काथलिक चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग।
  • चर्च प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त को सौंपा मांग पत्र
  • परिसर में पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और शेड युक्त चबूतरा बनाने की मांग।
  • श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सौंदर्यीकरण पर भी जोर।
  • प्रतिनिधिमंडल में अजय एक्का, फा. एलभियुस केरकेट्टा, एस. पीटर लकड़ा, जेरोम मिंज सहित कई सदस्य मौजूद।

सिमडेगा जिले के रेंगारीह स्थित काथलिक चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। चर्च से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त से मुलाकात कर चर्च परिसर में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा।

प्रतिनिधियों ने बताया कि रेंगारीह काथलिक चर्च धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन वर्तमान में यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए कई आवश्यक सुविधाओं का अभाव है।

मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को दिए गए मांग पत्र में चर्च परिसर में कई जरूरी सुविधाओं के विकास की मांग की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां पेयजल, शौचालय और समुचित प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्यक है।

इसके साथ ही चर्च परिसर में शेड युक्त चबूतरा बनाने और परिसर के सौंदर्यीकरण की भी मांग की गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि इन सुविधाओं के अभाव में यहां आने वाले लोगों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि चर्च परिसर में नियमित रूप से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। चूंकि यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

प्रतिनिधियों के अनुसार यदि इन मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाता है तो यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहेगा बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन से स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि रेंगारीह काथलिक चर्च का विकास होने से क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान मिल सकती है। यदि यहां आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो अधिक संख्या में पर्यटक यहां पहुंचेंगे।

इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि चर्च परिसर का समुचित विकास किया जाए तो यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

उपायुक्त ने संबंधित विभागों को दिए निर्देश

जिला उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों को आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि मामले का परीक्षण कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने चर्च परिसर के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की और प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा जताई।

प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद

उपायुक्त से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर ठेठईटांगर पश्चिमी जिला परिषद सदस्य अजय एक्का, काथलिक चर्च रेंगारीह के पल्ली पुरोहित फा. एलभियुस केरकेट्टा, एस. पीटर लकड़ा, जेरोम मिंज सहित चर्च से जुड़े कई सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

इन सभी ने चर्च परिसर के विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई।

न्यूज़ देखो: आस्था और पर्यटन को जोड़ने की पहल

रेंगारीह काथलिक चर्च को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग यह दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों के विकास से क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। यदि यहां मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाता है तो यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक होगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पर्यटन विकास से बढ़ेगा क्षेत्र का सम्मान

धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और विकास किसी भी क्षेत्र की पहचान को मजबूत करता है। यदि इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया जाए तो इससे पर्यटन के नए अवसर भी पैदा होते हैं।

ऐसे प्रयासों से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होती है। इसलिए जरूरी है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसे स्थलों के विकास के लिए आगे आएं।

यदि आप भी मानते हैं कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का विकास होना चाहिए, तो अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें। इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि पर्यटन और आस्था के इस प्रयास को व्यापक समर्थन मिल सके।

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सिमडेगा नगर क्षेत्र

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