
#मेदिनीनगर #पर्यटन_विकास : ऐतिहासिक भवन को नया स्वरूप देने का आग्रह।
निवर्तमान उपमहापौर राकेश कुमार सिंह (मंगल सिंह) ने पलामू के उपायुक्त को लिखित पत्र देकर पुराने समाहरणालय भवन के संरक्षण की मांग की है। उन्होंने इस ऐतिहासिक भवन को राजा मेदिनीराय संग्रहालय के रूप में विकसित करने का ठोस प्रस्ताव रखा है। पत्र में भवन की वर्तमान जर्जर स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे मरम्मत कर आधुनिक पर्यटन केंद्र में बदलने का आग्रह किया गया है। इस पहल को जिले की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है।
- निवर्तमान उपमहापौर राकेश कुमार सिंह ने उपायुक्त पलामू को सौंपा पत्र।
- मेदिनीनगर कचहरी परिसर स्थित पुराने समाहरणालय भवन को संरक्षित करने की मांग।
- भवन को राजा मेदिनीराय संग्रहालय के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव।
- ऐतिहासिक धरोहर की जर्जर हालत पर व्यक्त की गई गहरी चिंता।
- मरम्मत कर आधुनिक और दर्शक-अनुकूल संग्रहालय बनाने का आग्रह।
- संग्रहालय के मुख्य द्वार पर राजा मेदिनीराय की भव्य प्रतिमा लगाने का सुझाव।
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के कचहरी परिसर में स्थित पुराने समाहरणालय भवन को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। निवर्तमान उपमहापौर राकेश कुमार सिंह (मंगल सिंह) ने उपायुक्त पलामू को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक भवन को संरक्षित करने और इसे राजा मेदिनीराय संग्रहालय के रूप में विकसित करने की मांग की है। उनके इस पत्र ने जिले में ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर एक नई बहस छेड़ दी है।
ऐतिहासिक भवन के संरक्षण पर जोर
अपने लिखित आवेदन में राकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मेदिनीनगर का यह पुराना समाहरणालय भवन जिले के गौरवशाली इतिहास का जीवंत साक्षी है। यह भवन न केवल सरकारी प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, बल्कि अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे ऐतिहासिक भवन शहर और जिले की पहचान होते हैं, जिन्हें नष्ट करने के बजाय सहेजकर रखना चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि उचित देखरेख और मरम्मत के अभाव में यह भवन आज अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। दीवारों, छत और संरचना में आई कमजोरी के कारण यह धरोहर धीरे-धीरे अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह ऐतिहासिक इमारत पूरी तरह नष्ट हो सकती है।
राजा मेदिनीराय के नाम पर संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव
निवर्तमान उपमहापौर ने सुझाव दिया है कि इस भवन की मरम्मत कर इसे एक आधुनिक संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय का नाम पलामू के न्यायप्रिय और लोकप्रिय शासक राजा मेदिनीराय के नाम पर रखा जाना चाहिए। यह न केवल उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेगा।
उन्होंने अपने पत्र में प्रस्ताव रखा कि संग्रहालय में पलामू जिले के इतिहास, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दस्तावेज, प्राचीन वस्तुएं और पुरातात्विक धरोहरों को प्रदर्शित किया जाए। इससे छात्र, शोधार्थी और आम नागरिक जिले के समृद्ध अतीत को नजदीक से जान सकेंगे।
इस संदर्भ में निवर्तमान उपमहापौर राकेश कुमार सिंह ने कहा:
“पुराना समाहरणालय भवन पलामू की ऐतिहासिक धरोहर है। इसे संरक्षित कर यदि राजा मेदिनीराय संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाता है, तो जिले की संस्कृति और इतिहास को स्थायी संरक्षण मिलेगा।”
प्रतिमा स्थापना से बढ़ेगा आकर्षण
पत्र में एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है कि संग्रहालय के मुख्य द्वार के पास राजा मेदिनीराय की एक भव्य और आकर्षक प्रतिमा स्थापित की जाए। निवर्तमान उपमहापौर का मानना है कि प्रतिमा स्थापना से संग्रहालय का महत्व और आकर्षण कई गुना बढ़ जाएगा। इससे बाहर से आने वाले पर्यटक भी पलामू के महान शासक के योगदान से परिचित हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि मेदिनीनगर शहर का नाम भी राजा मेदिनीराय से जुड़ा है, इसलिए उनके नाम पर संग्रहालय और प्रतिमा स्थापना ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पूरी तरह सार्थक और प्रासंगिक होगा।
पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाएं
राकेश कुमार सिंह ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि इस पहल से मेदिनीनगर शहर में पर्यटन का एक नया केंद्र विकसित होगा। संग्रहालय बनने से शहर में बाहर से पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा, जिससे होटल, परिवहन, गाइड सेवा और स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा।
उनका मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से स्थानीय युवाओं में गर्व की भावना उत्पन्न होती है। साथ ही संग्रहालय संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के कई अवसर भी सृजित होंगे। इससे जिले के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी।
प्रशासन से त्वरित पहल की उम्मीद
निवर्तमान उपमहापौर ने उपायुक्त पलामू से आग्रह किया है कि इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भवन का मामला नहीं है, बल्कि पलामू जिले की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा विषय है।
उन्होंने भरोसा जताया कि यदि जिला प्रशासन इस दिशा में पहल करता है, तो मेदिनीनगर का यह पुराना भवन एक शानदार और उपयोगी संग्रहालय के रूप में नई जिंदगी पा सकेगा।
न्यूज़ देखो: ऐतिहासिक सोच की जरूरत
यह पत्र जिले की ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति बढ़ती जागरूकता को उजागर करता है। पुराने समाहरणालय भवन जैसी इमारतों को संरक्षित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। धरोहरों को नया उपयोग देकर ही हम इतिहास को जीवित रख सकते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी विरासत बचाएं, मेदिनीनगर को नई पहचान दिलाएं
पलामू की ऐतिहासिक धरोहरें हमारी सामूहिक संपत्ति हैं।
ऐसे भवनों का संरक्षण कर उन्हें जनोपयोगी बनाना समय की मांग है।
राजा मेदिनीराय जैसे महान शासकों के योगदान को सहेजकर रखना जरूरी है।
संग्रहालय बनने से जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।
युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
पर्यटन विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।
प्रशासन और जनता मिलकर इस पहल को सफल बनाएं।
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