
#रांची #श्रद्धांजलि : राजेंद्र चौक स्थित प्रतिमा पर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन ने पुष्पांजलि देकर किया नमन
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर रांची प्रशासन द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित।
- उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन की उपस्थिति।
- कार्यक्रम राजेंद्र चौक स्थित प्रतिमा पर आयोजित।
- स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान निर्माण में डॉ. प्रसाद के योगदान का स्मरण।
- अधिकारियों ने उनके सादगी, नैतिकता और आदर्श जीवन से सीख लेने की अपील की।
रांची में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई। मौके पर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री और वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन ने राजेंद्र चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को याद किया। जयंती कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. प्रसाद के आदर्शों और मूल्यों से परिचित कराना था।
राजेंद्र चौक में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह
रांची प्रशासन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सुबह के समय राजेंद्र चौक पर शुरू हुआ। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन प्रतिमा स्थल पहुंचे और राष्ट्र के प्रथम राष्ट्रपति को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नागरिक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा, “डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी योद्धा, संविधान निर्माण के प्रमुख स्तंभ एवं नैतिक मूल्यों के प्रतीक थे। उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा हम सबके लिए प्रेरक है। हमें राष्ट्रहित में अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से पालन करना चाहिए।”
एसएसपी राकेश रंजन ने भी डॉ. प्रसाद के जीवन और संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी से लेकर संविधान निर्माण तक उनकी भूमिका अमिट है और आज भी उनके विचार भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद की विरासत और प्रेरणाएँ
डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के निर्णायक चरणों के साक्षी रहे। महात्मा गांधी के सत्याग्रह, नमक आंदोलन और अन्य आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका इतिहास में दर्ज है। संविधान सभा के अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिक प्रशासन का उदाहरण रहा।
उनकी सादगी और स्वच्छ राजनीतिक जीवन आज भी सार्वजनिक सेवा का आदर्श मॉडल माना जाता है। रांची में आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम नई पीढ़ी को उन्हीं मूल्यों की याद दिलाने का प्रयास भी था, जिन्हें डॉ. प्रसाद ने जीवनभर अपनाया।
नागरिकों की उपस्थिति और समाज में संदेश
जयंती कार्यक्रम में शामिल होने वाले स्थानीय लोगों ने प्रशासन की पहल की सराहना की। कई नागरिकों ने कहा कि देश के महान नेताओं को याद करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनकी प्रेरणाओं को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी भी है।
शहर के युवाओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे सरल, विनम्र और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले नेता की जीवनशैली से प्रेरणा लेने की बात कही।


न्यूज़ देखो: राष्ट्रपिता जैसे मूल्यों वाले प्रथम राष्ट्रपति को मिला सच्चा सम्मान
रांची में आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम एक संदेश देता है कि राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाले महानायकों को याद रखना आवश्यक है। प्रशासन ने जिस गरिमा और सम्मान से यह कार्यक्रम आयोजित किया, वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति के आदर्श आज भी शासन, समाज और नागरिक जीवन के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें, आदर्श नेताओं का जीवन बनाएं मार्गदर्शन
डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान नेताओं की जीवन यात्रा हमें सिखाती है कि सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। समाज और देश के विकास में हम सभी की सक्रिय भूमिका है। अपने विचार साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और देशहित में योगदान देने की प्रेरणा को और लोगों तक पहुँचाएं।







