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उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने केरसई में जेएसएलपीएस योजनाओं का किया व्यापक निरीक्षण, आजीविका सशक्तिकरण पर दिया जोर

#केरसई #ग्रामीण_आजीविका : उप विकास आयुक्त सिमडेगा ने जेएसएलपीएस व मनरेगा से जुड़ी योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर समूहों से संवाद किया।

सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में उप विकास आयुक्त श्री दीपांकर चौधरी द्वारा जेएसएलपीएस की संचालित आजीविका योजनाओं का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बुनकर समुदाय, सखी मंडल और उत्पादक समूहों के साथ बैठक कर उनकी गतिविधियों, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली गई। पारंपरिक वस्त्र निर्माण, सब्जी उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों का स्थल पर जायजा लिया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाना और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना रहा।

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  • उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने केरसई प्रखंड में योजनाओं का निरीक्षण किया।
  • बासेन पंचायत के गुझारिया गांव में बुनकर महिला समूहों के साथ बैठक।
  • बिजली संचालित बुनकर मशीन की मांग, रख-रखाव पर चर्चा।
  • कर्राझरिया गांव में सब्जी उत्पादक समूह के प्रक्षेत्र का निरीक्षण।
  • अतिरिक्त सोलर पैनल सिंचाई संयंत्र की मांग पर बीडीओ को निर्देश।

केरसई प्रखंड अंतर्गत जेएसएलपीएस द्वारा संचालित योजनाओं का निरीक्षण प्रशासनिक सक्रियता और जमीनी संवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण बना। इस दौरान उप विकास आयुक्त ने न केवल योजनाओं की प्रगति देखी, बल्कि सीधे लाभार्थियों से संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझा। निरीक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आजीविका आधारित योजनाओं को और प्रभावी बनाना रहा।

बुनकर समुदाय के साथ संवाद और पारंपरिक वस्त्र पर जोर

निरीक्षण कार्यक्रम के तहत सर्वप्रथम बासेन पंचायत के गुझारिया ग्राम में बुनकर समुदाय की महिला समूहों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सरस्वती आजीविका समूह, एकता आजीविका समूह एवं लक्ष्मी आजीविका समूह की सदस्य उपस्थित रहीं। उप विकास आयुक्त ने आदिवासी पारंपरिक वस्त्र निर्माण, बुनाई की प्रक्रिया और उनके विपणन से जुड़ी जानकारी विस्तार से ली।

उन्होंने महिलाओं से उनके उत्पादन, लागत, बाजार पहुंच और आय के स्रोतों पर चर्चा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पारंपरिक बुनाई को आधुनिक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, ताकि स्थानीय उत्पादों को बेहतर मूल्य मिल सके।

बिजली संचालित बुनकर मशीन की मांग

बैठक के दौरान सखी मंडल की सदस्यों एवं ग्रामीणों ने बिजली संचालित बुनकर मशीन उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने बताया कि इससे उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभव होगी। इस पर उप विकास आयुक्त ने मशीन के संचालन और रख-रखाव से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की।

उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने कहा: “मशीनों के सही संचालन और रख-रखाव की व्यवस्था समूह स्तर पर मजबूत होनी चाहिए, ताकि यह पहल लंबे समय तक लाभकारी साबित हो।”

उन्होंने जानकारी दी कि ग्राम स्तर पर निर्मित बुनकर भवन का संचालन सखी मंडल द्वारा किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा। इसके पश्चात बुनकर भवन का स्थल निरीक्षण भी किया गया।

मनरेगा अंतर्गत बागवानी गतिविधियों का निरीक्षण

बुनकर समुदाय के बाद उप विकास आयुक्त ने मनरेगा अंतर्गत संचालित बागवानी गतिविधियों का निरीक्षण किया। उन्होंने पौधों की स्थिति, रख-रखाव और लाभार्थियों की सहभागिता की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि बागवानी योजनाओं में गुणवत्ता और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किया जाए।

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कर्राझरिया में सब्जी उत्पादक समूह का निरीक्षण

इसके उपरांत बाघडेगा पंचायत के कर्राझरिया ग्राम में जेएसएलपीएस के खुशी उत्पादक समूह के सब्जी उत्पादन प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया गया। यहां समूह की दीदियों द्वारा उप विकास आयुक्त का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया, जो ग्रामीण संस्कृति और सम्मान की भावना को दर्शाता है।

बैठक के दौरान समूह की सदस्यों ने अपनी वर्तमान कृषि गतिविधियों, लाभ-हानि की स्थिति और सब्जियों के क्रय-विक्रय की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि समूह की 15 दीदियों द्वारा 15 एकड़ भूमि में वर्षभर सब्जी उत्पादन किया जा रहा है।

बाजार से जुड़ाव और सिंचाई व्यवस्था

समूह की सदस्यों ने किसान उत्पादक कंपनी एवं बाजार से अपने जुड़ाव की जानकारी भी दी। बताया गया कि सिंचाई संयंत्र का रख-रखाव स्वयं समूह द्वारा किया जाता है, जिससे उत्पादन निरंतर बना रहता है। इस दौरान समूह ने एक अतिरिक्त सोलर पैनल सिंचाई संयंत्र की मांग रखी।

इस पर उप विकास आयुक्त ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि मांग पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संसाधनों के बेहतर उपयोग से उत्पादन लागत और कम की जा सकती है।

मत्स्य पालन और अन्य योजनाओं पर सुझाव

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त ने उसी प्रक्षेत्र में मनरेगा अंतर्गत मत्स्य पालन हेतु तालाब निर्माण की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे आय के अतिरिक्त स्रोत सृजित होंगे और समूह की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा की बागवानी योजना एवं आवास योजना का भी निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

निरीक्षण में शामिल अधिकारी

इस निरीक्षण भ्रमण कार्यक्रम में पलाश जेएसएलपीएस, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री शांति मार्डी, सहायक परियोजना पदाधिकारी (मनरेगा), प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी केरसई, जिला स्तर के मनरेगा पदाधिकारी, आजीविका प्रबंधक तथा मनरेगा एवं आवास योजना से जुड़े अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: जमीनी निरीक्षण से मजबूत होती योजनाओं की दिशा

उप विकास आयुक्त का यह निरीक्षण यह दर्शाता है कि प्रशासन अब केवल कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी स्तर पर संवाद और निरीक्षण के माध्यम से योजनाओं को प्रभावी बनाना चाहता है। बुनकर समुदाय, महिला समूह और उत्पादक समूहों से सीधा संवाद योजनाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है। यदि दिए गए निर्देशों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है, तो ग्रामीण आजीविका को नई गति मिल सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आत्मनिर्भर गांव की ओर एक ठोस कदम

जब प्रशासन और ग्रामीण समुदाय एक साथ मिलकर योजनाओं को आगे बढ़ाते हैं, तभी आत्मनिर्भरता का सपना साकार होता है। आजीविका आधारित पहलें न केवल आय बढ़ाती हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी मजबूत करती हैं। ऐसे प्रयासों में जागरूक रहना और सहभागिता निभाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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Rakesh Kumar Yadav

कुरडेग, सिमडेगा

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