#लातेहार #शिक्षा_व्यवस्था : 15 बच्चों वाले स्कूल पर खर्च को लेकर उठे सवाल।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय छेचानी टोला में बेहद कम छात्र संख्या ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 15 बच्चों वाले इस स्कूल पर हर साल लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और अधिकारियों ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सुधार की आवश्यकता जताई है। विभाग ने भी मामले की निगरानी और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
- बरवाडीह प्रखंड के छेचानी टोला स्कूल में सिर्फ 15 छात्र नामांकित।
- विद्यालय में 2 पारा शिक्षक कार्यरत, फिर भी उपस्थिति बेहद कम।
- हर साल लाखों रुपये खर्च होने पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल।
- प्रभारी बीईईओ राजश्री पूरी ने स्थिति को बताया गंभीर।
- डीएसई गौतम साहू ने पोषक क्षेत्र के बच्चों के नामांकन पर दिया जोर।
- ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।
बरवाडीह प्रखंड के बेतला क्षेत्र स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय छेचानी टोला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां कक्षा 1 से 5 तक संचालित स्कूल में मात्र 15 छात्र ही नामांकित हैं, जबकि दो पारा शिक्षक कार्यरत हैं। कम छात्र संख्या के बावजूद विद्यालय पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
बेहद कम नामांकन से प्रभावित शैक्षणिक माहौल
विद्यालय में छात्रों की संख्या अत्यंत कम होने के कारण पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। इतने कम बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा और सीखने की प्रक्रिया सीमित हो जाती है, जिससे बच्चों के समग्र विकास पर असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय में पर्याप्त छात्र नहीं होंगे, तो शिक्षा का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा।
सरकारी खर्च और उपयोगिता पर उठे सवाल
हर साल इस विद्यालय पर सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन जब नामांकन केवल 15 छात्रों तक सीमित है, तो यह खर्च कितना प्रभावी है—इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के मामलों में संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके।
अधिकारियों ने मानी समस्या, सुधार का भरोसा
प्रभारी बीईईओ राजश्री पूरी ने कहा:
“विद्यालय में कम छात्र संख्या और अनियमित उपस्थिति का मामला गंभीर है। विभाग इस पर नजर बनाए हुए है और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।”
वहीं जिला शिक्षा अधीक्षक गौतम साहू ने कहा:
“यह विद्यालय पोषक क्षेत्र के अंतर्गत आता है और सभी बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है, तो यह गंभीर विषय है और विभाग कार्रवाई करेगा।”
पोषक क्षेत्र के बच्चों का नहीं हो रहा जुड़ाव
जानकारी के अनुसार, इस विद्यालय के पोषक क्षेत्र में कई बच्चे रहते हैं, लेकिन उनका नामांकन नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि सही सर्वे और जागरूकता अभियान चलाया जाए, तो नामांकन बढ़ाया जा सकता है।
ग्रामीणों की मांग: जांच और जवाबदेही तय हो
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि
- पोषक क्षेत्र का सर्वे कराया जाए
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
- शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई उजागर
यह मामला सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाता है, जहां संसाधन तो खर्च हो रहे हैं, लेकिन उनका अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा। कम नामांकन केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी का संकेत है। सवाल यह है कि क्या विभाग समय रहते ठोस कदम उठाएगा? क्या जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा में सुधार से ही भविष्य मजबूत बनेगा
शिक्षा केवल इमारत और बजट से नहीं, बल्कि बच्चों की भागीदारी और गुणवत्ता से मजबूत होती है। ऐसे मामलों में समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाए।
अगर आपके आसपास भी ऐसी कोई समस्या है, तो आवाज उठाइए और बदलाव का हिस्सा बनिए।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और जागरूकता फैलाकर बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए कदम बढ़ाएं।

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