
#चंदवा #योजना_गड़बड़ी : भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सरकार पर ठगी और ग्रामीणों के प्रति संवेदनहीनता के गंभीर आरोप लगाए।
- चंदवा प्रखंड में अबुआ आवास और मईया सम्मान योजना का पोर्टल लंबे समय से बंद।
- भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा— पोर्टल बंद होने के बावजूद सरकार आपके द्वार शिविरों में आवेदन लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
- ग्रामीण महिलाओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा, फोटोकॉपी पर खर्च बढ़ा, मंजूरी प्रक्रिया ठप।
- प्रतुल ने इसे जनता के साथ ठगी बताया— सेवा सप्ताह के नाम पर आम लोगों को भटकाने का आरोप।
- चंदवा के अंचलाधिकारी पर कम समय दफ्तर में बैठने और आम लोगों से लगभग न मिलने का गंभीर आरोप।
- प्रतुल बोले— पूरा मामला उपायुक्त और मुख्य सचिव के सामने भी रखेंगे।
चंदवा प्रखंड में चल रहे शिविरों में अबुआ आवास और मईया सम्मान योजना के लिए भारी संख्या में आवेदन लिए जा रहे हैं, जबकि भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का दावा है कि दोनों योजनाओं का पोर्टल लंबे समय से बंद है। इससे ग्रामीणों में भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। बड़ी संख्या में महिलाएं घंटों लाइन में खड़ी रहती हैं, कागज़ों की फोटोकॉपी में पैसे खर्च कर रही हैं, लेकिन उन्हें आवेदन की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी जा रही। प्रतुल ने इसे एक तरह की प्रशासनिक ठगी बताते हुए कहा कि जब मंजूरी की प्रक्रिया ही बंद है तो शिविरों में भीड़ जुटाने का कोई औचित्य नहीं बचता। यह पूरा मामला ग्रामीणों में नाराजगी और भ्रम को बढ़ा रहा है।
सरकार आपके द्वार शिविरों में भ्रम और अव्यवस्था के आरोप
प्रतुल शाहदेव ने शिविरों की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि जब योजना बंद है और पोर्टल भी काम नहीं कर रहा, तब भी लोगों को बुलाकर आवेदन लेना जनता को गुमराह करना है। उन्होंने कहा कि शिविरों में महिलाओं को घंटों धूप में खड़ा रखा जाता है और उन्हें यह बताया भी नहीं जाता कि आवेदन मंजूर नहीं हो सकते।
प्रतुल शाहदेव ने कहा: “जब योजना बंद है, पोर्टल बंद है, मंजूरी की प्रक्रिया बंद है… तो सरकारी कार्यालय सिर्फ आवेदन लेकर भोले-भाले आदिवासी मूलवासी को गुमराह कर रही है। सेवा सप्ताह के नाम पर जनता को धूप में खड़ा रखकर परेशान किया जा रहा है। कागज़–फोटोकॉपी में ग्रामीणों के पैसे की बर्बादी हो रही है। यह संवेदनहीनता नहीं, यह जनता को ठगने की सरकारी साज़िश है।”
प्रतुल का दावा है कि शिविरों में बैठने की व्यवस्था भी नाममात्र की है, जिसके कारण ग्रामीणों— खासकर महिलाओं— को घंटों असुविधा झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से ग्रामीणों में शासन और प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।
अंचलाधिकारी पर जनता से दूरी का आरोप
प्रतुल शाहदेव ने चंदवा के अंचलाधिकारी को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चंदवा क्षेत्र में जमीन से जुड़े मामलों, नामांतरण और अन्य वादों की लंबित फाइलें बढ़ती जा रही हैं क्योंकि अंचलाधिकारी आम लोगों से मिलते ही नहीं। उन्होंने बताया कि लातेहार के उपायुक्त और आरक्षी अधीक्षक से जनता आसानी से मिल सकती है, लेकिन चंदवा के अंचलाधिकारी से मिलना बेहद कठिन साबित होता है।
प्रतुल के अनुसार, अधिकारी ना तो पर्याप्त समय दफ्तर में बैठते हैं और ना ही जनता से मिलने की पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखते हैं। इससे कनीय कर्मचारियों की मनमानी का रास्ता खुलता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। कई ग्रामीण अपनी जमीन संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए महीनों तक चक्कर काटते रहते हैं।
मामला बड़े अधिकारियों के समक्ष ले जाने की घोषणा
प्रतुल शाहदेव ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मुद्दे को जल्द ही लातेहार के उपायुक्त और झारखंड के मुख्य सचिव के समक्ष रखेंगे। उनका कहना है कि जब योजनाएं बंद हैं तो शिविरों में आवेदन लेकर जनता को भ्रमित करना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ ऐसी संवेदनहीनता को रोका जाना चाहिए और अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली की भी त्वरित समीक्षा होनी चाहिए।
ग्रामीणों की बढ़ती नाराजगी और प्रशासन पर सवाल
इस पूरी स्थिति ने चंदवा प्रखंड में ग्रामीणों की नाराजगी को बढ़ा दिया है। महिलाओं का आरोप है कि शिविरों में उन्हें जानकारी नहीं दी जाती और केवल आवेदन जमा करवा लिया जाता है। लोगों का कहना है कि अगर योजना बंद है तो इसकी जानकारी पहले ही सार्वजनिक की जानी चाहिए थी ताकि समय और पैसे की बर्बादी न होती। इससे ग्रामीणों की प्रशासन पर भरोसे की नींव कमजोर होती जा रही है और सरकारी योजनाओं को लेकर अविश्वास बढ़ रहा है।
न्यूज़ देखो: जनता की आवाज़ को सुनना ही प्रशासन की पहली जिम्मेदारी
चंदवा प्रखंड में पोर्टल बंद होने के बावजूद आवेदन लेने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि प्रशासनिक समन्वय और पारदर्शिता की कमी अब जनता की परेशानी में बदल चुकी है। ग्रामीणों की शिकायतें गंभीर हैं, और अंचलाधिकारी पर लगाए गए आरोप प्रशासनिक जवाबदेही को चुनौती देते हैं। योजनाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना और शिविरों को पारदर्शी बनाना आवश्यक है, ताकि जनता भ्रमित न हो।
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सक्रिय नागरिक ही बदलेंगे व्यवस्था
चंदवा की यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रशासन तभी प्रभावी बनता है जब जनता अपनी आवाज़ मजबूती से उठाती है। योजनाओं की जानकारी मांगना, अधिकारियों से जवाबदेही की अपेक्षा करना और सामूहिक रूप से अपनी समस्याएं सामने रखना लोकतंत्र की बुनियाद है। अब समय है कि हर नागरिक अपने अधिकारों को समझे और अपने इलाके की वास्तविकता को जिम्मेदारी से सामने लाए। अपनी राय कमेंट में लिखें, इस खबर को ज़रूर शेयर करें और अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता पहुंचाएं।







