महुआडांड़ में फंड संकट से ठप पड़े विकास कार्य, पंचायतें बेबस—मुखिया और ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी

महुआडांड़ में फंड संकट से ठप पड़े विकास कार्य, पंचायतें बेबस—मुखिया और ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी

author Ramprawesh Gupta
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#महुआडांड़ #विकास_अवरोध : ​1 साल से पंचायतों को नहीं मिला फंड; मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र पर लगाया आरोप
  • महुआडांड़ प्रखंड की सभी पंचायतों में एक साल से विकास कार्य ठप
  • पंचायतों को सरकार की ओर से फंड जारी नहीं, काम शुरू करना मुश्किल।
  • सड़क, नाली, पेयजल, आवास सहित सभी योजनाएं अधूरी और बंद पड़ी हैं।
  • मुखियाओं ने कहा—ग्रामीण हर दिन सवाल करते हैं, हम असहाय हैं
  • ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार पर फंड रोकने का आरोप लगाया।
  • मंत्री ने कहा—समस्या का समाधान जल्द, फंड मिलते ही काम तेज होंगे।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में विकास कार्यों की रफ्तार पिछले एक साल से पूरी तरह थम चुकी है। प्रखंड की सभी पंचायतों को लंबे समय से फंड नहीं मिलने के कारण सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल आपूर्ति, आवास योजनाओं और अन्य कल्याणकारी कार्यों पर ताले लग गए हैं। बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ गई हैं, जबकि पंचायत प्रतिनिधि लगातार जनता के सवालों के बीच असहज स्थिति में हैं।

पंचायतों में फंड की कमी, प्रभावित जनजीवन

महुआडांड़ प्रखंड की पंचायतों में सड़क और नाली निर्माण के अधूरे काम महीनों से जस के तस पड़े हैं। कई गांवों में पेयजल योजनाएं रुक जाने से लोग आज भी हैंडपंप और नदी-नालों पर निर्भर हैं। मनरेगा, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई कार्य आधे पर छोड़ दिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “जो सुविधा पहले मिलती थी, अब उसके लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।”

फंड न मिलने की वजह से पंचायत भवनों की मरम्मत, आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था और सामुदायिक विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं। कई जगह स्कूल परिसरों में छोटे–मोटे मरम्मत कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं।

मुखियाओं ने जताई असहायता—“ग्रामीणों को जवाब देना मुश्किल”

महुआडांड़ की विभिन्न पंचायतों के मुखियाओं ने कहा कि विकास कार्य रुक जाने से ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी है। लोग रोज़ पूछते हैं कि काम कब शुरू होगा, लेकिन पंचायतों के पास कोई ठोस जवाब नहीं।
एक मुखिया ने कहा—

“एक साल से फंड न मिलने के कारण गांव में कोई नया काम शुरू नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण हर दिन सवाल करते हैं, लेकिन हमारे पास उन्हें देने के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। फंड के बिना हम पूरी तरह असहाय हैं।”

पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि योजनाओं के रुकने से सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि जनता सीधे स्थानीय प्रतिनिधियों से जवाब मांगती है।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र को ठहराया जिम्मेदार

फंड जारी न होने के मामले पर जब झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से पूछा गया, तो उन्होंने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
मंत्री ने कहा—

“केंद्र सरकार की ओर से राशि रिलीज नहीं की जा रही है, इसी वजह से पंचायतों में विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लगातार इस मुद्दे को केंद्र के सामने रख रही है और जल्द समाधान की उम्मीद है। उन्होंने ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि जैसे ही फंड उपलब्ध होगा, रुके कार्यों को प्राथमिकता के साथ तेज गति से शुरू किया जाएगा।

ग्रामीणों में बढ़ता असंतोष

फंड न मिलने से लोगों को रोज़मर्रा की दिक्कतें बढ़ रही हैं। कहीं सड़कें टूटकर चलने लायक नहीं रहीं, तो कहीं जलापूर्ति व्यवस्था आधे में बंद पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सरकार के तहत विकास की जो उम्मीद थी, वह अब उम्मीद से ज्यादा चिंता बन गई है। कई लोग इस स्थिति को “जनता के अधिकारों का हनन” बता रहे हैं।

न्यूज़ देखो : फंड संकट ने पंचायत राज प्रणाली की कमजोरी उजागर की

फंड जारी करने में देरी ने यह साबित कर दिया है कि पंचायतों को सशक्त करने की योजनाएं तब तक सफल नहीं हो सकतीं, जब तक वित्तीय संसाधन नियमित और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध न हों। महुआडांड़ की स्थिति बताती है कि फंड खत्म होते ही पूरे प्रखंड में विकास थम जाता है। यह ग्रामीण प्रणाली के लिए चिंताजनक संकेत है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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अपने क्षेत्र में रुकी योजनाओं की जानकारी जुटाएं और सार्वजनिक मंचों पर मुद्दा उठाएं।
स्थानीय प्रशासन से नियमित समीक्षा की मांग करें।
ग्रामीण विकास में पारदर्शिता के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा दें।
फंड रिलीज और योजनाओं की प्रगति को ट्रैक करने के लिए पंचायत बैठकों में शामिल हों।
इस खबर को साझा करें और विकास कार्यों को पुनः शुरू कराने के लिए जनदबाव बनाएं।

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Written by

महुवाडांड, लातेहार

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