Palamau

संघर्ष और मेहनत से सरकारी सेवा तक का सफर, धर्मेंद्र पासवान बने युवाओं की प्रेरणा

#पाकी #पलामू #सफलता : सीमित संसाधनों से निकलकर सीजीएल में सफलता की प्रेरक कहानी।

पलामू जिले के पाकी प्रखंड के तितलंगी गांव निवासी धर्मेंद्र पासवान ने सीजीएल परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी पद पर चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। रांची में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। यह सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा और परिश्रम की ताकत का सशक्त उदाहरण है।

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  • पाकी प्रखंड के तितलंगी गांव के निवासी धर्मेंद्र पासवान का चयन सहायक प्रशाखा पदाधिकारी पद पर।
  • सीजीएल परीक्षा में सफलता के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिला नियुक्ति पत्र।
  • किसान एवं मजदूर पिता मनोज पासवान के संघर्ष और सहयोग की अहम भूमिका।
  • गांव में जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों द्वारा भव्य स्वागत।
  • ग्रामीण युवाओं के लिए बनी प्रेरणा की मिसाल
  • शिक्षा और मेहनत से बदली एक साधारण परिवार की तकदीर

पलामू जिले के पाकी प्रखंड अंतर्गत लोहरसी पंचायत के तितलंगी गांव से एक ऐसी सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में उत्साह और गर्व का माहौल बना दिया है। गांव के साधारण परिवार से आने वाले धर्मेंद्र पासवान ने सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर चयनित होकर यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी कभी भी सपनों की ऊंचाई तय नहीं कर सकती। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे प्रखंड और जिले के लिए गौरव का विषय बन गई है।

सीमित संसाधन, लेकिन असीम संकल्प

धर्मेंद्र पासवान, तितलंगी गांव निवासी मनोज पासवान के पुत्र हैं। उनके पिता खेती-बाड़ी के साथ-साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते रहे। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन शिक्षा को लेकर पिता का दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक रहा। उन्होंने हर परिस्थिति में यह सुनिश्चित किया कि बेटे की पढ़ाई बाधित न हो। खेतों में काम और मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी।

कठिन परिस्थितियों में भी नहीं टूटा हौसला

धर्मेंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के सरकारी शिक्षण संस्थानों से प्राप्त की। सीमित संसाधन, प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन तैयारी और ग्रामीण परिवेश की चुनौतियां उनके रास्ते में बार-बार आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिन-रात की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने सीजीएल परीक्षा में सफलता प्राप्त की। यह सफलता उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष का प्रतिफल थी।

रांची में मिला नियुक्ति पत्र, गांव में जश्न का माहौल

धर्मेंद्र पासवान की सफलता का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब रांची में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। यह क्षण उनके और उनके परिवार के लिए अविस्मरणीय बन गया। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे तितलंगी गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।

गांव में हुआ भव्य स्वागत

गांव लौटने पर धर्मेंद्र पासवान का स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। लोहरसी मुखिया पति सह समाजसेवी अरविंद कुमार सिंह, समाजसेवी मुकेश गुप्ता, समाजसेवी डब्लू पासवान और अंबाबार मुखिया पति राजेंद्र पासवान ने मिठाई खिलाकर और बुके भेंट कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। स्वागत समारोह के दौरान गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने धर्मेंद्र की सफलता को पूरे क्षेत्र की उपलब्धि बताया।

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की प्रतिक्रिया

स्वागत कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि धर्मेंद्र पासवान की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। अरविंद कुमार सिंह ने कहा:

“धर्मेंद्र पासवान की उपलब्धि ग्रामीण युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। यह साबित करता है कि शिक्षा ही सामाजिक और आर्थिक उन्नति का सबसे बड़ा साधन है।”

वहीं मुकेश गुप्ता ने कहा:

“यह सफलता पूरे पंचायत और प्रखंड का मान बढ़ाने वाली है। इससे आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।”

युवाओं के लिए बना प्रेरणास्रोत

धर्मेंद्र पासवान की कहानी आज पाकी प्रखंड और आसपास के इलाकों में युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी सफलता ने यह भरोसा पैदा किया है कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने अपने संघर्ष से यह सिद्ध किया कि साधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपनों की उड़ान को कोई नहीं रोक सकता।

परिवार की भूमिका रही निर्णायक

इस सफलता के पीछे परिवार का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा। पिता मनोज पासवान का संघर्ष, त्याग और बेटे पर भरोसा धर्मेंद्र के आत्मविश्वास की नींव बना। परिवार ने हर कठिन समय में उनका मनोबल बढ़ाया और लक्ष्य पर डटे रहने के लिए प्रेरित किया।

समाज के लिए सकारात्मक संदेश

धर्मेंद्र पासवान की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। यह दिखाता है कि शिक्षा और सरकारी सेवा के माध्यम से ग्रामीण युवाओं के लिए सम्मानजनक जीवन और स्थिर भविष्य संभव है। इस उपलब्धि से समाज में शिक्षा के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

न्यूज़ देखो: मेहनत से बदली किस्मत की कहानी

धर्मेंद्र पासवान की सफलता यह उजागर करती है कि सरकारी नीतियों और प्रतियोगी परीक्षाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंच रहा है। यह कहानी ग्रामीण युवाओं में आत्मविश्वास जगाती है और शिक्षा की शक्ति को रेखांकित करती है। प्रशासन और समाज दोनों के लिए यह संकेत है कि प्रतिभा हर गांव में मौजूद है, जरूरत है सही अवसर और मार्गदर्शन की। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सपनों को पंख दें, संघर्ष से न घबराएं

धर्मेंद्र पासवान की यह यात्रा हर उस युवा के लिए संदेश है जो कठिनाइयों से घबराकर अपने सपनों को छोटा मान लेता है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर, तो सफलता निश्चित है। शिक्षा को अपना हथियार बनाएं और आगे बढ़ने का साहस रखें।
आपकी राय क्या है? इस प्रेरक कहानी को साझा करें, युवाओं तक पहुंचाएं और बताएं कि आप ऐसे प्रयासों को कैसे देखते हैं।

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Nitish Kumar Paswan

पांकी पलामू

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