
#विश्रामपुर #पलामू #मंदिर_विवाद : कमिटी के फैसलों से नाराज होकर सचिव ने छोड़ा पद, कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।
पलामू जिले के विश्रामपुर अंतर्गत तोलरा गांव स्थित विष्णु मंदिर संचालन समिति में उस समय विवाद गहरा गया, जब समिति के सचिव गोखूल तिवारी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने समिति के कुछ फैसलों को गलत बताते हुए सार्वजनिक रूप से असंतोष जाहिर किया। गांव स्तर पर बैठक के बाद मंदिर परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने अपने निर्णय की घोषणा की। यह मामला मंदिर संचालन, पुरोहित नियुक्ति और आंतरिक मतभेदों से जुड़ा हुआ है, जो अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
- विष्णु मंदिर, तोलरा गांव की संचालन समिति में बढ़ा आंतरिक विवाद।
- सचिव गोखूल तिवारी ने नाराजगी जताते हुए दिया त्यागपत्र।
- पुरोहित नियुक्ति को लेकर कमिटी के फैसले पर आपत्ति।
- ढाई वर्षों तक मंदिर संचालन का अनुभव बताया।
- त्यागपत्र की प्रति समिति अध्यक्ष को सौंपी।
पलामू प्रमंडल के विश्रामपुर क्षेत्र अंतर्गत तोलरा गांव स्थित विष्णु मंदिर संचालन समिति में लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। समिति के सचिव रहे गोखूल तिवारी ने अपने पद से त्यागपत्र देकर मंदिर प्रबंधन और कमिटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके इस फैसले के बाद गांव और आसपास के इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
गांव स्तर की बैठक के बाद प्रेसवार्ता
त्यागपत्र देने से पूर्व गोखूल तिवारी की पहल पर गांव स्तर पर एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मंदिर संचालन और हालिया घटनाक्रम को लेकर चर्चा हुई। बैठक के बाद उन्होंने विष्णु मंदिर परिसर में प्रेसवार्ता कर सार्वजनिक रूप से अपने सचिव पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला किसी व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ से नहीं, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और शुद्धता से जुड़ा हुआ है।
ढाई वर्षों के कार्यकाल का दिया हवाला
गोखूल तिवारी ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई वर्षों तक विष्णु मंदिर के बेहतर संचालन के लिए लगातार प्रयास किया। उनके अनुसार इस अवधि में उन्होंने पूजा-पाठ, भक्तों की सुविधा और मंदिर की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि मंदिर उनके लिए केवल एक संस्था नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का केंद्र रहा है।
पुरोहित नियुक्ति को लेकर विवाद
त्यागपत्र का मुख्य कारण बताते हुए गोखूल तिवारी ने कहा कि हाल ही में पुरोहित को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा एक बाल ब्रह्मचारी युवा को मंदिर के सफल संचालन और नियमित पूजा-पाठ के लिए लाया गया था। उनके अनुसार वह पुरोहित पूरी शुद्धता और नियमों के साथ पूजा करते थे।
गोखूल तिवारी ने कहा कि नया पुरोहित गंगाजल और दूध से भगवान का स्नान कराते थे, शुद्ध भोग अर्पित करते थे और सुबह चार बजे ब्रह्मबेला से ही भक्ति में लीन रहते थे। बावजूद इसके, समिति के कुछ सदस्यों ने उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया और उन्हें मंदिर से भगा दिया, जिससे वे आहत हुए।
वर्तमान पुरोहित की कार्यशैली पर सवाल
गोखूल तिवारी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में जिन पुरोहित को समिति ने रखा है, वे साफ-सफाई और शुद्धता पर उतना ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थान में पूजा-पाठ की शुद्धता सर्वोपरि होनी चाहिए, लेकिन इस मामले में समिति ने सही निर्णय नहीं लिया।
अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से असंतोष
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे समिति अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। गोखूल तिवारी ने कहा कि उन्हें भगवान या भक्ति से कोई शिकायत नहीं है, बल्कि समिति के दो-चार लोगों के व्यवहार और निर्णयों से वे मानसिक रूप से आहत हैं। इसी कारण उन्होंने पद पर बने रहना उचित नहीं समझा।
अध्यक्ष को सौंपी त्यागपत्र की प्रति
गोखूल तिवारी ने जानकारी दी कि उन्होंने अपने त्यागपत्र की एक प्रति स्वयं समिति अध्यक्ष के घर पहुंचाकर सौंप दी है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यदि मंदिर के हित में कोई सकारात्मक पहल होगी, तो वे व्यक्तिगत स्तर पर सहयोग से पीछे नहीं हटेंगे।
न्यूज़ देखो: मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता पर सवाल
न्यूज़ देखो: विष्णु मंदिर संचालन समिति में सचिव का इस्तीफा यह दर्शाता है कि धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में पारदर्शिता और आपसी संवाद कितना जरूरी है। पुरोहित नियुक्ति जैसे संवेदनशील मामलों में असहमति का सार्वजनिक होना समिति के लिए गंभीर चेतावनी है। अब देखना होगा कि समिति इस विवाद को कैसे सुलझाती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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आस्था के साथ व्यवस्था भी जरूरी
मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि समाज की आस्था का केंद्र होता है।
ऐसे में संचालन समिति की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
जरूरी है कि आंतरिक मतभेद संवाद से सुलझें, न कि विवाद से बढ़ें।
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