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पलामू में 10 शिक्षकों को गरिमापूर्ण विदाई, उपायुक्त ने कहा– ‘एक शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता’

#पलामू #शिक्षकसम्मानसमारोह – सेवानिवृत्ति के पहले दिन ही शिक्षकों को दिए गए सभी लाभ, प्रशासनिक तत्परता की मिसाल

  • पलामू समाहरणालय सभागार में पेंशन अदालत सह सम्मान समारोह का आयोजन
  • जिले के 10 शिक्षकों को उपायुक्त ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया
  • रिटायरमेंट के साथ ही सभी लाभ तुरंत उपलब्ध कराए गए
  • उपायुक्त समीरा एस ने कहा– सेवा का अंत नहीं, अनुभव का नया आरंभ है
  • जिला शिक्षा अधीक्षक समेत कई प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम में रहे मौजूद
  • सम्मानित शिक्षकों में रामनारायण राम, आशारानी शुक्ला, गोरखनाथ पांडेय शामिल

सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रशासन ने दी गरिमामयी विदाई

पलामू समाहरणालय सभागार में सोमवार को पेंशन अदालत सह विदाई-सह-सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्रीमती समीरा एस की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में 10 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और उनके रिटायरमेंट से संबंधित सभी लाभ रिटायरमेंट के दिन ही सौंपे गए, जिससे कार्यक्रम एक सकारात्मक उदाहरण बन गया।

सम्मानित शिक्षकों की सूची और योगदान

इस अवसर पर जिन शिक्षकों को सम्मानित किया गया, उनमें रामनारायण राम, राम अश्रेय राम, कमली कुमारी, श्यामदेव महतो, गोरखनाथ पांडेय, आशारानी शुक्ला, सदरुदीन ख़ाँ, रश्मि माला, निशा गुप्ता और रामचंद्र राम शामिल थे। प्रशासन की तत्परता और मानवीयता का यह समारोह एक प्रेरणास्रोत बना।

अनुभव से समाज को मिलेगा मार्गदर्शन : उपायुक्त

इस समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्रीमती समीरा एस ने कहा:

“यह जीवन का नया अध्याय है जिसे सेवा और अनुभव से और भी मूल्यवान बनाया जा सकता है। एक शिक्षक कभी रिटायर्ड नहीं होते—उनकी भूमिका समाज के लिए हमेशा मार्गदर्शक की रहती है।”

उन्होेंने सभी शिक्षकों को उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए धन्यवाद देते हुए आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

शिक्षा विभाग और प्रशासनिक सहभागिता की मिसाल

इस आयोजन में जिला शिक्षा अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम न केवल सम्मान का प्रतीक रहा, बल्कि शिक्षकों के योगदान को औपचारिक रूप से स्वीकारने की एक सराहनीय पहल भी बना।

न्यूज़ देखो : समाज के हर शिक्षकीय योगदान को देता है आवाज़

न्यूज़ देखो हर उस योगदान को सामने लाता है, जिसने समाज को आगे बढ़ाया है। शिक्षकों की सेवानिवृत्ति केवल उनके कार्यकाल का अंत नहीं, बल्कि उनके अनुभवों से समाज को नया रास्ता देने का आरंभ है। पलामू का यह आयोजन इसी भावना का प्रतीक है, जहां प्रशासनिक मान्यता और मानवता का संगम दिखा

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