
#मेदिनीनगर #नगरनिगमचुनाव : व्यवसाय संघर्ष समिति की रायशुमारी में बेटी बनाम बहू की राजनीति बनी चर्चा का केंद्र
- पलामू जिला व्यवसाय संघर्ष समिति के तत्वावधान में मेदिनीनगर टाउन हॉल में रायशुमारी का आयोजन।
- आयोजन का नेतृत्व समिति संयोजक प्रभात कुमार अग्रवाल व समिति अध्यक्ष पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी ने किया।
- व्यवसायियों में व्याप्त दहशत और असुरक्षा पर खुलकर हुई चर्चा।
- सभी वक्ताओं ने नम्रता त्रिपाठी को मेयर प्रत्याशी बनाने की एकजुट मांग की।
- नगर निगम के सभी वार्ड पार्षद, व्यापारी, समाजसेवी और राजनीतिक दलों के नेता रहे उपस्थित।
पलामू जिला व्यवसाय संघर्ष समिति के तत्वावधान में रविवार को मेदिनीनगर टाउन हॉल में एक महत्वपूर्ण रायशुमारी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में व्यवसायियों के बीच बढ़ते भय और असुरक्षा के माहौल पर गंभीर मंथन करना था। आयोजन समिति के संयोजक प्रभात कुमार अग्रवाल और समिति के अध्यक्ष, झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी के निर्देशन में हुए इस कार्यक्रम में व्यापारियों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं।
कार्यक्रम का मुख्य बिंदु यह रहा कि वर्तमान समय में व्यवसायियों में दहशत और खौफ का जो वातावरण बना है, उस पर कैसे लगाम लगाई जाए ताकि व्यापारी वर्ग बिना भय के अपना कारोबार कर सके। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शहर को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो जुझारू, सशक्त, निडर हो और हर समय व्यवसायियों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहे।
नम्रता त्रिपाठी को मेयर प्रत्याशी बनाने की एकजुट मांग
रायशुमारी के दौरान नगर निगम के सभी वार्ड पार्षदों, व्यवसायियों, समाज के प्रबुद्ध लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक स्वर में पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी की पुत्री नम्रता त्रिपाठी को मेयर प्रत्याशी बनाने की मांग रखी। वक्ताओं का कहना था कि नम्रता त्रिपाठी में वह नेतृत्व क्षमता है, जिससे मेयर बनने के बाद नगर निगम से जुड़ी समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान संभव है।
इस मौके पर यह भी कहा गया कि व्यवसायियों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाला मजबूत नेतृत्व चाहिए, और नम्रता त्रिपाठी उस कसौटी पर खरी उतरती हैं।
बेटी बनाम बहू का सियासी समीकरण बना चर्चा का विषय
नम्रता त्रिपाठी की एंट्री के बाद मेदिनीनगर का मेयर चुनाव और भी रोचक हो गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस बार चुनाव में “बेटी बनाम बहू” का राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आया है। लगभग सभी प्रमुख प्रत्याशियों ने अपनी पत्नियों को चुनावी मैदान में उतार दिया है, ऐसे में पूर्व मंत्री की शिक्षित और सशक्त बेटी का मैदान में उतरना चुनावी गणित को पूरी तरह बदल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल पति के राजनीतिक प्रभाव के सहारे चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को इस बार कड़ी चुनौती मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार नम्रता त्रिपाठी को मेयर पद की एक मजबूत और प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा, योग्यता और युवा नेतृत्व का प्रभाव
नम्रता त्रिपाठी ने सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है और देश की एक टॉप यूनिवर्सिटी से B.A. LL.B. की डिग्री हासिल की है। वर्तमान में वे कॉरपोरेट लॉ में उच्च अध्ययन कर रही हैं। उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक परिवार से जुड़ाव और युवा नेतृत्व की छवि ने नगर निगम चुनाव के समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार मेदिनीनगर का चुनाव केवल पारंपरिक राजनीतिक पकड़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, योग्यता, सोच और नेतृत्व क्षमता जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की प्राथमिकता में शामिल हो सकते हैं।
पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी की सक्रियता का मिलेगा लाभ
बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी जन समस्याओं को लेकर हमेशा मुखर रहे हैं और हर वर्ग के लोगों से उनका सीधा जुड़ाव है। इसका सीधा लाभ नम्रता त्रिपाठी को मिल सकता है। रायशुमारी में उनकी उपस्थिति भी चर्चा का विषय रही।
बड़ी संख्या में नेताओं और समाजसेवियों की मौजूदगी
इस आयोजन में पांकी विधानसभा के लाल सूरज, विश्रामपुर विधानसभा से रुद्र शुक्ला, मोहर्रम इंतजामिया के जनरल जीशान खान, इसराइल आजाद, अंसार कमिटी अध्यक्ष अनवर अहमद, कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष बिट्टू पाठक, सुधीर चंद्रवंशी, प्रमदेव सिंह, रामाशीष पांडेय, भोला पांडेय, ओमप्रकाश अमन, समाजसेवी अख्तर जमा, मुकेश सिंह, दिलीप चंद्रवंशी, रंजन दुबे, मुन्ना खान, सलामुद्दीन खान, रामचंद्र दीक्षित, अरबाब स्मार्ट लुक, सुधीर पासवान, मनु प्रसाद तिवारी, विवेका त्रिपाठी, के.डी. सिंह सहित हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
न्यूज़ देखो: मेयर चुनाव में नई राजनीति की आहट
मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह नई सोच बनाम पुरानी राजनीति का मंच बनता नजर आ रहा है। नम्रता त्रिपाठी की दावेदारी ने इस चुनाव को नई दिशा दे दी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
फैसला जनता के हाथ में
क्या इस बार मतदाता केवल राजनीतिक विरासत नहीं, बल्कि शिक्षित और सक्षम नेतृत्व को प्राथमिकता देंगे?
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