दिशोम गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे, जिनसे मजदूरों को मिला सम्मान और संबल

दिशोम गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे, जिनसे मजदूरों को मिला सम्मान और संबल

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #दिशोमगुरुजयंती : गढ़वा में शिबू सोरेन की जयंती पर मजदूर सम्मान समारोह का आयोजन हुआ।

गढ़वा में झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती श्रद्धा और सामाजिक सरोकार के साथ मनाई गई। एएनजी मेनपावर सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मजदूरों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कंबल और पारंपरिक खाद्य सामग्री का वितरण कर सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में झामुमो के वरिष्ठ नेताओं ने दिशोम गुरु के संघर्ष और विचारधारा को याद किया।

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  • एएनजी मेनपावर सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के गढ़वा कार्यालय में जयंती कार्यक्रम आयोजित।
  • झामुमो जिला सचिव शरीफ अंसारी रहे मुख्य अतिथि।
  • हाल ही में भर्ती 150 मजदूरों को कंबल, तिलकुट और चूड़ा वितरित।
  • शिबू सोरेन के संघर्ष और झारखंड राज्य निर्माण की भूमिका पर वक्ताओं ने डाला प्रकाश।
  • कार्यक्रम में झामुमो प्रखंड अध्यक्ष फुजैल अहमद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित।

गढ़वा जिले में झारखंड आंदोलन के प्रणेता, आदिवासी–मूलवासी समाज की बुलंद आवाज और दिशोम गुरु के नाम से विख्यात शिबू सोरेन की जयंती सामाजिक सरोकार के साथ मनाई गई। यह आयोजन एएनजी मेनपावर सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के गढ़वा कार्यालय परिसर में श्रद्धा, सम्मान और मजदूर हितों को केंद्र में रखकर संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला सचिव सह गढ़वा जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष शरीफ अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि झामुमो प्रखंड अध्यक्ष फुजैल अहमद विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन कंपनी के स्टेट हेड प्रदीप चौधरी ने किया।

मजदूरों के सम्मान से जुड़ा आयोजन

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए कंपनी द्वारा हाल ही में भर्ती किए गए 150 मजदूरों के बीच कंबल, तिलकुट और चूड़ा का वितरण किया गया। इस पहल को मजदूरों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक बताया गया। ठंड के मौसम में कंबल वितरण से मजदूरों को राहत मिलने की बात भी कही गई।

दिशोम गुरु को दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित अतिथियों और कर्मचारियों ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

शरीफ अंसारी ने बताए दिशोम गुरु के संघर्ष

मुख्य अतिथि शरीफ अंसारी ने अपने संबोधन में कहा:

शरीफ अंसारी ने कहा: “दिशोम गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने जीवनभर शोषित, वंचित और गरीब वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।”

उन्होंने कहा कि महाजनी प्रथा और शोषणकारी व्यवस्थाओं के खिलाफ दिशोम गुरु के आंदोलन ने आदिवासी और मूलवासी समाज को नई पहचान दिलाई। उनके संघर्षों का ही परिणाम है कि झारखंड राज्य अस्तित्व में आया और आज यहां गरीबों, मजदूरों और कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हो रही हैं।

फुजैल अहमद ने जीवन दर्शन पर डाला प्रकाश

विशिष्ट अतिथि फुजैल अहमद ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन संघर्ष, त्याग और सामाजिक न्याय की मिसाल है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को दिशोम गुरु के विचारों से प्रेरणा लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए कार्य करना चाहिए।

उपस्थित रहे कई गणमान्य लोग

कार्यक्रम में कंपनी के कर्मचारी अंकित पटेल, वीरेंद्र पाल, रघुवंश चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने दिशोम गुरु के आदर्शों पर चलने और मजदूरों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।

न्यूज़ देखो: विचारधारा से जुड़ा सामाजिक सरोकार

दिशोम गुरु की जयंती पर मजदूरों को सम्मान देना यह दर्शाता है कि उनकी विचारधारा आज भी समाज और श्रमिक वर्ग के लिए प्रेरणा बनी हुई है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संघर्ष, सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश

दिशोम गुरु के विचार हमें समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे आयोजनों से सामाजिक एकजुटता मजबूत होती है। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और श्रमिक सम्मान की इस पहल को समर्थन दें।

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गढ़वा

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