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बनहरदी कॉल ब्लॉक में विस्थापित रैयतों का फूटा आक्रोश, ज़मीन सुधार को लेकर प्रशासन को दिया अंतिम अल्टीमेटम

#लातेहार #विस्थापित_रैयत : बनहरदी कॉल ब्लॉक के रैयतों ने ज़मीन सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत बनहरदी कॉल ब्लॉक में विस्थापित रैयतों की एक महत्वपूर्ण आम सभा आयोजित की गई। पंचायत भवन बारी में हुई इस बैठक में ज़मीन सुधार को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। रैयतों ने स्पष्ट कहा कि जब तक ज़मीन सुधार की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी कार्य में सहयोग नहीं किया जाएगा। सभा में आंदोलन को व्यापक रूप देने का भी अल्टीमेटम दिया गया।

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  • पंचायत भवन बारी में विस्थापित रैयतों की आम सभा आयोजित।
  • ग्राम प्रधान रोबिन उरांव की अध्यक्षता में हुई बैठक।
  • ज़मीन सुधार को सर्वसम्मति से पहली प्राथमिकता घोषित।
  • एक माह पूर्व अंचल कार्यालय में कागजात जमा, कार्रवाई शून्य।
  • ज़मीन सुधार नहीं होने तक सरकारी कार्यों के बहिष्कार का निर्णय।
  • आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी।

चंदवा प्रखंड के बनहरदी कॉल ब्लॉक अंतर्गत विस्थापित रैयतों की समस्याएं एक बार फिर सतह पर आ गईं, जब पंचायत भवन बारी में रैयतों की एक महत्वपूर्ण आम सभा आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में विस्थापित पुरुष और महिला रैयत शामिल हुए और अपनी वर्षों पुरानी पीड़ा को खुलकर सामने रखा। सभा का मुख्य और सर्वसम्मत मुद्दा ज़मीन सुधार रहा, जिसे रैयतों ने अपनी सर्वोच्च और पहली प्राथमिकता घोषित किया।

बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान रोबिन उरांव ने की। उन्होंने कहा कि विस्थापित रैयत लंबे समय से अपने ज़मीन संबंधी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ पाया है।

ज़मीन सुधार को लेकर बढ़ता असंतोष

सभा को संबोधित करते हुए ग्राम प्रधान रोबिन उरांव ने कहा कि विस्थापन के बाद से ही रैयत लगातार सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ज़मीन सुधार से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज़ लगभग एक माह पूर्व अंचल कार्यालय में विधिवत रूप से जमा किए जा चुके हैं, इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच प्रक्रिया शुरू की गई है और न ही किसी स्तर पर ठोस पहल की गई है।

ग्राम प्रधान रोबिन उरांव ने कहा: “हमने नियम के अनुसार सारे कागजात जमा कर दिए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना बेहद निराशाजनक है।”

इस स्थिति को लेकर रैयतों में गहरा आक्रोश और असंतोष देखने को मिला। वक्ताओं ने कहा कि ज़मीन सुधार लंबित रहने के कारण वे कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रह जा रहे हैं।

सरकारी कार्यों के बहिष्कार का निर्णय

बैठक में उपस्थित रैयतों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक ज़मीन सुधार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक क्षेत्र में किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी कार्य में ग्रामीणों द्वारा किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया जाएगा। रैयतों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन्होंने मजबूरी में लिया है, ताकि प्रशासन का ध्यान उनकी जायज़ मांगों की ओर आकृष्ट किया जा सके।

रैयतों का कहना था कि ज़मीन के अभाव में न तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है और न ही उनका सामाजिक व आर्थिक विकास संभव हो पा रहा है। इससे उनका जीवन स्तर लगातार प्रभावित हो रहा है।

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आंदोलन को व्यापक रूप देने की चेतावनी

सभा के दौरान वक्ताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ज़मीन सुधार की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और संगठित रूप दिया जाएगा। रैयतों ने कहा कि वे अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक संघर्ष करने को मजबूर होंगे।

बड़ी संख्या में रैयत रहे उपस्थित

इस आम सभा में बेलाल अहमद, नौशाद अंसारी, रमेश उरांव, हाजी हाशिम अहमद अंसारी, अशोक भुइयां, बिनेश्वर उरांव, सुकु उरांव, महेश राम, तेटर मोची, जीते उरांव, नेजाम मियां, धनलाल उरांव, संतोष राम, अजय भुइयां, लालसहाय उरांव, कार्तिक महतो, सुरेश उरांव, जगदीश राम, रामेश्वर उरांव सहित बड़ी संख्या में पुरुष रैयत मौजूद रहे।

वहीं महिलाओं में सरिता देवी, सबिता देवी, सीता देवी, दयामनी देवी, सुनीता देवी, पूनम देवी, मनीषा कुमारी सहित दर्जनों महिला रैयतों की सक्रिय उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि यह मुद्दा पूरे समुदाय से जुड़ा हुआ है।

एकजुटता का आह्वान

बैठक के अंत में ग्राम प्रधान रोबिन उरांव ने सभी विस्थापित रैयतों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ज़मीन सुधार के अधिकार के लिए संघर्ष पूरी मजबूती और एकता के साथ जारी रहेगा और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन रुकेगा नहीं।

न्यूज़ देखो: ज़मीन अधिकार बनाम प्रशासनिक उदासीनता

बनहरदी कॉल ब्लॉक के विस्थापित रैयतों की यह सभा प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। ज़मीन सुधार जैसे मूलभूत अधिकारों में देरी सामाजिक असंतोष को जन्म देती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस अल्टीमेटम को कितनी गंभीरता से लेता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों के लिए एकजुट संघर्ष का संदेश

ज़मीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सम्मान और पहचान का आधार है। विस्थापित रैयतों की यह लड़ाई सामाजिक न्याय से जुड़ी है। आप भी अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और अधिकारों की इस आवाज़ को मजबूती दें।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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