#सिसई #नियुक्ति_विवाद : ग्राम प्रधान व सहायक सचिव चयन को लेकर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित कुदरा पंचायत में ग्राम प्रधान और सहायक सचिव की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर चयन प्रक्रिया में अनियमितता और बाधा उत्पन्न करने के आरोप लगाए। उन्होंने निष्पक्ष और नियमसम्मत नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। मामले ने स्थानीय प्रशासन के समक्ष पारदर्शिता और प्रक्रिया की वैधता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- कुदरा पंचायत में ग्राम प्रधान व सहायक सचिव पद खाली।
- ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी सिसई को सौंपा आवेदन।
- जयराम उरांव पर चयन प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप।
- बिना आदेश के हस्ताक्षर अभियान और मोहर इस्तेमाल का दावा।
- ग्रामीणों की मांग—सरकारी नियमों के तहत निष्पक्ष चयन।
सिसई प्रखंड के कुदरा पंचायत में ग्राम प्रधान और सहायक सचिव के पदों पर नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचे और अंचल अधिकारी को आवेदन सौंपकर चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई, तो इससे गांव के प्रशासनिक ढांचे पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला
ग्रामीणों के अनुसार, कुदरा गांव में ग्राम प्रधान एवं सहायक सचिव का पद लंबे समय से खाली है। इन पदों पर योग्य व्यक्तियों का चयन सरकारी नियमों के तहत होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों द्वारा अनुचित हस्तक्षेप किया गया, जिससे प्रक्रिया बाधित हुई।
ग्रामीणों ने बताया कि चयन प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधियों और अंचल प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन उसे सुचारू रूप से पूरा नहीं होने दिया गया।
जयराम उरांव पर लगाए गए आरोप
ग्रामीणों ने कुदरा निवासी जयराम उरांव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
- पिछले लगभग एक वर्ष से ग्राम प्रधान बनने का प्रयास कर रहे हैं।
- अपने नजदीकी व्यक्ति को सहायक सचिव बनवाने की कोशिश।
- चयन प्रक्रिया में विरोध और व्यवधान उत्पन्न किया।
- बिना सरकारी आदेश के गांव में हस्ताक्षर अभियान चलाया।
- खुद की मोहर बनाकर उपयोग करने का आरोप।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जयराम उरांव पहले से कई समितियों और पदों से जुड़े हुए हैं, जिनमें उप मुखिया, जेटीडीएस अध्यक्ष, खाद-बीज वितरण और लैम्पस अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं, और इनका दुरुपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने अंचल प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की है कि:
- नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत हो।
- चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
- किसी भी व्यक्ति द्वारा मनमानी या दबाव की राजनीति न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो गांव में विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ेगा।
एक ग्रामीण ने कहा: “हम चाहते हैं कि गांव में जो भी नियुक्ति हो, वह पूरी तरह नियमों के तहत हो और किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।”
प्रशासन की भूमिका पर नजर
इस पूरे मामले में अब प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। अंचल कार्यालय में ग्रामीणों की शिकायत के बाद उम्मीद की जा रही है कि अधिकारी इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं किया गया, तो इससे गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
न्यूज़ देखो: पारदर्शिता ही गांव के विकास की नींव
कुदरा पंचायत का यह मामला स्थानीय शासन व्यवस्था में पारदर्शिता की अहमियत को उजागर करता है। जब नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि वह निष्पक्ष जांच कर सही प्रक्रिया सुनिश्चित करे। क्या इस मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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