#डुमरी #आजीविका_सशक्तिकरण : पहल परियोजना के माध्यम से PVTG परिवारों को मुर्गी पालन से स्थायी आय का अवसर।
आकांक्षी प्रखंड डुमरी के औरापाठ गांव में नीति आयोग पोषित ‘पहल’ परियोजना के अंतर्गत PVTG परिवारों की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। 25 फरवरी 2026 को मुर्गी पालन गतिविधि के तहत 15 PVTG परिवारों के बीच देसी मुर्गियों और आवश्यक संसाधनों का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम उपायुक्त के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन और आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से संपन्न हुआ। परियोजना का उद्देश्य औरापाठ क्षेत्र में स्थायी एवं आत्मनिर्भर आजीविका को बढ़ावा देना है।
- 25 फरवरी 2026 को औरापाठ गांव में मुर्गी वितरण कार्यक्रम।
- 15 PVTG परिवारों को आजीविका संवर्धन हेतु सहायता।
- प्रत्येक परिवार को 100 देसी मुर्गियां और 100 किलोग्राम चारा।
- ड्रिंकर, फीडर और लाभुक स्थल पर डिस्प्ले बोर्ड स्थापित।
- कार्यक्रम में प्रखंड प्रमुख जीवंती एक्का की उपस्थिति।
- ‘पहल’ परियोजना के तहत 43 PVTG परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य।
आकांक्षी प्रखंड डुमरी के सुदूरवर्ती औरापाठ गांव में ‘पहल’ परियोजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस परियोजना का फोकस विशेष रूप से PVTG समुदाय के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर है, ताकि वे स्थायी आजीविका से जुड़कर अपने जीवन स्तर में सुधार कर सकें।
उपायुक्त के मार्गदर्शन में हो रहा प्रभावी क्रियान्वयन
यह परियोजना उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के मार्गदर्शन और सतत मॉनिटरिंग में संचालित की जा रही है। जिला प्रशासन की नियमित समीक्षा के कारण परियोजना का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से हो पा रहा है।
नीति आयोग द्वारा पोषित “पाथ टू एडवांसमेंट एंड होलिस्टिक एक्शन फॉर लाइवलीहुड इन औरापाठ (PAHAL)” परियोजना का उद्देश्य केवल तात्कालिक सहायता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ आजीविका मॉडल विकसित करना है।
मुर्गी पालन से बढ़ेगी आय के अवसर
दिनांक 25-02-2026 को औरापाठ गांव में ‘पहल’ परियोजना के अंतर्गत मुर्गी पालन गतिविधि का आयोजन किया गया। इस दौरान 15 चयनित PVTG परिवारों को जीविकोपार्जन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए।
प्रत्येक परिवार को:
- देसी नस्ल की 100 मुर्गियां
- 100 किलोग्राम मुर्गी चारा
- 2 ड्रिंकर और 2 फीडर
प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक लाभुक के निवास स्थल पर डिस्प्ले बोर्ड भी लगाया गया है, जिससे परियोजना की पहचान, निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
पूर्व प्रशिक्षण से मिलेगा वैज्ञानिक लाभ
परियोजना के अंतर्गत लाभुक परिवारों को मुर्गी पालन से पहले व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षण में मुर्गियों की देखभाल, चारा प्रबंधन, रोग नियंत्रण और विपणन की जानकारी शामिल रही।
इससे लाभुक वैज्ञानिक पद्धति से मुर्गी पालन कर सकेंगे और नियमित आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकेंगे।
बहुआयामी विकास पर केंद्रित है ‘पहल’ परियोजना
उल्लेखनीय है कि ‘पहल’ परियोजना केवल मुर्गी पालन तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत औरापाठ क्षेत्र में:
- बुनियादी सिंचाई अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है।
- कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- पशुपालन और अन्य आजीविका मॉडल को चरणबद्ध रूप से लागू किया जा रहा है।
परियोजना के तहत कुल 43 PVTG परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
मुर्गी वितरण कार्यक्रम के अवसर पर डुमरी प्रखंड की प्रखंड प्रमुख जीवंती एक्का की उपस्थिति रही। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम PVTG समुदाय के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम का क्रियान्वयन नीति आयोग द्वारा, जिला प्रशासन के नेतृत्व में आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से किया गया।
नियमित मॉनिटरिंग से सुनिश्चित हो रहा परिणाम
जिला प्रशासन द्वारा परियोजना की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो और लाभ सीधे लक्षित परिवारों तक पहुंचे। प्रशासन का मानना है कि निरंतर निगरानी से परियोजना के परिणाम दीर्घकालिक और प्रभावी होंगे।
न्यूज़ देखो: आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
‘पहल’ परियोजना यह दिखाती है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन सही दिशा और सतत निगरानी में हो, तो सुदूरवर्ती और वंचित समुदायों का जीवन बदला जा सकता है। PVTG परिवारों को आजीविका से जोड़ना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता देना है। अब देखना होगा कि यह मॉडल अन्य क्षेत्रों में कितना प्रभावी रूप से लागू होता है—हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आजीविका से आत्मविश्वास तक का सफर
औरापाठ के PVTG परिवारों के लिए यह मुर्गी वितरण केवल संसाधन नहीं, बल्कि नए भविष्य की शुरुआत है। स्थायी आय, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की दिशा में यह एक मजबूत कदम है।
अगर आप भी मानते हैं कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, तो इस खबर को साझा करें। अपनी राय कमेंट में दें, सकारात्मक पहल को आगे बढ़ाएं और जागरूकता फैलाकर बदलाव का हिस्सा बनें।