News dekho specials
Gumla

बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कसी कमर, चैनपुर कार्यशाला में लिया उन्मूलन का सामूहिक संकल्प

#चैनपुर #बालविवाहउन्मूलन : प्रशासन और समाज ने मिलकर बाल विवाह व डायन प्रथा के खिलाफ एकजुटता दिखाई।

चैनपुर अनुमंडल में उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशानुसार बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में बाल विवाह और डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन पर जोर दिया गया। कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सतत निगरानी और जन-जागरूकता का संकल्प लिया। यह आयोजन समाज के अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • चैनपुर अनुमंडल में आयोजित हुई एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला
  • बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान और सामाजिक कुरीति निवारण योजना पर फोकस।
  • कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर समाहर्ता शहशेंद्र बड़ाईक ने की।
  • बाल विवाह और डायन प्रथा के खिलाफ सामूहिक शपथ।
  • अधिकारियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्वयं सहायता समूहों की रही सक्रिय भागीदारी।

चैनपुर अनुमंडल में आयोजित इस कार्यशाला ने प्रशासन और समाज के बीच समन्वय को और मजबूत करने का संदेश दिया। जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित यह कार्यक्रम बाल विवाह और अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक साझा मंच के रूप में सामने आया, जहां नीति, व्यवहार और जमीनी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा हुई।

प्रशासनिक नेतृत्व में हुआ आयोजन

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता अपर समाहर्ता गुमला शहशेंद्र बड़ाईक ने की। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी चैनपुर पूर्णिमा कुमारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. धनुराज सुब्रह्मरु, बीडीओ-सह-सीडीपीओ यादव बैठा, अंचलाधिकारी दिनेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

बाल विवाह को बताया गंभीर सामाजिक चुनौती

कार्यशाला को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने बाल विवाह को समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सोच से जुड़ी समस्या है, जिसे सामूहिक प्रयासों से ही समाप्त किया जा सकता है।

इस अवसर पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन बाल विवाह और डायन प्रथा के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

प्रशासन और समुदाय के तालमेल पर जोर

अनुमंडल पदाधिकारी पूर्णिमा कुमारी ने अपने संबोधन में कहा:

पूर्णिमा कुमारी ने कहा: “प्रशासन और समुदाय के बीच बेहतर तालमेल ही इन सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी नियंत्रण पा सकता है। राज्य सरकार इनके उन्मूलन के लिए निरंतर सक्रिय है और सभी विभागों का समन्वित प्रयास ही सफलता की कुंजी है।”

उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वयं सहायता समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखें और संदिग्ध मामलों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

News dekho specials

स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी

कार्यशाला में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. धनुराज सुब्रह्मरु ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह से किशोरियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में जागरूकता फैलाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

जागरूकता के लिए लघु फिल्मों का प्रदर्शन

प्रतिभागियों को प्रभावी ढंग से जागरूक करने के लिए कार्यशाला के दौरान सामाजिक कुरीतियों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इन फिल्मों के माध्यम से बाल विवाह और डायन प्रथा के सामाजिक, मानसिक और कानूनी प्रभावों को सरल भाषा में समझाया गया, जिससे उपस्थित लोगों में गहरी समझ और संवेदनशीलता देखने को मिली।

सामूहिक शपथ के साथ लिया गया संकल्प

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब उपस्थित सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बाल विवाह एवं डायन प्रथा के विरुद्ध शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखेंगे और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर इन कुरीतियों के खिलाफ कार्य करेंगे।

कल्याणकारी योजनाओं पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मिशन शक्ति और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। खुली चर्चा के दौरान क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर सुझाव सामने आए, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की गई।

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता

इस कार्यशाला में उप प्रमुख प्रमोद खलखो, ब्लॉक परियोजना पदाधिकारी बबीता बड़ाईक, नीति आयोग फेलो, मुखिया, पंचायत सचिव, लेडी सुपरवाइजर और बड़ी संख्या में ग्रामीण समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में बाल विवाह मुक्त समाज की दिशा में कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

न्यूज़ देखो: कानून के साथ सामाजिक चेतना की जरूरत

चैनपुर में आयोजित यह कार्यशाला स्पष्ट करती है कि बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन केवल कानून से संभव नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सतत निगरानी से ही बदलाव आएगा। प्रशासन की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन इसकी सफलता समुदाय की भागीदारी पर निर्भर करेगी। आने वाले समय में जमीनी स्तर पर इन संकल्पों के क्रियान्वयन की परीक्षा होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज ही सुरक्षित भविष्य की नींव

बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियां आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर गहरा असर डालती हैं। इन्हें रोकना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
यदि आप अपने आसपास ऐसी किसी घटना की जानकारी रखते हैं, तो चुप न रहें और प्रशासन को सूचित करें।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और एक जागरूक, सुरक्षित और समान समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

Related News

Back to top button
🔔

Notification Preferences

error: