लातेहार में पेसा अधिनियम पर जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित, ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने पर जोर

लातेहार में पेसा अधिनियम पर जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित, ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने पर जोर

author Ravikant Kumar Thakur
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#लातेहार #पेसा_सम्मेलन : अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम स्वशासन और जनभागीदारी मजबूत करने पर हुई चर्चा।

लातेहार समाहरणालय सभागार में जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर पेसा अधिनियम और ग्राम सभाओं के अधिकारों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपायुक्त संदीप कुमार ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि पेसा अधिनियम जनजातीय समुदायों के अधिकारों और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सम्मेलन में जल, जंगल, जमीन, ग्राम सभा की भूमिका और जनभागीदारी से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने विचार साझा किए।

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  • समाहरणालय सभागार, लातेहार में जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस (पेसा) आयोजित।
  • उपायुक्त संदीप कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया।
  • ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण और जनजातीय अधिकारों पर विशेष चर्चा हुई।
  • जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में ग्राम सभा की भूमिका पर जोर।
  • कार्यक्रम में टाना भगत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों की भागीदारी रही।
  • पेसा नियमावली-2025 के कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों की दी गई जानकारी।

लातेहार समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद उपायुक्त संदीप कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन किया।

सम्मेलन में अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, जनजातीय समुदायों के अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा विकास योजनाओं में ग्राम सभाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, टाना भगत प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

बिरसा मुंडा को नमन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त संदीप कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं टाना भगत प्रतिनिधियों ने श्रद्धापूर्वक नमन किया।

कार्यक्रम के दौरान बिरसा मुंडा के संघर्षों और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा में उनके योगदान को भी याद किया गया।

पेसा अधिनियम को बताया जनजातीय अधिकारों का मजबूत माध्यम

उपायुक्त संदीप कुमार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पेसा अधिनियम जनजातीय समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को व्यवहारिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि ग्रामीण स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा: “पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत होगी और अनुसूचित क्षेत्रों में जनभागीदारी को नया आधार मिलेगा।”

पेसा नियमावली-2025 की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यशाला के दौरान पेसा नियमावली-2025 से जुड़े विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों की जानकारी विस्तार से दी गई। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बताया कि ग्राम सभाओं को केवल औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है।

सम्मेलन में यह भी बताया गया कि ग्राम सभाओं को सशक्त किए बिना अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र विकास की कल्पना अधूरी है।

जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर

कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में ग्राम सभा की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जल, जंगल और जमीन जैसे संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद जरूरी है।

सम्मेलन में कहा गया कि पेसा अधिनियम ग्राम सभाओं को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और संरक्षण में अधिकार प्रदान करता है, जिससे स्थानीय समुदायों की सहभागिता और जवाबदेही दोनों बढ़ती हैं।

जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा पर चर्चा

कार्यक्रम में जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि विकास योजनाओं के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। पेसा अधिनियम इसी संतुलन को बनाए रखने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

विकास योजनाओं में ग्राम सभा की भूमिका होगी मजबूत

सम्मेलन में सरकारी योजनाओं के चयन, क्रियान्वयन और निगरानी में ग्राम सभा की प्रत्यक्ष भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों ने कहा कि विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है।

उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा: “ग्राम सभाओं को मजबूत कर ही विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।”

लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और पारदर्शिता पर बल

कार्यक्रम में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और पारदर्शिता को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पंचायत स्तर पर अधिकारों का प्रभावी हस्तांतरण ही पेसा अधिनियम की मूल भावना है।

कार्यशाला में मौजूद प्रतिभागियों ने भी ग्राम सभा को अधिक अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच हुआ संवाद

कार्यक्रम में पेसा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुति दी और प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अपने अनुभव और सुझाव भी साझा किए।

सम्मेलन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि पेसा अधिनियम को व्यवहारिक रूप से लागू करने की दिशा में सामूहिक समझ विकसित करना भी रहा।

कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस अवसर पर वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रवेश अग्रवाल, उप विकास आयुक्त सैय्यद रियाज अहमद, अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी, एलआरडीसी प्रभात कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी दिनेश कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी मेरी मड़की, सिविल सर्जन डॉ. राजमोहन खलखो, जिला स्तरीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, टाना भगत प्रतिनिधिगण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: ग्राम सभाओं को अधिकार देना ही असली लोकतंत्र

लातेहार में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय अधिकारों और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पेसा अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक मजबूत कर सकता है। अब सबसे जरूरी बात यह होगी कि सम्मेलन में हुई चर्चाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार और संसाधन भी मिलें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक ग्राम सभा ही मजबूत समाज की पहचान

जब गांव खुद अपने विकास का निर्णय लेने लगते हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संभव है।

आदिवासी समाज की परंपराओं और अधिकारों की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।

यदि आप भी ग्राम सभा, स्थानीय अधिकार और जनभागीदारी को मजबूत मानते हैं तो इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और जागरूकता फैलाने में सहयोग करें।

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Written by

चंदवा, लातेहार

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